कॉरपोरेट दुनिया को हिला कर रख देने वाले सत्यम घोटाले के मुख्य अभियुक्त बी. रामलिंग राजू और उसके भाई बी. रामा राजू को सात साल सश्रम कैद की सजा सुनाई गई है। दोनों को साढ़े पांच करोड़ रुपये का जुर्माना भी देना होगा। सत्यम कंप्यूटर्स के खातों में गड़बड़ी के जरिये किए गए 7000 करोड़ रुपये के इस घोटाले में कंपनी के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन बी. रामलिंग राजू और उसके भाई के खिलाफ एक विशेष अदालत ने सजा सुनाई है। छह साल पहले सामने आए इस घोटाले को कॉरपोरेट जगत का सबसे बड़ा अकाउंटिंग घोटाला तक कहा गया था। विशेष अदालत के जज बीवीएलएन चक्रवर्ती की अदालत ने बी. रामलिंग राजू और बी. रामा राजू के साथ कंपनी (सत्यम कंप्यूटर्स) के सीएफओ (चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर) वदलामणि, ऑ़डिट कंपनी प्राइस वाटरहाउस कूपर्स के ऑडिटरों सुब्रमणि गोपालकृष्णन और टी. श्रीनिवास को भी सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इन लोगों पर 25 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया गया है। मामले में दस लोगों को आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने और अन्य अपराधों का दोषी करार दिया गया। सीबीआई ने इस पूरे घोटाले की जांच की थी।(Rama Raju Satyam Biography in Hindi)
खबरों के अनुसार, रामलिंग राजू ने कुछ नेताओं से भी पैसे लिए थे और रिएल एस्टेट के बिजनेस में निवेश किए थे। हालांकि, 2009 तक उम्मीद के हिसाब से रियल एस्टेट की कीमत नहीं बढ़ी और राजू को योजनानुसार फायदा नहीं हो सका।
जब राजू से 2009 में उन नेताओं ने पैसे मांगे तो पैसे राजू ने पैसे न होने की बात कह दी। जिसके बाद राजू ने सत्यम घोटाले को कुबूल कर लिया।
क्या था घोटाला
सत्यम कंप्यूटर्स सर्विसेज 6 जनवरी, 2009 तक शेयरधारकों की पसंदीदा कंपनी थी। मजबूत ब्रांड, अच्छी तिमाही नतीजे और तरक्की के लक्षण, सब कुछ बहुत बढ़िया था। लेकिन जैसे ही कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन बी. रामलिंग राजू ने 7 जनवरी, 2009 को हेराफेरी की बात कबूली, लाखों शेयरधारकों की दुनिया उजड़ गई।
दरअसल राजू वर्षों से कंपनी की बैलेंसशीट में मुनाफे और राजस्व को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाता रहा था। इसने कंपनी के शेयरों की कीमतें बढ़ाई रखी और कंपनी का बाजार पूंजीकरण बढ़ता गया। लेकिन फर्जीवाड़े के पर्दाफाश होने तक निवेशकों के 14000 करोड़ रुपये डूब चुके थे।
रामलिंग राजू और कंपनी के खातों में हेराफेरी करके 7000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था। इससे सत्यम कंप्यूटर्स के निवेशकों को लगभग 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। राजू और उसके साथियों ने इस पूरी हेराफेरी के जरिये 1900 करोड़ रुपये हड़प लिए थे।
कौन है राजू
किसान परिवार में जन्मे बैयाराजू रामलिंग राजू ने 1987 में सत्यम् कंप्यूटर सर्विसेज की शुरुआत करने से पहले होटल, स्पिनिंग मिल, और रियल एस्टेट (मेटॉस इंफ्रा) में भी किस्मत अजमाई, लेकिन सिक्का सत्यम कंप्यूटर्स से चला।
विजयवाड़ा के लोयल कॉलेज से बीकॉम और अमेरिका के ओह्यो विश्वविद्यालय(अमेरिका) से एमबीए राजू की कंपनी शेयर बाजार में 1992 में उतरी और जल्दी ही देश की बड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियों में से एक हो गई।
राजू की तरक्की की कहानी राजनीति और कारोबार के गठजोड़ की भी कहानी रही है। एक समय में वह आंध्र के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू का करीबी रहा। कंपनी के खातों में फर्जीवाड़े की बात स्वीकार करने के बाद उसने कंपनी के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया था।
दुनिया को बचाया था वाई2 के संकट से
कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े अकाउंटिंग घोटाले के उजागर होने से पहले तक बी. रामलिंग राजू भारतीय आईटी उद्योग का सिरमौर शख्स माना जाता था। खास कर वर्ष 2000 के दौरान दुनिया भर में छाए वाई2के संकट का हल निकाल कर उसने खासी प्रतिष्ठा अर्जित कर ली थी।
सत्यम् कंप्यूटर्स की स्थापना 1987 में की गई थी, लेकिन कुछ ही समय में यह देश की चौथी बड़ी आईटी कंपनी बन गई। कुख्यात वाई2के संकट का समाधान सुझाने के बाद कंपनी के मुनाफे में जबरदस्त इजाफा हुआ।
क्या था वाई2 संकट
उस समय इस बात का डर था कि एक वायरस दुनिया के कंप्यूटरों को क्रैश कर सकता है। चूंकि कम्प्यूटर 2000 को नहीं पहचान सकेगा, क्योंकि तब तक इसे 1900 को पहचानने की आदत थी, इसलिए दुनिया भर के सिस्टम क्रैश हो सकते थे, लेकिन राजू की कंपनी ने इस समस्या का हल निकाल लिया।
हालांकि, इसके बाद कंपनी के राजस्व का स्रोत सूखने लगा और ठीक इसी समय से राजू ने दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कंपनी के खाता-बही में हेराफेरी शुरू कर दिया।
स्पिनिंग मिल से शुरू किया था सफर
यह भी दिलचस्प है कि अपनी कंपनी के खातों के इर्द-गिर्द मुनाफे की झूठी कहानी बुनने से पहले राजू ने अपना पहला कारोबार स्पिनिंग मिल लगा कर शुरू किया था। इसका नाम श्री सत्यम् था।
अपने परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के साथ राजू ने रियल एस्टेट कंपनी मेटास की भी नींव रखी। इस कंपनी का मालिकाना हक राजू के बेटे को दिया गया था। राजू पर सत्यम के पैसों से अपने बेटों की कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगा था।
शेयर मार्केट ने प्रवेश पर लगी रोक
घोटाला सामने आने के बाद सेबी ने सत्यम के14 साल के लिए पूंजी बाजार में प्रवेश पर रोक दिया और उसे निवेशकों के 3000 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया। 7 जनवरी, 2009 को राजू ने सेबी और तमाम स्टॉक एक्सचेंजों को एक पत्र भेज कर कंपनी के मुनाफे और राजस्व को बढ़ा कर दिखाने का अपराध स्वीकार कर लिया था।
दिलचस्प बयान
राजू ने उस वक्त एक बड़ा दिलचस्प बयान दिया था। उसने कहा था- वह एक ऐसे शेर की सवारी कर रहा था, जिसका निवाला बने बगैर उतरने का तरीका उसे मालूम नहीं था।
एक इंटरव्यू में उसने कहा था कि सत्यम के पास 4000 करोड़ रुपये की नकदी थी और इससे वह और 15,000 से 20000 रुपये इकट्ठा कर सकता था। 9 जनवरी, 2009 को उसने यह बात कबूल ली थी कि सत्यम के खाते में उसके मुनाफे और राजस्व को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया।
66 देशों में फैला था कारोबार
घोटाला सामने आने से पहले कंपनी में 53 हजार लोग काम करते थे। फॉर्च्यून-500 की श्रेणी में आने वाली 185 कंपनियां सत्यम की क्लाइंट थीं। कंपनी का कारोबार 66 देशों में था। 2006 में कमाई के मामले में सत्यम् ने एक अरब का रिकॉर्ड तोड़ा और 2007 में कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए सत्यम को गोल्डन पीकॉक अवार्ड मिला।
शेयर मार्केट की टूट गई थी कमर
राजू रामलिंगा ने जब अपने पद से इस्तीफा देकर इस घोटाले के की सूचना बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को दी, तो शेयर बाजार में भारी गिरावट आ गई। इस फर्जीवाड़े की खबर सामने आते ही एक ही दिन में सत्यम के शेयरों में करीब 70 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
6 जनवरी 2009 को कंपनी के शेयर की कीमत 178.95 रुपए थी, लेकिन अगले ही दिन इस घोटाले की खबर के बाद इसकी कीमत गिरकर सिर्फ 40.25 रुपए रह गई।
6 जनवरी 2009 को सेंसेक्स 10,335.93 के स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन अगले ही दिन 7 जनवरी 2009 को इस घोटाले से मार्केट में 749.05 अंकों की गिरावट देखी गई। 7 जनवरी 2009 को सेंसेक्स 9,586.88 के स्तर पर बंद हुआ।
राजू पर लगी हैं ये धाराएं
अभियुक्त रामलिंगा राजू को आईपीसी की धारा 120बी, 420 और 409 के तहत दोषी करार दिया गया है और सजा दी गई है।
120बीः आपराधिक षडयंत्र की सजा के प्रावधान की इस धारा के तहत अपराध का षडयंत्र रचने के दोषी पाए गए अभियुक्त को उतनी ही सजा दी जा सकती है, जितनी की सीधे उस अपराध को अंजाम देने वाले अभियुक्त को।
409: यह धारा आपराधिक विश्वासघात से जुड़ी है। जनसेवक, व्यापारी, एजेंट या बैंक कर्मी द्वारा आपराधिक विश्वासघात करने पर इस धारा के तहत दोषियों को दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
420: धोखाधड़ी और बेइमानी से संबंधित इस धारा के तहत अधिकतम सात साल तक की सजा सुनाई जा सकती है।
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