1

 

 

 

 

You May Also Like!

 

ये GSI की तरफ से जारी की गई प्रेस रिलीज़ है. गौर कीजिए Ore को हाइलाइट किया गया है. Ore मतलब अयस्क. (सोर्स – GSI)

 

24, 22, 18, 14, कैरट सोने में कितना सोना ...

 

 

 

 

इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि Gold का पता कैसे लगाते हैं और पता लगने के बाद वहां से सोना कैसे निकाला जाता है?

जियोलॉजी 101

ऐसा नहीं होता कि पहाड़ खोदते-खोदते सीधे सोने की चट्टान निकल आए. सबसे पहले हमें जियोलॉजी यानी भूविज्ञान की बेसिक टर्मिनोलॉजी समझनी होगी. कुछ नहीं, बस चट्टान, अयस्क, खनिज और धातु का अंतर समझना है.

खनिज (Mineral) – एक तय केमिकल बनावट वाली अजैवी चीज़ को खनिज (Mineral) कहते हैं. लोहा, सोना, तांबा, कोयला, नमक ये सब खनिज हैं.

लेकिन हमारे काम के ज़्यादातर खनिज हमें साबुत नहीं मिलते हैं. प्राकृतिक रूप से कई खनिज मिलकर एक चट्टान (Rock) के रूप में मौजूद होते हैं.

इस दुनिया में ढेर सारे खनिज हैं. हमारे काम के कुछ ही हैं. इसलिए हमारे काम के खनिज वाली चट्टानों के लिए अलग टर्म है. जिन चट्टानों से हमारे काम के खनिज निकाले जा सकते हैं, उन्हें अयस्क (Ore) कहते हैं.

धातु (Metal) क्या होती है? धातु मतलब कुछ स्पेशल टाइप के खनिज. आमतौर पर कठोर, चमकीले और जिनसे बिजली और आग बह सके. जैसे कि सोना, लोहा और तांबा धातु हैं, जबकि कोयला और नमक नहीं हैं.

 

 

 

 

 

 

हर धातु एक खनिज होती है. लेकिन हर खनिज धातु नहीं होता.

तो सबकुछ एक लाइन में बता देते हैं – चट्टान में बहुत सारे खनिज होते हैं. उन चट्टानों को अयस्क कहते हैं, जिनसे हमारे काम के खनिज निकाले जा सकते हैं. कुछ स्पेशल टाइप के खनिज धातु की श्रेणी में आते हैं.

ये सोने का अयस्क है. सोने के बारे में एक और अच्छी बात ये है कि वो अकेला रहता है. बिना कोई बॉन्ड बनाए. इसलिए उसे निकालना आसान होता है. (सोर्स – विकिमीडिया)

सोने जैसी धातु कितनी रेयर है, इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगाइए- सोनभद्र में खोजे गए सोने की अयस्क में सोने की मात्रा 3.03 ग्राम प्रति टन है. मतलब ये 160 किलोग्राम सोना निकालने के लिए लगभग 53,000 टन चट्टान खोदकर निकालनी होगी. खोदा पहाड़ और निकली चुहिया के काफी करीब की बात. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, जिन खदानों से 8-10 ग्राम सोना/टन निकलता है, वो अच्छी क्वालिटी की होती हैं.

सोना निकालने के दो अहम पड़ाव होते हैं. पहले सोने की अयस्क पहचाननी होती है, फिर उस अयस्क में से Gold अलग करना होता है. इसकी पूरी प्रक्रिया बहुत समय लेती है.

Gold Rate

सोना निकालने की शुरुआत होती प्रोस्पेक्टिंग से. प्रोस्पेक्टिंग मतलब संभावित गोल्ड साइट्स को पहचानना और वहां की चट्टानों को टेस्ट करना. टेस्ट से ये पता लगाना होता है कि क्या इस अयस्क से प्रॉफिटेबल मात्रा में सोना निकल पाएगा? मतलब सबकुछ करने के बाद जितना सोना निकलेगा, उसकी कीमत निवेश से ज़्यादा होनी चाहिए.

माइनिंग करने वाली संस्थाएं हर इलाके की जियोलॉजी का अंदाज़ा रखती हैं. मतलब कहां की चट्टानों में क्या है, इसका अंदाज़ा उन्हें होता है. अमूमन सोना वहीं पाया जाता है, जहां दूसरी धातुएं, जैसे कि चांदी और तांबा मौजूद होते हैं. संभावित गोल्ड साइट्स से चट्टानों के सैंपल को लैब में टेस्ट किया जाता है.

लैब में छोटे टुकड़ों की स्टडी करके उस अयस्क पिंड की मॉडलिंग की जाती है. इसमें कई बार जटिल कंप्यूटर प्रोग्राम की मदद भी ली जाती है. कंप्यूटराइज़्ड मॉडल से अयस्क पिंड की के आकार और बनावट का अंदाज़ा लगता है. साथ ही इससे ये भी पता चलता है कि उस अयस्क को निकालने का सबसे सही तरीका क्या होगा.

 

 

जमीन में फावड़ा चलाने से पहले ये जानना जरूरी है कि सोना कहां मिलता है, इसे कैसे निकालते हैं

 

 

सोने की खुदाई

जहां सोना सतह के थोड़ा ही भीतर मौजूद होता है, वहां छोटे-छोटे गड्ढे करते हैं. उनमें डायनामाइट भरते हैं और धमाकों से उसे खोद मारते हैं. चट्टान के इन छोटे-छोटे टुकड़ों को इक ट्रक में भरकर सोना निकालने के लिए भेज दिया जाता है.

सोने की खदान को परत दर परत खोदा जाता है, इसलिए हमें वो पट्टियां अलग से दिखती हैं. (सोर्स – रॉयटर्स) 

जहां सोना सतह के बहुत नीचे होता है, वहां अंडरग्राउंड माइनिंग होती है. इसमें लिफ्ट और शाफ्ट का एक कॉप्लिकेटेड सिस्टम इन्वॉल्व होता है. गहरे-गहरे वर्टिकल कॉलम खोदे जाते हैं. उन कॉलम में हॉरिज़ॉन्टल गुफाएं बनाई जाती हैं. फिर उन गुफाओं में अंदर जाकर वहां से धमाके कर चट्टान के टुकड़े इकट्ठे होते हैं.

जैसे भी हो, इन चट्टानों के टुकड़ों को ट्रक में भरकर इन्हें एक मिल भेज दिया जाता है. मिल में इन चट्टान के टुकड़ों से सोना निकालने का काम शुरू होता है.

साफ-सफाई 

मिल में इन टुकड़ों का चूरा बना लिया जाता है. फिर चूरे में पानी मिलाकर स्लरी तैयार होती है. इस स्लरी से सोना निकालने की सबसे पॉप्युलर मैथड है लीचिंग. स्लरी में सायनाइड और ऑक्सीजन मिलाकर सोने को अलग कर लिया जाता है. यही है लीचिंग.

लीचिंग में सायनाइड का इस्तेमाल होने के कारण इस प्रोसेस से ज़हरीला वेस्ट भी निकलता है. (सोर्स – विकिमीडिया) 

इसके बाद कई और स्टेज के प्यूरिफिकेशन से गुज़रने के बाद सोना पिघलाया जाता है और इसके ब्लॉक तैयार कर लिए जाते हैं. फिर ये ब्लॉक आगे और रिफाइनिंग के लिए भेजे जाते हैं. उसके बाद जाकर सोना बाज़ार में पहुंचता है.

दुनियाभर में मौजूद गोल्ड डिपॉज़िट में से केवल 10% ही ऐसे हैं, जिनमें निकालने लायक मात्रा में सोना है. दुनिया का ज़्यादातर सोना समुद्र की तलहटी पर है. लेकिन फिलहाल हमारे पास वो सोना निकालने का कोई सस्ता और सुगम तरीका नहीं है.

 

 

 

सोना कैसे बनता है , How is gold made

आज हम बात करेंगे सोना कैसे बनता है कहां पैदा होता है अगर यह बनता है तो महंगा क्यों है अगर नहीं बनता तो यह कहां से आता है बहुत ऐसे सवाल है क्या आसमान से बारिश होती है जमीन से पैदा होता है।

इसके पेड़ होते हैं क्या है बहुत ऐसे सवाल हैं जो आपको नहीं पता होंगे तो आज हम बात करेंगे गोल्ड जिसको सोना कहते हैं हिंदी में वह कहां मिलता है ,मध्याकाल में नाली माजी लम्र और अंग्रेज लूटेरे लाहों टन सोना जरकर लीना फिर भी भारतीय मंदिरों और अन्य जाहीर आज भीटने के सोना है।

प्राचीन और मकालहस्तलिखित दस्तावेज बहुत होते थे । उनमें सेवनान्द्योती लगातहीमाए या जला दिए गए । फिर भी हजारों आज भी किसी लाद्री सुरक्षित है । सोना की कीमत आज आसमान छू रही है सोने के लिए लोग क्या-क्या नहीं कर रहे हैं

Gold इतना महंगा हो गया है शादी में विवाह में किसी मंदिर पर चढ़ावा लोग चलाते हैं सोना इतना कीमती हो गया। ऐसी ही एक हस्तलिखितपांडलिपिया किताब इंटौर के रहने वाले साधारण सेलिचोहान के पास सुरक्षित है । इस पांडुलिपिया किताब में सोना और चांदी बनाने की 155 विधियाँ हैं ।

 

 

 

 

 

 

इतना महंगा हो गया कि आम आदमी के बस से बाहर हो गया है इतनी ज्यादा कीमत की है क्यों नहीं इसको हम खुद बात करें अगर यह बनता है। तो क्यों ना कोई बना सकता है इसको अगर यह नहीं बनता है तो क्या इसके पेड़ है कोई लगा सकता है यह इसका परमिशन लेना पड़ता है या कैसे होता है।

अगर आपसे कोई पूछ दे सोना कैसे बनता है गोल्ड कहां से आता है इतना पढ़ने के शौकीन हो पर आपको पता ही नहीं है सोना कैसे पैदा होता है, कैसे बनता है कैसे लाया जाता है तो आप के पहनने से कोई फायदा ही नहीं है, तो आपको यह जानना जरूरी होगा कि सोना कैसे बनता है। सोना कैसे बनता है , How is gold made

 

 

 

 

 

भारत में सबसे अधिक उत्पाद सोना का जो होता है वह कर्नाटक राज्य में होता है कोलार गुड्डी और उठी नामक खानों से इसके अलावा आंध्र प्रदेश झारखंड हीरा बुद्दीन और केरु पहुंचा की खानों से किया जाता है।

सोना हम तौर पर अकेले या पार या सिल्वर के साथ मिश्र धातु के रूप में पाए जाते हैं। ज्यादातर स्वर्ण अयस्क आया तो खुले गड्ढे में आता या फिर अंडर ग्राउंड खानों से आता है।

1 टन पत्थर में लगभग 4 ग्राम 5 ग्राम Gold निकाल पाते हैं चार से 5 ग्राम सोना निकल पाता है और सेलिना अगर देखा जाए तो 7 किलो ग्राम सोना निकलता है। 12 ग्राम निकलता है तो समझ सकते हो पत्थर के पीस लें और घिसने से झाड़ने से पानी में कपड़े से जैसे भी इस तरीके से सोना निकाला जाता सोना निकालने की बहुत प्रक्रिया है सब देख लेते हैं।

सोना बनाने की प्रक्रिया 7 हैं 

1. पत्थर पीस कर 

सोना निकालने की पहली पर किया इस प्रक्रिया में gold rate in chennai आपको गमले के पत्थर को मशीन मे पीसा जाता है gold rate in chennai इसने के बाद बालू की तरफ इसलिए जाता है इस प्रक्रिया में लगभग 4 से 6 घंटे लग gold rate in chennai जाते हैं gold rate in chennai और पत्थर को एकदम बालू की दर पीसने के बाद इसमें gold rate in chennai से सोना निकाला जाता है

2 . बालू को गिला करके 

बालू को दिला करने gold rate in chennai  की प्रक्रिया इसमें बालू में पानी डाला जाता है gold rate in chennai और फिर इसमें एक टेबल पर रख दिया जाता है gold rate in chennai जिस पर गिला कंबल नुमा कपड़ा बिछाकर के gold rate in chennai जब गिला करें इस कंबल के ऊपर से निकलते हैं।

तो सोना केकड़ इस कंबल में चिपक जाते हैं gold rate in kerala और फालतू के जो पत्थर होते हैं gold rate in kerala जिस काम के नहीं होते हैं gold rate in kerala वह बाहर चले जाते हैं। इस प्रक्रिया कई बार दोहराई जाती है, gold rate in kerala ताकि कितना भी सुंदर हो वह सब कपड़े में छम जाए और आपको अच्छा से अच्छा सोना मिल सके और जो पत्थर है gold rate in kerala मिट्टी हो बाहर हो सके।

3. चट्टान को तोड़ कर 

इस प्रक्रिया में आपको विस्फोटक से चट्टान को तोड़ा जाता है gold rate in kerala तोड़ने के बाद आपको मैं बता दूं 300 से 500 फीट की गहराई से gold rate in kerala करीब 1 टन पत्थर निकाल लिया जाता है।

और पूरे दिन करीब 300 टन मलबा बाहर निकाला जाता है gold rate in kerala एक सोना एक जगह पर जमा नहीं होता है gold rate in kerala और यह सोच के रूप में मूल करता है तो सोना गारंटी नहीं होता है, कि जहां से पत्थर निकाला जा रहा है।

वहीं पर मिलेगा पर सोना ही निकालना बहुत मुश्किल होता है और सुना इसीलिए इतना महंगा है और बनाया नहीं जाता इसके पौधे नहीं यह मेहनत करके पत्थर के डिस्कवरी चैनल पर देखा होगा।

 

 

 

 

 

 

4. कम्बल में छान कर

यह प्रक्रिया थोड़ी अलग है , समझ लीजिए कंबल को ही पानी से धोया जाता है जिसमें सोना जो चिपक जाता है और टेबल पर रखा जाता है जिस में भिगोकर के टेबल पर रखा जाता है जहां से पानी बहाया जाता है और सोने की टेबल पर जमा हो जाता है और फिर जमा हुए सोने से बिस्किट एक प्लेट अधिक सामान्य बनाए जाते हैं जिसको बहुत मशीनों से खींच कर के गला करके आपको पहनने लायक हार हीरा मोती ज्वेलर्स बनाए जाते हैं

रासानिक प्रक्रिया

1. सायनाइड रासायनिक प्रक्रिया क्या है, मैं आपको बता दूं सबसे पहले क्लियर कर दूं कि जो भी सोना निकाला जाता है। इस पर पोटेशियम रसायनिक डालकर 48 घंटे तक छोड़ दिया जाता है रसायन से रासायनिक प्रक्रिया के बाद मलबे में छिपा सोना तरल रूप में बदल जाता है जिससे उसकी क्वालिटी थोड़ी अच्छी हो जाती है।

हर जगह अलग-अलग क्वालिटी का फोन आता है कभी कहीं अच्छी क्वालिटी का मिल जाता है। कहीं खराब क्वालिटी का मिल जाता है, तो अलग-अलग क्वालिटी का अलग-अलग सोना निकाला जाता है इसमें क्या किया जाता है अगर सोने की मात्रा कम होती है।

2. अमलगमेशन आयुष को पानी के साथ छोटे-छोटे कणों में पीस लिया जाता है।  इसके बाद यश को पारी की परत चढ़ी हुई प्लेटो से होकर गुजारा जाता है, और पारा मिलकर अलग बना लेते हैं। इस प्रक्रिया में अलग मिशन कहा जाता है, इस प्रक्रिया बार-बार अगलम बन जाते हैं।

बाद इसे तक गर्म किया जाता है।  जब तक कि पारा गैस बन कर उड़ नहीं जाता इसके बाद सोना बचे रह जाता है, पारी की गैस बहुत ज्यादा जहरीली होती है, इसलिए इसके निकालने वक्त सावधानी बहुत जरूरी होती है।

 

 

 

 

 

 

3. फ्लोटेशन जमीन से निकले हुए gold rate today अयस्क को एक घोल में रखा जाता है जिस में झाग बनाने वाले तत्वों के अलावा संग्राहक तत्व भी होते हैं। gold rate today और कुछ दूसरे कैल्शियम भी झांक gold rate today बनाने वाले तत्व इस पूरी गोल में झांकने बदल जाता है। gold rate today  संग्राहक तत्व सोने की करो को आपस में बांटते हैं। gold rate today 

जिसकी एक टेलीफिल्म बन जाती है gold rate जो सतह पर हवा के बुलबुले से जुड़ी रहती है, gold rate today  इसके बाद सोने की एक फिल्म के आकार में लिया जाता है gold rate today जिससे सोना तैयार हो जाता है चमकता हुआ।

आप हम जैसे जाते हैं gold rate today दुकान पर सोने की शोरूम में वहां से जाकर ले लेते हैं कि इतनी आसानी से चमकता हुआ सोना जो दिखता है।  gold rate इतना आसान नहीं है, gold rate इसको निकालना आपको मैं बता दूं जब लोग भगवान लोग हुआ करते थे, gold rate जैसे में रावण की लंका सोने की थी प्लीज सोना बहुत पहले से यह gold rate today  कैसे बनता है।

पृथ्वी के अंदर कुछ ऐसे गैस है, gold rate जिसके वजह से बनता होगा। इसके बारे में कुछ क्लियर नहीं बताया जा सकता है। gold rate फिर भी पत्थर घिस करके निकाला जाता है। gold rate सोना बहुत ऐसी खजाने से सोना निकाला जाता है gold rate तो आखिर यह बनता नहीं gold rate तो फिर निकलता कहां से आप इतना तो अंदाजा लगा सकते तो किसी ने किसी मिट्टी से पत्थर से अंदर गैस से जैसे भी करके किसी के जरिए दबाव में आकर बनता है कैसे बनता है।

 

 

 

 

 

ऐसा ही एक किस्सा तारबीज और हेमबीज का भी है । gold rate कहा जाता है कि ये वे पदार्थ हैं जिनसे कीमियागर लोग सामान्य पदार्थों से gold rate चांदी और सोने का निर्माण कर लिया करते थे। सोना बनाने के आधुनिक उदाहरण वर्तमान युग में कहा जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here