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SSID क्या होता है Full Form Hindi

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SSID क्या है,वायरलेस नेटवर्क में SSID क्या होता है।इस लेख में आप पढ़ेंगे SSID क्या है,What Is SSID In Hindi और किस प्रकार इसके उपयोग द्वारा किसी Device को इंटरनेट से जोड़ा जाता है। SSID का Full Form है Service Set Identifier और यह Wi-Fi के नाम को दर्शाता है,जो की Wireless Standard 802.11 से संबधित है।जब कभी भी आप अपने डिवाइस जैसे की Smartphone,Laptop या Tablet इत्यादि को किसी Wireless Network से जोड़ना चाहते हैं, तो अपने डिवाइस के वायरलेस Icon पर क्लिक करते ही आपके सामने विभिन्न वायरलेस नेटवर्क के नामों की जो लिस्ट दिखाई देती है,यही नाम SSID कहलाते हैं,यानि एस एस आई डी आपके वायरलेस नेटवर्क का नाम होता है।इसे आप अपने वायरलेस नेटवर्क की पहचान कह सकते हैं,जिससे की विभिन्न वायरलेस नेटवर्क के बीच एसएसआईडी के द्वारा अपने Wireless नेटवर्क का पता लगाया जाता है।कोई भी वायरलेस डिवाइस जो Signal Through करता है,जैसे की Router,Access Point या कोई Hotspot,इन सभी की अपनी एक SSID होती है।

 

 

 

 

 

SSID 32 Alphanumeric Characters तक की हो सकती है,जिसमे Letters और Numbers शामिल रहते हैं। किसी भी नई डिवाइस में Secure Set Identifier (SSID) और पासवर्ड को Manufacturer द्वारा Default रूप से Set किया जाता है,और इसमें अक्सर डिवाइस का मॉडल नंबर या नाम शामिल रहता है, यदि D-Link की डिवाइस है तो D_link या दूसरा TP_link, Jio_Fi इत्यादि और Default पासवर्ड जैसे 1234,0000 इत्यादि।  

लेकिन डिवाइस की सुरक्षा सम्बंधित जानकारी को Default बनाए रखना काफी घातक हो सकता है,क्योंकी Hackers द्वारा आसानी से इसका पता लगाया जा सकता है। इसीलिए Security Expert’s द्वारा हमेशा यह निर्देशित किया जाता है,की वायरलेस डिवाइस के Default Name और Password को बदल देना चाहिए,ताकि वायरलेस नेटवर्क की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। 

आइये जानते हैं आप अपने घर के वायरलेस Router या Modem के पासवर्ड को किस प्रकार बदल सकते हैं। 

SSID क्या है,वायरलेस नेटवर्क में SSID क्या होता है।

Wi-Fi का SSID और Password कैसे बदलें।

यदि सामान्य Home Network की बात की जाए तो इसमें SSID को आपके Broadband Router या Modem द्वारा Generate किया जाता है। और इसके Default वायरलेस नाम और पासवर्ड को बदलने के लिए आपको अपने Router या Modem के Admin Page को Access करना पड़ता है। 

एडमिन पेज को खोलने के लिए ब्राउज़र में Router का IP Address डालना है,यदि आपके पास राऊटर का IP एड्रेस नहीं है,तो इसकी जानकारी आप राऊटर के पीछे लगे स्टीकर से लें सकते हैं,जिसमे राऊटर का Default IP एड्रेस,SSID और Password लिखा हुवा होता है। 

 

 

 

 

 

एक बार जब राऊटर से जुड़ी यह att ssid जानकारी आपको मिल जाए तो सबसे पहले IP Address को ब्राउज़र att ssid जैसे Google Chrome या Internet Explorer इत्यादि में डालना है,Page खुलने att ssid पर Administrator के रूप में Login होना है,Settings में जाना है और WiFi Name या SSID Option को वहां पर ढूंढ़ना है,और वहाँ से इसके Default नाम को बदलकर अपना मनचाहा नाम डाल कर Settings को Save कर लेना है। 

इसी तरीके से आप वायरलेस का पासवर्ड भी बदल सकते हैं,इसके लिए आपको Admin Page के भीतर जाकर Settings के अंदर Security के Option पर क्लिक करना है और यहाँ पर सुनिश्चित करना है की आपका Router WPA2 पर ही Set हो,अब यही पर आपको Strong Password डालना है और वायरलेस सिक्योरिटी secure ssid को मजबूती देनी है। 

 

 

 

 

 

अंतिम शब्द

दोस्तों आपने secure ssid पढ़ा SSID क्या है। wifi extender same ssid SSID Full Form  What Is SSID In Hindi और इसका क्या महत्व है,wifi extender same ssid साथ ही यह भी जाना की आप अपने वायरलेस राऊटर या मॉडेम की SSID और multiple access points same ssid पासवर्ड किस तरह से बदल सकते हैं। उम्मीद है जानकारी आपके काम आएगी।

POP क्या है Full Form Hindi

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POP,Post Office Protocol क्या है।नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में आपको POP यानि Post Office Protocol के बारे में जानकारी मिलेगी,जैसे की POP full form और इसका क्याकार्य है। जिस तरह से हमने अपने पिछले पोस्ट में SMTP की जानकारी दी थी,जिसका काम मेलको सेंड करना होता है। पूरी जानकारी के लिए आप हमारा पिछला पोस्ट देख सकते हैं।और इसीके साथ मिलकर POP प्रोटोकॉल भी कार्य करता है, जिसका काम ईमेल को डाउनलोड करना होता है POP क्या है What Is POP In Hindi POP एक Client/Server प्रोटोकॉल है,जिसका कार्य इंटरनेट पर उलब्ध मेल सर्वर में से मेल को डाउनलोड कर क्लाइंट के मेल सॉफ्टवेयर तक पहुँचाना होता है। जब भी हमें कोई ईमेल आता है,तो सबसे पहले वह ईमेल इंटरनेट पर उपलब्ध हमारे E-Mail Server पर पहुंचता है,जिसके बाद POP प्रोटोकॉल ईमेल सर्वर के साथ सिंक करके उस ईमेल को डाउनलोड कर लेता है,और क्लाइंट के ईमेल सॉफ्टवेयर तक उसे पहुँचा देता है।

 

जिसके बाद मेल सर्वर पर पड़ी मेल की वह कॉपी POP full form डिलीट हो जाती है,और सिर्फ क्लाइंट के
ईमेल सॉफ्टवेयर में ही उपलब्ध रहती है।

ईमेल सर्वर में से ईमेल की कॉपी डिलीट होने की भी एक तय समय सीमा रखी जा सकती है, POP full form जैसे 5 दिन ,10 दिन इत्यादि और उसके बाद ही मेल की वह कॉपी मेल सर्वर में से डिलीट
होती है।

 

 

 

POP,Post Office Protocol क्या है।

POP को कैसे इस्तेमाल किया blackhead pop जाता है। How To Use POP

पॉप प्रोटोकॉल को ईमेल क्लाइंट blackhead pop जैसे की Outlook Express, Mozilla Thunderbird इत्यादि में Configure किया जाता है,जिसमे POP से जुड़ी सेटिंग को ईमेल सॉफ्टवेयर के इनकमिंग मेल सेटिंग के स्थान पर डाला जाता है,जैसे POP@Gmail.Com इत्यादि और यदि क्लाइंट का कोई अपना डोमेन है,जिसमे Exchange Server इस्तेमाल किया जाता है तो वहाँ पर @ के बाद एक्सचेंज या डोमेन की सेटिंग डाली जाती है।

POP के प्रकार। Types Of POP

POP के मुख्य रूप से दो प्रकार है POP2 और POP3, जिसमे से POP2 एक पुराना संस्करण है। Post Office Protocol का अभी का नवीनतम संस्करण POP3 है,और
यह पोर्ट नंबर 110 और 995 का इस्तेमाल करता है।disable pop up blocker 

तो दोस्तों disable pop up blocker आपको dream pop जानकारी हो गई होगी की pop in a box POP Kya Hai,POP3 के द्वारा मेल disable pop up blocker 
को प्राप्त किया जाता है dream pop और SMTP pop in a box द्वारा मेल को भेजा जाता है।

DNS क्या है? Full Form Hindi

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What Is DNS In Hindi, DNS क्या है? पढ़िए और Implement कीजिए।नमस्कार दोस्तों एक बार फिर से आप सभी का हमारे ब्लॉग में बहुत-बहुत स्वागत है,इस पोस्ट में हम जानेंगे dns full form,What Is DNS In Hindi,और इसे कैसेImplement किया जाता है।तो पोस्ट को पूरा पढ़े ताकि आपको DNS की यह जानकारी अच्छे से समझ आ जाए।इंटरनेट का इस्तेमाल तो हम सभी करते हैं,और अगर इंटरनेट से जुड़ी यह छोटी औरजरुरी जानकारियों का ज्ञान भी हमें हो,तो यह एक अच्छी बात है।हमें जब कभी भी इंटरनेट पर कोई वेबसाइट Access करनी होती है,तो हम वेब ब्राउज़रपर जाकर वेबसाइट का नाम टाइप करते हैं,जैसे की Google.Com, Facebook.Com इत्यादि, जिसके बाद वह वेबसाइट हमारे सामने खुल कर आ जाती है।

लेकिन क्या आप को जानकारी है,dns full form की कंप्यूटर किसी नाम को नहीं समझता बल्कि वह Numbers यानि IP Address को समझता है। dns full form तो कैसे हमारे द्वारा डाले गए किसी Website Name को कंप्यूटर समझ पाता है,और वह वेबसाइट हमारे सामने खुल कर
आ जाती है।

तो यह कार्य DNS द्वारा पूरा किया जाता है,dns full form तो आइये समझते हैं,DNS क्या है,और इसका क्या काम है।

DNS क्या है। What Is DNS In Hindi

DNS का Full Form होता है,Domain Name System, इसका कार्य Domain
Name को IP Address में बदलना है। इसे आप इंटरनेट की फोन बुक भी कह
सकते हैं।

जैसे आपने ऊपर पढ़ा की कंप्यूटर किसी नाम को नहीं समझता है,बल्कि वह नंबर यानि
IP Address को समझता है,तो जब कभी हमारे द्वारा इंटरनेट या नेटवर्क पर किसी
प्रकार की जानकारी Access करने के लिए Domain Name डाला जाता है,

तो DNS उस Domain Name को Translate कर IP Address में बदल देता है,जिससे कंप्यूटर उसे समझ पाता है,और वह जानकारी या वेबसाइट हमारे सामने खुल कर आ
जाती है।

इंटरनेट पर हमारे द्वारा ढेरो Websites को Access किया जाता है,सोचिए यदि उन सभी
का IP Address हमें याद करना पड़े तो क्या हो,क्योंकि यह एक काफी मुश्किल काम है।

तो ऐसे में हमारे लिए यह काम DNS आसान बना देता है,क्योंकि हमें बस नाम याद रखना पड़ता है,और वह नाम ब्राउज़र पर टाइप करते ही,जानकारी हमारे सामने खुल कर आ
जाती है।

 

 

 

 

 

DNS कैसे काम करता है। How Does DNS Work.

DNS की कार्यप्रणाली में Host Name (Www.Gethow.In) को एक IP Address जैसे
की (192.168.1.1) में बदलना होता है। इंटरनेट से जुड़े हर डिवाइस का अपना एक
IP Address होता है,चाहे वह किसी भी प्रकार की डिवाइस हो जैसे स्मार्ट फोन,लैपटॉप डेस्कटॉप,टेबलेट इत्यादि।

जब आप अपने कंप्यूटर के वेब ब्राउज़र पर कोई Web Address टाइप करते हैं,जैसे
की Gethow.In तो आपका कंप्यूटर कुछ प्रक्रियाओं से गुजरता है,

जिसमे सबसे पहले वह उस IP Address को अपने Local Cache में सर्च करता है,
जिसमे आप के द्वारा हाल में की गई सर्च की जानकारियाँ Save रहतीं हैं।

यदि वह Address लोकल कंप्यूटर पर नहीं प्राप्त होता है,तो फिर लोकल कंप्यूटर Recursive Resolver यानि ISP से संपर्क करता है,जहाँ पर उपलब्ध Server
Cache में सामान्यतः सभी Popular Websites की जानकारी Cached होती है।

यदि यहाँ पर जानकारी मिल जाती है,तो Searching यहीं पर ख़त्म हो जाएगी और
Client कंप्यूटर तक जानकारी पहुंचेगी जिसके बाद वह वेबसाइट Access हो जाएगी।

और यदि अभी भी Address प्राप्त नहीं होता है,तो फिर वह Query DNS Root
Name Servers के पास जाती है,फिर Root Name Server उस Address को
समझता है,और आगे Top Level Domain जैसे की .COM,ORG के पास भेज
देता है।

हर एक TLD (Top Level Domain) का अपना Name Server का Set होता है,
TLD Server Request को Review करता है,जैसे Www.Gethow.In,और आगे Authoritative Name Servers को भेज देता है,जिसके पास डोमेन से जुडी पूरी जानकारी उपलब्ध रहती है और डोमेन से जुड़े IP Address का पता लगने पर इस जानकारी को आपके PC यानि क्लाइंट कंप्यूटर तक भेज दिया जाता है,जिसके बाद
वह वेबसाइट Access हो जाती है।

 

 

 

 

 

यह सारा प्रोसेस सिर्फ वेब ब्राउज़र पर डोमेन एड्रेस टाइप करने से लेकर वेबसाइट के
ओपन होने तक का है,जो की बस कुछ Milliseconds के भीतर पूरी हो जाती है।

DNS की हिस्ट्री। History Of DNS In Hindi

DNS की कार्यप्रणाली के बारे में आपने ऊपर पढ़ा की कैसे DNS द्वारा किसी Domain Name को IP Address में बदल दिया जाता है।

लेकिन इंटरनेट के शुरुवाती दौर में ऐसा नहीं था,जहाँ पर इंटरनेट काफी सीमित होता था और उसका इतना बड़ा User Base भी नहीं था,

और वेबसाइट को उसके IP एड्रेस से जाना जाता था,यानि वेबसाइट को Access करने के लिए उसका IP Address याद रखना पड़ता था।

 

 

 

 

 

लेकिन फिर समय के साथ इंटरनेट का इस्तेमाल और Websites की संख्या में भी वृद्धि हुई,जिसके बाद इतनी सारी Websites के IP Address याद रखना संभव नहीं था।

फिर 1980 के दशक में अमेरिका के Computer Scientist Paul Mockapetris ने DNS का अविष्कार किया ताकि वेबसाइट Access को Friendly बनाया जा सके,जिसमे लोगो को वेबसाइट का IP एड्रेस ना याद रख कर बस वेबसाइट का नाम याद रखना था। तो इस तरह से DNS का अविष्कार हुआ जिसका फायदा आज हम सब ले रहे हैं।

अंतिम शब्द

दोस्तों what is ttl in dns आपने what is ttl in dns पढ़ा dns port यदि what is ttl in dns यह dns port जानकारी आप को अच्छी लगी है,what is ttl in dns तो इसे अपने मित्रों को what is ttl in dns भी शेयर करें dns attack और dns attack अगर what is ttl in dns आपके dns port कोई प्र्शन और dns port 
सुझाव हैं, dns attack तो आप ps4 dns error हमें कमेंट कर के बता सकते ps4 dns error ps4 dns error हैं dns attack धन्यवाद।

Leased Line क्या है in Hindi

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,लीज्ड लाइन कनेक्शन क्या है?नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में हम जानेंगे  आपने लीज्ड लाइन कनेक्शन के बारे में कही ना कही जरूर सुना होगा और यदि आपकोइसकी जानकारी नहीं है,तो इस पोस्ट के द्वारा आप Leased Line से जुड़ी जानकारी प्राप्तकर सकते हैंलीज्ड लाइन क्या है। लीज्ड लाइन एक High Speed और Fixed Bandwidth Internet या Voice लाइन होती है,जो दो Location’s को एक साथ जोड़ती है।

 

 

 

 

यह Service Provider और Customer के बीच का एक सर्विस कॉन्ट्रैक्ट है,जिसके अनुसार सर्विस प्रोवाइडर कस्टमर को एक High Speed और Dedicated लाइन उपलब्ध कराता है।

लीज्ड लाइन को सर्विस प्रोवाइडर द्वारा कस्टमर के लिए अलग से उपलब्ध कराया जाता है,यानि एक रिज़र्व सर्किट द्वारा जोड़ दिया जाता है,जो की सर्विस प्रोवाइडर और कस्टमर के बीच का
सीधा कम्युनिकेशन चैनल होता है।

एक Dedicated और सीधा कम्युनिकेशन चैनल होने के कारण Data Flow में Fluctuation नहीं रहता है,और इंटरनेट की स्पीड स्थिर रहती है। यानि अगर कस्टमर ने 100 Mbps की स्पीड ले रखी है,तो इंटरनेट डाटा की यह गति समान बनी रहती है।

लीज्ड लाइन कनेक्शन लेने पर कस्टमर द्वारा सर्विस प्रोवाइडर को हर महीने या साल का एक तय किराया देना पड़ता है। और यदि साधारण कनेक्शन के साथ इसके किराए की तुलना की जाए
तो यह काफी ज्यादा होता है।

 

 

Leased Line in hindi,लीज्ड लाइन कनेक्शन  क्या है?

 

 

 

लीज्ड लाइन का क्या इस्तेमाल है। 

लीज्ड लाइन का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंपनियों में किया जाता है,जहाँ पर हाई स्पीड डाटा की आवश्यकता पड़ती है।आपने देखो होगा कंपनियों की कई शाखाएं होतीं हैं,जो विभिन्न स्थानों में स्थित होतीं हैं,ऐसे में उन सभी को आपस में जोड़ने के लिए  का इस्तेमाल किया जाता है।

इसके साथ-साथ कंपनियों को यदि VPNद्वारा कोई सॉफ्टवेयर USE करना होता है,तो इसके
लिए भी Lease Line ली जाती है,ताकि इंटरनेट की स्पीड निरंतर समान बनी रहे और कार्य
में कोई बांधा ना उत्पन्न हो।

Leased Line लेने का मुख्य कारण इसकी तेज और समान बनी रहने वाली गति तो है ही,
इसके साथ ही इसमें Break Down भी काफी कम होता है,और सामान्य इंटरनेट कनेक्शन
की तुलना में Customer Service भी अच्छी मिल जाती है।

लीज्ड लाइन के फायदे।

:- इंटरनेट स्पीड काफी leased line connection तेज और समान बनी रहती है।

:- काफी तेज leased line connection अपलोड स्पीड मिल जाती है।

:- एक Fixed leased line vs broadband बैंडविड्थ मिलती है।

:- कनेक्शन में कोई समस्या leased line vs broadband होने पर काफी Fast सपोर्ट मिलती है।

 

 

लीज्ड लाइन के नुक्सान।

:- इसके इंस्टालेशन,रख t1 leased line रखाव और किराए में अधिक खर्च आता है।

:- इंस्टालेशन प्रक्रिया में सामान्य t1 leased line कनेक्शन internet leased line की तुलना में थोड़ा अधिक समय लग जाता है।

Fiber Optic क्या है?

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Fiber Optic Cable In Hindi,   ऑप्टिकल फाइबर क्या है।क्या आप जानते हैं Optical Fiber क्या है, Fiber Optic Cable In Hindi,इस पोस्ट मेंआपको ऑप्टिकल फाइबर की पूरी जानकारी मिल जाएगी,Optical Fiber या फिरFiber Optical ये दोनों एक ही हैं, इसे दोनों नामों से जाना जाता है।हम सभी जिस इंटरनेट या टेलीकॉम सर्विस का इस्तेमाल करते हैं उन सब के पीछेHigh Speed Optical Fiber Cable होती है, यह एक तरह से किसी भी नेटवर्ककी Backbone होती है।ऑप्टिकल फाइबर का इस्तेमाल High Speed Data Transmission के लिए किया जाता हैऔर इसके इतनी फ़ास्ट डाटा ट्रांसमिशन स्पीड के पीछे इसकी बनावट और तकनीक है।

ऑप्टिकल फाइबर क्या है। Fiber Optic Cable In Hindi

यह एक पतली और लचीली तार होती है,जो Silica Glass या Plastic की बनी होती है,यानि इसके अंदर ऐसे कई छोटे और पतले तारो के गुच्छे होते हैं जिनके द्वारा डाटा ट्रांसमिट होता है,और इसके हर एक रैशे का Diameter लगभग एक इंसान के बाल से जरा सा मोटा होता है,

अगर Fiber Optical Cable की बनावट की बात करें तो इसमें कई Layers होती हैं,इसके सबसे अंदर के भाग जिसमे डाटा का प्रवाह होता है वह सिलिका ग्लास या प्लास्टिक का बना होता है, इसे Core कहा जाता है,

इसके ऊपर के भाग को Cladding कहते हैं यह भी सिलिका सामग्री का बना होता है और उसके ऊपर प्लास्टिक की परत और Kevlar होती है और फिर सबसे ऊपरी भाग को Outer Jacket कहते हैं।

यानि Cladding के बाद की परत ऑप्टिकल फाइबर की सुरक्षा को बढाती है,जिसमे
जरुरत अनुसार अलग अलग Fiber Cable का चयन किया जा सकता है। जैसे अगर
पानी के अंदर बिछाई जनि हो,जमीन के अंदर या फिर खम्बो में तो उसी तरह से इसकी
सुरक्षा परतों में भी फेरबदल होता है और हर स्थिति के लिए यह Cable उपलब्ध रहती है।

 

 

Fiber optic cable in Hindi,ऑप्टिकल फाइबर क्या है।  

ऑप्टिकल फाइबर कैसे काम करती है। How Does Optical Fiber Work

जहाँ किसी भी Copper Cable में डाटा ट्रांसमिशन Electronic Pulses के रूप में होता है, वहीँ ऑप्टिकल फाइबर में डाटा ट्रांसमिशन Light Pulses के रूप में होता है,यानि जब Core सतह में डाटा लाइट के रूप में Travel करता है।

तो इसकी बाहरी परत Cladding लाइट को Reflect करती है जिससे लाइट Cladding परत
से बाहर नहीं जा पाती और आगे बढ़ती चली जाती है और एक निश्चित दूरी तक जैसे लगभग
100 Km, डाटा का ट्रांसमिशन काफी फास्ट बना रहता है

और उसके बाद सिग्नल क्षमता को बनाए रखने के लिए बीच में Amplifiers लगाए जाते हैं जिससे डाटा ट्रांसमिशन की गति समान बनी रहती है।

ऑप्टिकल फाइबर के प्रकार। Types Of Optical Fiber Mode Based

मुख्य रूप से दो प्रकार की Optical Fiber Cable का इस्तेमाल किया जाता है how to terminate fiber optic cable जो निम्नलिखित हैं।

Single Mode Fiber (SMF) :- how to terminate fiber optic cable Single Mode Fiber को Less Reflection Mode भी कहा जाता है,क्योंकि इसके Core का Diameter काफी कम रहता है how to terminate fiber optic cable जिससे लाइट की एक Single Ray द्वारा डाटा ट्रांसमिट होता है और इसमें दूसरे Mode की तुलना में Less Reflection होने पर डाटा लम्बी दूरी तक how to terminate fiber optic cable Travel कर पाता है how to terminate fiber optic cable और साथ ही Data Loss की मात्रा भी बहुत कम होती है।

 

 

 

 

Multi Mode Fiber (MMF) :- Multi Mode Fiber में Core का Diameter बड़ा होता है,
जिससे इसमें एक साथ कई Data Lights Travel कर पाती हैं,और बड़े Diameter होने से Reflection भी ज्यादा होता है,और इसमें Single Mode की तुलना में Data Loss ज्यादा होने
की संभावना भी रहती है यानि यह कम दूरी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

ऑप्टिकल फाइबर के फायदे। Advantage Of Optical Fiber

High Bandwidth :- ऑप्टिकल फाइबर की डाटा ट्रांसमिशन स्पीड कॉपर केबल की तुलना में
काफी ज्यादा होती है जिससे इसमें काफी कम समय में अधिक मात्रा में डाटा ट्रांसमिशन होता है।

 

 

 

 

 

Security :- ऑप्टिकल फाइबर मेटल केबल की तुलना में अधिक सुरक्षित होती है क्योंकि इसमें काफी ज्यादा सुरक्षा परतें होती हैं और डाटा भी लाइट के रूप में ट्रांसफर होता है जिससे डाटा से छेड़ छाड़ करना इतना आसान नहीं रहता यानि यह एक अधिक सुरक्षित डाटा ट्रांसमिशन का जरिया है।

Low Power Loss :- ऑप्टिकल फाइबर में पावर लॉस ना के बराबर है, जिसके फलस्वरूप
डाटा लम्बी दूरी तक ट्रांसमिट हो पाता है और डाटा की स्पीड भी समान बनी रहती है।

Electronic Isolation :- कॉपर केबल के मुकाबले ऑप्टिकल फाइबर में इलेक्ट्रिकल शार्ट सर्किट का कोई खतरा नहीं होता क्योंकि इसके भाग सिलिका ग्लास और प्लास्टिक का बना
होता है जो इसे इलेक्ट्रिकल खतरों से से दूर रखता है।

ऑप्टिकल फाइबर के नुकसान। Disadvantage Of Optical Fiber

Expensive Cost :- fiber optic internet vs cable ऑप्टिकल fiber optic companies फाइबर केबल मेटल केबल की तुलना में अधिक महंगी
पड़ती है और इसके कनेक्शन में fiber optic internet vs cable उपयोग होने वाले उपकरण भी दुसरो की तुलना में महंगे
पड़ते हैं।

Splicing Issue :- यदि कभी fiber optic internet vs cable वायर्स के बीच में जॉइंट लगाना हो या रिपेयर करना हो तो यह काफी मुश्किल हो जाता है और इसके लिए Splicing Machine का इस्तेमाल होता है।

Expensive Installation :- ऑप्टिकल फाइबर के उपकरणों के साथ साथ इसकी इंस्टालेशन भी काफी महंगी पड़ती है और इसके लिए प्रशिक्षित लोगों की जरुरत पड़ती है।

 

 

 

 

ऑप्टिकल फाइबर का इतिहास। History Of Optical Fiber

ऑप्टिकल कम्युनिकेशन पर शोध की शुरुआत 1880 में Alexander Graham Bell द्वार Photophone के रूप में fiber optic companies हो गयी थी,जिसमे Photophone द्वारा ध्वनि लाइट बीम के रूप
में प्रवाहित होती थी लेकिन fiber optic companies जब कभी बादल होते थे,

तो यह काम नहीं करता था,इसके बाद 1975 में इसमें fiber optic companies हुए अनुसंधान के बाद पहली
व्यवसायिक फाइबर ऑप्टिक संचार fiber optic companies प्रणाली विक्षित हुई और इसमें नए नए अनुसंधान
होते गए,

 

 

 

 

और उसी अनुसार fiber optic center इसका ट्रांसमिशन fiber optic center करने का दायरा भी बढ़ता चला गया,और
इसी के फलस्वरूप आज दुनियाभर fiber optic center में फाइबर ऑप्टिकल केबल का जाल बिछा हुवा है और
इसका इतना विशाल नेटवर्क है।

अंतिम शब्द

तो दोस्तों आपने पड़ी fiber optic center ऑप्टिकल फाइबर fiber optic cable installation की जानकारी, यह क्या होती है fiber optic vs cable (Fiber Optic Cable In Hindi) और इसकी बनावट केसी होती है,fiber optic vs cable और fiber optic cable installation साथ ही इसके इतिहास और वर्तमान के बारे में भी। हमें उम्मीद है fiber optic vs cable इस पोस्ट से आपको ऑप्टिकल फाइबर केबल की जानकारी प्राप्त हो गयी होगी। fiber optic cable installation इसे आप अपने मित्रो के साथ भी जरूर शेयर करें धन्यवाद।

DBMS क्या है Full Form Hindi

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DBMS क्या है,DBMS In Hindi,इसके Advantage और Disadvantage .नमस्कार दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे DBMS क्या है,यानि Database Management System In Hindi, जिसे हमने बहुत ही सरल शब्दो में आप तक पहुँचाने की कोशिश की है,तो पोस्ट को पूरा पढ़े ताकि DBMS की यह जानकारी आपको अच्छे से समझ में आ जाए।Database क्या है। What Is Database In Hindi DBMS को समझने से पहले जरुरी है,की Database को समझा जाए।यदि डेटाबेसको एक शब्द में परिभाषित करें तो,यह डाटा का एक Organised Collection है,जिसमे डाटा Systematic रूप में स्टोर रहता है।

 

 

 

 

 

 

डेटाबेस को आसानी से Access किया जा सकता है,Update किया जा सकता है,और Manage किया जा सकता है।

यदि डेटाबेस को एक उदाहरण से समझा जाए तो इसका उदाहरण आप किसी स्कूल के रजिस्टर से ले सकते हैं,जिसमे हर एक Students की जानकारी उपलब्ध रहती है,और इसे एक Structured रूप में मैनेज किया जाता है। ताकि जरुरत पड़ने पर जानकारी को आसानी से जुटाया जा सके।

Database को Manage करने के लिए DBMS का इस्तेमाल किया जाता है,तो आईये अब समझते हैं (DBMSDatabase Management System क्या है।

 

 

DBMS: An Intro to Database Management Systems – BMC Blogs

 

 

DBMS क्या है।Database Management System In Hindi

Database Management System यानि (DBMS) एक सॉफ्टवेयर पैकेज है,जिसके द्वारा Database में डाटा को Create,Manage,Update और Retrieve किया जा
सकता है।

यदि डेटाबेस में किसी भी प्रकार के Changes या Update करने हो,तो ऐसे में वह Changes DBMS के द्वारा किए जाते हैं,यानि DBMS एक User Application और Database के बीच प्लेटफार्म तैयार करता है,ताकि Data की Accessibility बनी रहे।

DBMS के Software Examples हैं :- MySQL,ORACLE,Microsoft Access इत्यादि।

DBMS के प्रकार। Types Of Database Management System In Hindi

डीबएम्एस के मुख्य रूप से चार प्रकार हैं,जो इस निम्नलिखित हैं।

 

 

 

 

Hierarchical Model :- Hierarchical Database System को IBM द्वारा 1960
की शुरुवात में Develop किया गया था। यह मॉडल एक Parent/Child मॉडल है,यानि
यह Tree के Structure में Organized रहता है। इसमें डाटा रिकार्ड्स के रूप में
स्टोर होता है,और एक दूसरे से Links द्वारा जुड़ा रहता है।

Hierarchical Database की शुरुवात Root Data से होती है,जिसमे की यह Tree के
रूप में Expand होता है,और हर एक Child Node अपने Parent Node से जुड़ता है,
थता प्रत्येक Child Node का सिर्फ एक ही Parent Node होता है,लेकिन Parent के
कई Children हो सकते हैं।

Network Model :- Network Database Structure को Charles Bachman द्वारा 1969 में डेवलप किया गया था। नेटवर्क मॉडल भी Hierarchical मॉडल की ही तरह
दीखता है,लेकिन इसमें किसी Record/Child के एक से अधिक Parents हो सकते हैं।
और इसमें डाटा Graph के रूप में Organised किया जाता है।

इसमें Hierarchical मॉडल की तुलना में डाटा काफी तेजी से Access किया जा सकता
है। क्योंकि डाटा को Access करने के कई Paths होते हैं।

 

 

 

 

 

Relational Model :- रिलेशनल मॉडल को E.F Codd द्वारा 1970 में Proposed
किया गया था। यह सबसे आसान और सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला मॉडल है। जिसमे डाटा को Two Dimensional Table के रूप में Maintained किया जाता है।

इसमें सभी जानकारियाँ Raw और Columns के रूप में स्टोर रहती हैं। और इसे मैनेज करने के लिए SQL,Oracle,MySQL इत्यादि का इस्तेमाल किया जाता है।

Object Oriented Model :- Object Oriented डेटाबेस (OODB) 1980 की शुरुवात
में तैयार किया गया था। ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड मॉडल में Information या डाटा Object के रूप में इखट्टा रहता है। यानि Object एक Real World Problem को दर्शाता है। थता
यह Object Oriented Programming (OOP) के मौलिक सिद्धांतों को Follow करता है।

 

 

 

 

Components Of Database Management System In Hindi

DBMS के निम्नलिखित मुख्य Components हैं,और हर किसी का अपना एक अलग
कार्य है।

User :- इसमें 3 प्रकार के Users शामिल हैं,Application Programmer, Database Administrators,और End Users,इन सभी का कार्य एक दूसरे से भिन्न है।

Application Programmer :- जो एप्लीकेशन को Programming Language जैसे
की (C++,Java इत्यादि) में तैयार करते हैं,जिससे की डेटाबेस से Communicate
किया जा सके।

 

 

 

 

Database Administrator :- ऐसा व्यक्ति जो DBMS (Database Management System) को मैनेज करता है। यानि इसका कार्य डेटाबेस की Maintenance करना है।

End User :- End User का कार्य डेटाबेस को Application और Utilities के माध्यम
से Access करना है,ताकि किसी प्रकार का Update किया जा सके या फिर रिपोर्ट Generate की जा सके।

Hardware :- यदि यहाँ पर हार्डवेयर की बात की जाए तो इसका अर्थ कंप्यूटर सिस्टम
से है,जो की DBMS को एक प्लेटफार्म प्रदान करता है,और डाटा इन्ही कंप्यूटर हार्डवेयर जैसे (Hard Disk,RAM) में स्टोर होता है।

 

 

 

 

यानि इसमें कंप्यूटर के सभी I/O Devices जैसे कीबोर्ड,मॉनिटर इत्यादि भी आते हैं।
क्योंकि जब DBMS सॉफ्टवेयर पैकेज रन किया जाता हैं,तो ऐसे में सभी कंप्यूटर पार्ट्स
का इस्तेमाल होता है,और इस तरह से यह सब भी DBMS कॉम्पोनेन्ट का हिस्सा बन
जाते हैं।

Software :- सॉफ्टवेयर पैकेज भी हार्डवेयर की तरह ही एक महत्वपूर्ण कॉम्पोनेन्ट है। इसमें दो प्रकार के सॉफ्टवेर शामिल हैं,ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर और DBMS सॉफ्टवेयर पैकेज।

ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे Microsoft Windows,Linux इत्यादि द्वारा हार्डवेयर को मैनेज
किया जाता है,थता दूसरे एप्लीकेशन और सॉफ्टवेर के लिए प्लेटफार्म तैयार किया जाता है। और DBMS सॉफ्टवेयर पैकेज द्वारा Database को मैनेज किया जाता है,इसमें Microsoft SQL Server,MySQL इत्यादि शामिल हैं।

DATA :- DBMS का मुख्य कार्य डाटा का मैनेजमेंट करना है,जिसमे Data Collect करना,Process करना और उसे Access करना शामिल है। यहाँ पर डाटा से अर्थ डेटाबेस में Stored डाटा से है,जैसी की Numerical Data,Non Numerical और Logical डाटा।

 

 

 

 

 

Advantage Of Data Management System In Hindi

DBMS के कई Advantages हैं,dbms oracle जिनमे से मुख्य इस प्रकार से हैं।

Data Redundancy :- DBMS में Data Redundancy ना के बराबर है,Data Redundancy तब होता है,dbms oracle जब एक ही डाटा विभिन्न जगहों पर Stored रहता है।
क्योंकि DBMS में डाटा एक Centralized रूप में Stored होता है,जिससे सभी
Users इस एक ही Data Source को Access करते हैं।

Data Security :- जैसे की DBMS में Access Controls की सुविधा उपलब्ध होती है,जिससे की सिर्फ Authorized Users को ही डाटा dbms oracle का Access प्राप्त होता है,और हर Users को अलग Access Authorization दिया जा सकता है। dbms oracle जिससे Data को सुरक्षित रखा जा सकता है।

 

 

 

 

 

Easy Data Accessibility :- DBMS द्वारा डाटा को इस तरह से मैनेज किया जाता है,की डाटा को आसानी और तेजी से Access किया जा सके।

Easy Recovery :- जैसे की Database System द्वारा डाटा को Backup किया जाता है,
जिससे यदि किसी भी प्रकार का Failure होता है,तो ऐसे में डाटा को आसानी से Recover
कीया जा सकता है।

Disadvantages Of DBMS In Hindi

DBMS के Advantages के साथ-साथ कुछ Disadvantages भी हैं,जिसके निम्नलिखित प्रकार हैं।

Increased Cost :- DBMS और Database सिस्टम का मुख्य Disadvantage इसे Setup और Maintain करने में लगने वाली Cost है। जिसमे इसका हार्डवेयर,सॉफ्टवेयर और Trained Staff शामिल है।

 

 

 

 

 

Complexity :- जैसे की DBMS का type of dbms आकर काफी बड़ा होता है,जिससे की इसकी
जटिलता भी काफी बढ़ जाती है, type of dbms यानि इसे Maintain करना काफी जटिल होता है।

Staff Training Cost :- इसमें type of dbms किसी दूसरे छेत्र की तरह ही type of dbms कोई साधारण स्टाफ नहीं रखा जा सकता है,बल्कि Highly Skilled और Trained स्टाफ की आवश्यकता पड़ती है। जिससे इसमें होने वाले खर्चे में बढ़ोतरी होती है।

 

 

 

 

अंतिम शब्द

दोस्तों इस पोस्ट में disadvantages of dbms आपने dbms full form पढ़ा dbms full form DBMS क्या है,Database Management System In Hindi,हमने इस पोस्ट के माध्यम से DBMS को बिलकुल सरल शब्दो मे समझाने की कोशिश की है, dbms full form और हमें उम्मीद है,की इस में आपको dbms full form कुछ अच्छी जानकारी प्राप्त हुई होगी।

Domain किसे कहते हैं? डोमेन नेम Buy Kaise Kare

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नमस्कार दोस्तों MDS Blog में आपका बहुत-बहुत स्वागत है. आज की इस पोस्ट में हम Domain Name की बात करेंगे  v नेम क्या है – What is Domain Name in Hindi और डोमेन नेम कहां यूज़ किया जाता है और डोमेन नेम की सारी जानकारी इस पोस्ट में हम पढ़ेंगे.दोस्तों जब हम वर्डप्रेस, ब्लॉगर पर अपनी वेबसाइट बनाने की सोचते हैं. तो सबसे पहला टॉपिक जो हमारे सामने आता है वह डोमेन नेम है अगर आप वेबसाइट बनाने की फील्ड में New है तो शायद आपको Domain Name के बारे में पता नहीं होगा. तो आखिर डोमेन नेम क्या है और क्या बिना डोमेन नेम के किसी भी वेबसाइट में Access किया जा सकता है. ऐसे ही बहुत सारे सवालों की जानकारी हम नीचे जानेंगे. तो जानते है Domain क्या है?

 

 

 

 

 

डोमेन नेम क्या है – What is Domain Name in Hindi

 

 

दोस्तों डोमेन नेम आपकी वेबसाइट के नाम को कहते हैं. यानी कि पंजीकरण की एक ऐसी identity जो कि आपको इंटरनेट पर एक पहचान देती है. जैसे कि जिस वेबसाइट पर आप अभी यह आर्टिकल पढ़ रहे हैं. इस वेबसाइट का डोमेन नाम mydigitalsupport.in है. जिसे की Web address भी कहा जाता है.

लेकिन आपको बता दें डोमेन नेम की कहानी यहीं पर ही खत्म नहीं होती डोमेन नेम की बहुत सारी जानकारी अभी भी आपको जानना बहुत जरूरी है. दोस्तों जिस सिस्टम से आपके डोमेन नेम को चलाया या ऑपरेट किया जाता है. उसे Domain Name System यानी की DNS कहते हैं. DNS में ही Domain से रिलेटेड सारी जानकारी रहती है. जैसे कि Domain का IP address और Domain की और भी बहुत सारी जानकारी.

 

 

Domain Name क्या है और Domain Name क्यों जरुरी हैं » MYTECHINFO

 

 

 

अब बहुत सारे लोगों के मन में यह भी प्रश्न उठ रहा होगा. कि डोमेन नेम जरूरी है या नहीं और क्या बिना डोमेन नेम के किसी भी वेबसाइट को Access किया जा सकता है या नहीं तो दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दें पुराने दौर में डोमेन नेम ना होकर यानी कि mydigitalsupport.in ना होकर IP address हुआ करता था. यानी कि Internet protocol address हुआ करता था. उदाहरण के लिए जोकि 270.631.151.349 जैसे होता था.

अब जो भी वेबसाइट हो या इंटरनेट से जुड़ा हुआ डिवाइस है. हर किसी का एक Internet protocol address होता है. उदाहरण के लिए IP address ठीक उसी तरह से होता है. जैसे कि आपके क्षेत्र में आपका पिन कोड होता है. यानी कि आपको आपके क्षेत्र का नाम आसानी से याद होगा. लेकिन पिन कोड को आप कभी कभी भूल जाते होंगे.

ऐसी अगर आपको 20 से 25 शहरों के नाम दिए जाएं और पिन कोड दिए जाएं तो आप किस को अच्छे से याद रख पाएंगे. अब आप खुद ही guess कर सकते हैं. नॉर्मल सी बात है आप शहरों के नाम अच्छे से याद रख पाएंगे. तो ऐसी ही IP address को याद ना रख पाने की समस्या को सुलझाने के लिए एक IP address के साथ एक डोमेन नेम Add किया जाने लगा. जो कि आसानी के साथ याद भी हो जाता है. लेकिन IP address याद करना बहुत मुश्किल है.

 

 

डोमेन नेम की जानकारी – Domain Name in Hindi

अब उम्मीद करता हूं कि ऊपर दी गई जानकारी से Domain Name क्या है के बारे में आपने जान ही लिया होगा. Domain Name क्या है. अब Domain Name के कुछ हिस्से भी होते हैं. जैसे कि उदाहरण के लिए आप https://mydigitalsupport.in को ले लीजिए.

अब यहां पर https क्या है तो मैं आपको बता दूं कि इंटरनेट पर वेबसाइट के लिए एक प्रोटोकॉल होता है. प्रोटोकॉल Rules का एक बंडल होता है. जिसे की हर वेबसाइट को फॉलो करना ही होता है. अब यह प्रोटोकॉल भी दो प्रकार के होते हैं.

  • https
  • http

 

 

 

 

 

अब आपने देखा होगा कि कोई भी नई वेबसाइट बनती है. तो वहां पर http रहता है यानी कि Hyper Text Transfer protocol रहता है. तो अब आपके मन में यह प्रश्न होगा कि https का मतलब क्या होता है. टेक्नोलॉजी बढ़ती जा रही है तो ऐसे में हैकर भी बहुत ज्यादा हो चुके हैं. आपके डेटा को Safe करने के लिए और किसी भी इनवेलिड एक्टिविटी से बचाने के लिए https यानी की Hyper Text Transfer Protocol Secure का उपयोग किया जाता है.

जिससे कि आपका डाटा Safe रहता है और किसी भी हैकर को Data हैक करने में दिक्कत हो सकती है. आपकी जानकारी के लिए बता दे आने वाले टाइम में https हर वेबसाइट के लिए जरूरी हो गया है . इसका उपयोग हर वेबसाइट को करना ही होगा.

 

 

 

 

 

 

अब इसके बाद बात www आती है. आपने कई वेबसाइटों को एक्सेस किया होगा. जिसमें कि आपने www लिखा देखा होगा. हालांकि हमने mydigitalsupport.in में www Hide किया हुआ है. तो आपकी जानकारी के लिए बता दें www का मतलब world Wide Web होता है. यह आपकी URL यानी वेबसाइट के Address का Sub Domain होता है.

example के लिए mydigitalsupport.in को लिया जाए तो अब इसके बाद यहां पर बात आती है. mydigitalsupport.in जोकि Domain Name है. अब इसके भी दो प्रकार है. पहले mydigitalsupport यानी वेबसाइट का नाम और वेबसाइट का नाम आप यहां पर कुछ भी ले सकते हैं और दूसरा पाठ .IN जो mydigitalsupport का एक्सटेंशन या Domain है. जो कि डोमेन के प्रकार के तहत होता है. और Domain के प्रकारों में से कोई भी एक हो सकता है.

अब यह दोनों Parts मिलकर एक unique name बनाते हैं जिसे की डोमेन नेम कहा जाता है. अगर एक बार आपने कोई डोमेन नेम रजिस्टर करा लिया. तो उसे पूरी दुनिया में कोई दूसरा व्यक्ति उसी डोमेन नेम को उसी एक्सटेंशन के साथ रजिस्टर नहीं करा सकता. बल्कि डोमेन नेम के एक्सटेंशन को बदल कर रजिस्टर करा सकता है.

डोमेन नेम के प्रकार – Types Of Domain name In Hindi

 

 

दोस्तो आपकी जानकारी के लिए बता दे डोमेन transfer domain name cheap नेम के सामान्यता चार प्रकार है. transfer domain name cheap जिनका वर्णन नीचे किया गया है और उनके कुछ उदाहरण भी transfer domain name cheap दिए गए हैं transfer domain name cheap जिन्हें transfer domain name cheap आप जान सकते हैं.

  • Top-level Domain (TLD)
  • Country Code Top Level Domain (ccTLD)
  • Second Level Domain (SLD)
  • Third level Domain (TLD)

Top-level Domain (TLD)

Top-level extension Domain का ज्यादातर यूज बड़ी-बड़ी कंपनियां या बड़े-बड़े Blogger करते हैं. नीचे कुछ Top-level extension Domain के नाम दिए गए हैं. जिनका ज्यादातर यूज किया जाता है. ज्यादातर Top-level Domain का यूज Brand Company करती है.

  1.  .NET
  2.  .IN
  3.  .COM
  4.  .ORG
  5.  .GOV
  6.  .EDU

Country Code Top Level Domain (ccTLD)

यह एक ऐसा Domain होता hostgator change domain name है wordpress change domain name जिसे की आपको देखने wordpress change domain name में ही पता चल जाएगा कि यह वेबसाइट किस देश की है. जैसे Example के hostgator change domain name लिए अगर wordpress change domain name आप गूगल की वेबसाइट को इंडिया में Open करते हैं hostgator change domain name तो उसका एड्रेस google.co.in होगा. लेकिन उसी wordpress change domain name गूगल वेबसाइट को अगर आप अमेरिका में Open करेंगे. hostgator change domain name तो उसका डोमेन नेम google.com होगा.

  1. .in – India
  2. .us – United States 
  3. .ru – Russian

Second Level Domain (SLD)

Second Level Domains का the vpn connection failed due to unsuccessful domain name resolution प्रयोग Top-level Domain से पहले किया जाता है. Example के लिए mydigitalsupport.in में Second Level Domain- mydigitalsupport है और .IN Top-level Domain है.

Third-level domain (TLD)

आपकी जानकारी के लिए बता the vpn connection failed due to unsuccessful domain name resolution दें Third-level Domain को Sub Domain भी godaddy change domain name कहा जाता है. godaddy change domain name Example के लिए अगर हम mydigitalsupport.in godaddy change domain name का Third-level Domain बनाएंगे. तो godaddy change domain name वह App.mydigitalsupport.in हो सकता है. यहां App की जगह आप अपने मनपसंद से कोई भी नाम चुन सकते है.

डोमेन नेम लेते टाइम किन बातों का ध्यान रखें-

आपकी जानकारी के लिए बता दें Domain Name लेते समय आपको दो-तीन बातों का ध्यान रखना पड़ता है.

  1. Domain Name छोटा हो renew domain name यानी कि आसान हो.
  2. लोगों को Domain Name सुनते ही कुछ इंटरेस्ट आ जाए
  3. Domain Name को इसीलिए बनाया गया है. renew domain name ताकि यूजर उसे आसानी से याद रख सके यानी आपको एक सरल Domain Name लेना है. renew domain name इसके लिए आप Hostgator, Godaddy, आदि से Domain Name ले सकते हैं. renew domain name

 

 

 

 

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Database क्या है? Benefits of डेटाबेस

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डेटाबेस क्या है – What is database in Hindi

 

कंप्यूटर में हम विभिन्न तरीके से डाटा को स्टोर कर database schema सकते हैं. crm database जैसे कि Document के रूप में , Worksheet के रूप में या crm database फिर प्रोग्राम फाइल्स के रूप में और जब हम ROW और Column के crm database रूप में डाटा को स्टोर करते हैं तो उसे tabular data कहा जाता है. crm database एक या crm database एक से अधिक टेबल को एक फाइल के रूप में स्टोर करते है. crm database तो वह डेटाबेस (database) कहलाता है.

और अच्छी तरह से समझाऊ तो डेटाबेस एक सूचना का समूह होता है. database schema जिसे इस तरह से गठित किया जाता है database schema कि उसमें जितने भी सूचना उपस्थित रहते हैं उन सभी को आसानी से बदला जा सके, database schema जब Problem हो सूचना को आसानी से इस्तेमाल किया जा database schema सके और उसका प्रबंध आसानी से किया जा सके.

Database क्या है | Database कितने प्रकार के होते हैं

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम क्या है – What is dbms in hindi

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम database schema या  DBMS एक Software System है. जिसके जरिए एक user, database को Create, database developer Define, Maintain और Control करता है. database developer डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम, Programs का Collection है. database schema आम तोर Database को Maintain करने के लिए Use किया जाता है.

अब Maintain का मतलब समझते हैं. इसमें आप ये सब कर सकते हो जैसे- Data को DB में Insert करना, Edit, Delete, Access और Update करना. ये तो आप जान ही गए Database Management System (DBMS) क्या है.

दूसरे शब्दों में बोलू तो यह एक Software package है.database developer  इस Software के जरिए आप Database को Create कर सकते हो. जैसे आप ने एक Database बनाया Student नाम का अब आपको इसमें Students के Details को add करना होगा.

अगर जाने अनजाने में database icon गलत Data दे देते हैं, database icon तब आपको Student details Edit करना database developer होगा. database icon कुछ दिन बाद आपको पता चला की किसी का rebuild database ps4डाटा गलत है. database developer तो आपको Delet e भी करना पड़ेगा. database icon किसी Students के Roll no से database developer आपको उसका नाम और Address search करना है database icon तो इसको Access बोलते हैं. database icon अब आप समझ गये होंगे की डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम क्या करता है?

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम के कुछ उदाहरण

DBMS Software के कुछ example नीचे दिए गए है.

1) MySQL

MySQL की शुरुवात 1995 में Oracle के द्वारा की गई थी. rebuild database ps4 यह एक open-source Relational database management system (RDBMS) है. यह structure query language (SQL) पर आधारित है. rebuild database ps4 यह लगभग सभी operating system को support rebuild database ps4 करता है. MySQL अपनी उच्च दक्षिता, विश्वनीयता और लागत के कारण बहुत प्रसिद्ध rebuild database ps4 है. इसमे Linux, PHP और Apache के साथ LAMP technology भी है.

2) MS Fox Pro

MS Fox Pro एक डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम है. rebuild database ps4 जिसको fox software ने शुरू किया था. लेकिन अभी यह microsoft के संरक्षण में है. डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली होने के साथ ही यह text संबंधित oriented programming language भी है. MS Fox pro एक शक्तिशाली डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम होने के साथ ही Relational database managment system (RDBMS) भी है. क्योंकि यह कई DBF files के बीच कई सम्बन्धों का व्यापक समर्थन करता है.

3) Microsoft Access

MS Access माइक्रोसॉफ्ट द्वारा संचालित डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली (DBMS) है. जो Relational microsoft jet database engine को एक graphical user interface और software development tool के साथ जोड़ती है. database synonym यह व्यवसायिक और database synonym उच्च संस्करणों में database synonym शामिल अनुप्रोयोगों के माइक्रोसॉफ्ट कार्यालय सूट का सदस्य है. database synonym इसका उपयोग छोटे और बड़े दोनों database development के लिये होता है.

4) Oracle

Oracle database एक Relational डेटाबेस database synonym मैनेजमेंट सिस्टम है. इसको Oracle corporation द्वारा maintain किया जाता है. database synonym यह पहला डेटाबेस है जिसे enterprises grid computing के लिए design किया गया है. यह RDBMS की fourth generation है. इसका उपयोग ज्यादातर बड़ी कंपनियां करती है. जिन्हें बड़ी मात्रा में data manage करने की आवश्यकता होती है.

5) SQL Server

SQL सर्वर Microsoft द्वारा विकसित किया गया RDBMS server है.जो MS-Windows के लिये computer database बनाने में उपयोग होता है. यह MS SQL server डेटाबेस बनाता है. जिसे workstation और internet के द्वारा access किया जा सकता है. इसको oracle database और MySQL से competition करने के लिए बनाया गया था. यह एक पूर्ण विशेषताओं वाला डेटाबेस है.

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम के प्रकार- Types of Dbms in Hindi

  • नेटवर्क डेटाबेस
  • हैरारिकल डेटाबेस
  • रिलेशनल डेटाबेस

डेटाबेस तीन प्रकार के होते हैं-

#1. नेटवर्क डेटाबेस : इस प्रकार के डेटाबेस में डेटा को रिकॉर्ड के रूप में दर्शाया जाता है और डेटा के बीच सम्बन्ध Link के रूप में दर्शाया जाता है.

#2. हैरारिकल डेटाबेस : इस तरह के डेटाबेस में, डेटा Note’s के साथ Three structure के रूप में व्यवस्थित किया जाता है. Note’s  Link के माध्यम से जुड़े हुए होते है.

#3. रिलेशनल डेटाबेस : इस डेटाबेस को Structural डेटाबेस के रूप में भी जाना जाता है. जिसमें डेटा, Table’s के रूप में संग्रहीत होता है. जहां स्तम्भ (Columns) और पंक्तियाँ (Rows) में संग्रहीत किया जाता हैं.

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम के मुख्य कार्य-

  • डेटाबेस का प्रबंधन करना – डेटाबेस को मैनेज करना है ताकि इसे आसानी से एक्सेस, मैनेज और अपडेट किया जा सके.
  • डाटा को अपडेट करना – डेटाबेस को आवश्यकतानुसार अपडेट करना.
  • डाटा मॉडलिंग – डेटा संग्रहण की Structured डेफिनेशन को डाटा मॉडलिंग के रूप में जाना जाता है.
  • प्रोसेसिंग क्वेरी – यह डेटा के Manipulating करने का एक तंत्र है.
  • डाटा की सुरक्षा –  डेटाबेस की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है.
  • संगामिति नियंत्रण – कई उपयोगकर्ताओं द्वारा डेटाबेस को एक साथ एक्सेस करने का तंत्र संगामिति नियंत्रण कहलाता है.
  • क्रैश रिकवरी – सिस्टम क्रैश होने के बाद डेटा रिकवरी.

डेटाबेस जरूरी क्यों है – Why database is important

दोस्तो इंटरनेट की दुनिया में डेटाबेस बहुत जरूरी है. क्योंकि इसके जरिए आप किसी भी प्रकार के डाटा को व्यवस्थित और सही ढंग से मैनेज कर सकते हैं. इसके साथ डेटाबेस यूजर को कई प्रकार की सुविधाओं को उपलब्ध कराता है.

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम एक प्रकार का एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है. जिसके भीतर अधिक मात्रा में इंफॉर्मेशन को Manage और Organize किया जा सकता है. इसके साथ ही डेटाबेस ने समय की भी बचत की है.

दोस्तों अगर बात की जाए कि डेटाबेस प्रणाली से सबसे अधिक फायदा किसे हुआ है तो वैसे देखा जाए तो इसका सबसे बड़ा फायदा इंटरनेट के हर उस यूजर को हुआ है जो की जानकारियों को खोजने के लिए हर समय मेहनत करता रहता है. डेटाबेस का सबसे बड़ा फायदा बिजनेस और बड़ी Organization कंपनियों को पहुंचा है.

 

 

 

 

 

हर तरह का Organization हर तरह की जानकारी को डेटाबेस में स्टोर रखता है. जैसे कि अगर आप किसी Music Site पर जाएंगे तो वहां पर आपको सारे गानों का डेटाबेस मिलेगा.

वैसे अगर डेटाबेस ना होता और हम यह सब काम खुद ही अपने हाथों से करते तो डेटाबेस में Store करने के मुकाबले हमें कई अधिक समय लगता और कई सारी जानकारियां इकट्ठा होने से छूट जाती. आजकल इंटरनेट के दौर में डेटाबेस एक बहुत बड़ा Management system बन चुका है. जिसे कि हर कोई यूज़ करता है.

 

डेटाबेस के फायदे

डाटाबेस के फायदे. types of database in hindi. database management system

  • डेटाबेस के आने से किसी भी जानकारी को Store करके रखा जा सकता है.
  • डेटाबेस के जरिए कम Space में अधिक जानकारियों को जुटाया जा सकता है.
  • डेटाबेस की मदद से उसमें Store जानकारियों को आसानी से एक्सेस किया जा सकता है.
  • डेटाबेस की मदद से New Data को Add करना और पुराने डाटा को Edit करने का ऑप्शन भी हमें डेटाबेस में मिल जाता है.
  • डेटाबेस की मदद से डाटा को फिल्टर किया जा सकता है.
  • डेटाबेस की मदद से डाटा को अलग-अलग प्रकार के Sort में बांटा जा सकता है.
  • एक ही डेटाबेस में कई सारी एप्लीकेशन या फिर यूजर एक साथ एक्सेस कर सकते हैं.
  • डेटाबेस की मदद से जानकारियों को सुरक्षित रखा जाता है.
  • डेटाबेस की मदद से प्रोग्राम और डाटा को अलग-अलग रखा जा सकता है.
  • डेटाबेस की मदद से डाटा का बैकअप लिया जा सकता है.

डेटाबेस का उपयोग कहां किया जाता है

दोस्तों वैसे डेटाबेस इंटरनेट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. अब इसके कई प्रकार के उदाहरण हो सकते हैं.जैसे कि डेटाबेस का उपयोग हम ऑनलाइन वीडियो Streaming, ऑनलाइन Gaming, शेयर मार्केट, आधार कार्ड, रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम, फ्लाइट रिजर्वेशन सिस्टम, बैंकिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट, कॉलेज और यूनिवर्सिटी, लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम, हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम, टेलीकम्युनिकेशन और उस हर जगह पर कर सकते हैं जो कि हमें इंटरनेट पर उपलब्ध मिलती है. इंटरनेट में जो भी जानकारी हमें मिलती है वह एक डेटाबेसके माध्यम से ही हमें दिखाई जाती है.

संक्षेप में आज की जानकारी डेटाबेस क्या है-

दोस्तों हमें उम्मीद है आपको हमारे द्वारा बताई गई जानकारी डेटाबेस क्या है – What is Database in Hindi और डेटाबेस के फायदे तथा डेटाबेस का उपयोग कहां किया जाता है और डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम क्या है जरूर पसंद आई होगी.

अगर आप ऐसे ही जानकारियों को पढ़ने में रुचि रखते हैं तो आप MDS BLOG के साथ जुड़ सकते हैं. जहां कि आपको इंटरनेट के माध्यम से हर तरह की जानकारियां दी जाती है. अगर आपका हमारी इस पोस्ट के बारे में कोई भी सुझाव है या फिर कोई भी प्रश्न है तो आप कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं. हम आपको जवाब देने की कोशिश जरूर करेंगे.

AM और PM क्या है Full Form Hindi

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AM और PM का मतलब क्या होता है  समय देखने के लिए आप जरुर किसी घड़ी का इस्तेमाल करते होंगे लेकिन आज की डिजिटल घड़ी में  कई लोगो में असमंजस की स्थिति पैदा कर देता है. लोगों के मन में ये सवाल बन जाता है कि AM क्या होता है और PM क्या होता है. हालाकि इनका मतलब पता नहीं होना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन सामान्य ज्ञान को बढ़ाने के लिए आपको इनका मतलब जानना चाहिए जिससे अगर कोई आपसे इनका मतलब पूछे तो आप बिना झिझक के उसे बता पाए.

 

 

 

 

 

AM और PM का मतलब क्या होता है

आपको बता दे घड़ी मानव जाती के आरंभिक अविष्कारों में से एक है यानी घड़ी के अविष्कार को बहुत पहले ही कर लिया गया था हालाकि इससे पहले समय जानने के लिए दिन सूर्य की स्थिति को देखा जाता था वहीं रात के समय को जानने के लिए चन्द्रमा और तारों की स्थिति को देखा जाता था. प्राचीन काल में समय जानने के लिए सूर्य को आधार मानते हुए सूर्य घड़ी बनाया गया था. माना जाता है कि सबसे पहले मिस्र के लोगों ने ‘12’ के आधार का प्रयोग करते हुए दिन को 24 बराबर हिस्सों में बांटा था. इसके बाद धीरे धीरे समय जानने के लिए कई उपकरण बनाये गए हालाकि अब हमारे पास डिजिटल घड़ी है जिनसे हम कभी समय का पता लगा सकते हैं.

 

 

 

 

 

AM (Ante Meridiem)

सबसे पहले इसके फुल फॉर्म की बात करे तो AM शब्द की फुल फॉर्म Ante Meridiem होती है इससे पहले ये शब्द आपने कभी नहीं सुना होगा क्योंकि ये कोई इंग्लिश का शब्द नहीं है ये लेटिन भाषा का शब्द है जिसका इंलिश अर्थ Before Noon (दोपहर से पहले) होता है इसे हिंदी भाषा में पूर्वाह्न यानी सुबह का समय कहते है. आपको हमेशा अपनी घड़ी में मध्यरात्रि यानी रात के 12 बजे से दिन के 12 बजे यानी दोपहर तक AM दिखाई देगा.

PM (Post Meridiem)

अब PM शब्द की फुल फॉर्म की बात करे तो PM शब्द की फुलफॉर्म Post Meridiem होती है इस शब्द को भी आपने पहले कभी नहीं सुना होगा क्योंकि ये शब्द भी लेटिन भाषा से लिया गया है. इसका इंग्लिश अर्थ After Noon जिसे हिंदी भाषा में दोपहर के बाद का समय कहते हैं. इसे हिंदी में मध्याह्न भी कहते है यानी ये शाम का समय होता है. आप अपनी घड़ी में PM को दोपहर के 12 बजे से रात को 12 बजे तक देख सकते हैं.

 

 

 

 

 

अब आप जान गए am pm scratcher होंगे कि AM और PM का am pm full form मतलब क्या होता है am pm full form चुकीं am pm plumbing हम सभी जानते है am pm plumbing कि समय में दिन am pm scratcher और रात का समय होता है इसलिए 24 घंटे को दो भागों में बांटा गया है AM जिसका अर्थ है पूर्वाह्न यानी दोपहर से पहले और PM जिसका अर्थ है मध्याह्न यानी दोपहर के बाद होता है. am pm gas cards इस लेख में am pm gas cards आपको AM और PM के बीच असमंजस दूर होने के साथ इनका दोनों मतलब भी पता चल गया होगा.

SSL क्या है ? Full Form in Hindi

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SSL क्या है? परिभाषा और कैसे SSL काम करता हैSSL (Secure Sockets Layer) साइट और उनके साइट विजिटर्स के बीच कनेक्‍शन को सुरक्षित करने के लिए वेबसाइटों द्वारा नियोजित एक एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी है।SSL का सबसे व्यापक उपयोग उन पेजेस को सुरक्षित करने के लिए है जहां यूजर्स को क्रेडिट कार्ड नंबर या लॉगिन डिटेल्‍स जैसी संवेदनशील इनफॉर्मेशन देनी होती है।हाल के वर्षों में वेबसाइट के मालिक, अपनी संपूर्ण साइट पर SSL एन्क्रिप्शन को लागू करने के लिए प्रोत्साहित हुए है, प्रमुख सर्च इंजन प्रोवाइडर्स ने https पेजेज को SEO लाभ प्रदान किया है।SSL एन्क्रिप्शन ई-कॉमर्स वेबसाइटों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि यह उन्हें अपने कस्‍टमर्स के साथ विश्वास बनाने में मदद करता है।

 

 

ssl full form

 

 

चलो इसे गहराई से समझते हैं-

जब आप एक वेबसाइट पेज पर आते हैं, जिसमें एक फॉर्म होता है, आप उस फॉर्म को भरते है और ‘submit’ बटन को क्लिक करते हैं, तो आपके द्वारा एंटर की गई इनफॉर्मेशन को किसी असुरक्षित वेबसाइट पर हैकर द्वारा इंटरसेप्ट किया जा सकता है।

यह इनफॉर्मेशन किसी बैंक ट्रांजेक्‍शन के लिए दिए गए डिटेल्‍स से लेकर हाई लेवल की इनफॉर्मेशन तक कुछ भी हो सकती है, जिसे आप ऑफ़र के लिए रजिस्टर में एंटर करना चाहते हैं।

 

 

 

हैकर लिंगो में, इस “इंटरसेप्शन” को अक्सर “मैन-इन-द-मिडिल अटैक” कहा जाता है। वास्तविक हमला कई तरीकों से हो सकता है, लेकिन सबसे आम में से एक यह है: एक हैकर एक वेबसाइट को होस्‍ट करने वाले सर्वर पर एक छोटा सा, डिटेक्‍ट न होने वाला प्रोग्राम रखता है। वह प्रोग्राम बैकग्राउंड में तब तक प्रतीक्षा करता है जब तक कि कोई विजिटर वेबसाइट पर इनफॉर्मेशन लिखना शुरू नहीं करता, और जैसे ही कोई अपनी इनफॉर्मेशन भरता हैं, तो यह प्रोग्राम उस इनफॉर्मेशन को कैप्चर करना शुरू करता हैं और फिर इसे हैकर को वापस भेजने के लिए एक्टिव हो जाता हैं। डरावना लगता हैं, लेकिन यह कोई Sci-Fi फिल्म नहीं है।

इसके वितरित जब आप SSL के साथ एन्क्रिप्टेड वेबसाइट पर जाते हैं, तो आपका ब्राउज़र वेबसर्वर के साथ एक कनेक्शन बनाएगा, SSL सर्टिफिकेट को देखेगा, और फिर अपने ब्राउज़र और सर्वर को एक साथ बाँध सकता है। यह बाइंडिंग कनेक्शन सुरक्षित होता है, जिससे आपके और उस वेबसाइट के अलावा कोई भी व्यक्ति नहीं होता, जो यह देख सके की आप अपने ब्राउज़र में क्या   टाइप कर रहे हैं और कौनसी इनफॉर्मेशन सबमिट कर रहे हैं।

यह कनेक्शन तुरंत होता है, और वास्तव में कई लोग यह कहते हैं की यह अब एक असुरक्षित वेबसाइट से कनेक्‍ट होने की तुलना में फास्‍ट है। आपको बस SSL के साथ एक वेबसाइट पर जाना होगा, और आपका कनेक्शन अपने आप सुरक्षित हो जाएगा।

 

 

SSL Kya Hai in Hindi

क्या आपने कभी देखा है कि कुछ URL “http: //” से शुरू होते हैं जबकि अन्य “https: //” से शुरू होते हैं? शायद आपने देखा कि जब आप बैंक, ऑनलाइन पेमेंट जैसी वेबसाइटें ब्राउज़ करते हैं, जहां पर आपको संवेदनशील इनफॉर्मेशन देने की आवश्यकता होती है, जैसे कि जब आप ऑनलाइन बिलों का पेमेंट करते हैं।

 

लेकिन वह अतिरिक्त “s” कहां से आया हैं, और इसका क्या मतलब है?

इसे सीधे शब्दों में कहें, तो अतिरिक्त “s” का मतलब है कि उस वेबसाइट से आपका कनेक्शन secure है और आपके द्वारा दर्ज किए गए किसी भी डेटा को सुरक्षित रूप से एन्क्रिप्ट किया गया है। वह टेक्‍नोलॉजी जो “s” को थोड़ी पॉवर देती है, SSL कहलाती है।

 

 

 

 

 

SSL Meaning in Hindi

Meaning of SSL in Hindi- सर्वर और वेब ब्राउजर के बीच एन्क्रिप्टेड लिंक स्थापित करने के लिए SSL एक स्‍टैंडर्ड सेक्‍युरिटी प्रोटोकॉल है। यह लिंक सुनिश्चित करता है कि ब्राउज़र और सर्वर के बीच सभी डेटा का आदान-प्रदान सुरक्षित रहे।

 

SSL Full Form

Full Form of SSL is –

Secure Sockets Layer

 

SSL Full Form in Hindi

SSL का फूल फॉर्म है –

सिक्योर सॉकेट्स लेयर / Secure Sockets Layer

 

 

 

 

 

 

 

Internet Security and Secure Online Transactions

जैसा कि कंपनियां और ऑर्गनाइज़ैशन अधिक ऑनलाइन सर्विसेस और ट्रांजेक्‍शन को ऑफर करते हैं, उनके ऑनलाइन ट्रांजेक्‍शन के लिए इंटरनेट सुरक्षा, एक प्राथमिकता और आवश्यकता बन जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संवेदनशील इनफॉर्मेशन – जैसे कि क्रेडिट कार्ड नंबर – केवल वैध ऑनलाइन बिज़नेसेस को ट्रांसमिट की जा रही है।

ग्राहकों की इनफॉर्मेशन को निजी और सुरक्षित रखने के लिए, कंपनियों और ऑर्गनाइज़ैशन को सुरक्षित ऑनलाइन ट्रांजेक्शन्स को एनेबल करने के लिए अपनी वेबसाइटों में SSL सर्टिफिकेट्स एड करने की आवश्यकता है।

SSL Certificates in Hindi

SSL in Hindi – SSL सर्टिफिकेट्स क्या हैं और मुझे उनकी आवश्यकता क्यों है?

SSL सर्टिफिकेट्स डेटा एन्क्रिप्शन प्रक्रिया का एक अनिवार्य घटक है जो इंटरनेट ट्रांजेक्शन्स को सुरक्षित बनाता है। वे डिजिटल पासपोर्ट हैं जो ब्राउज़रों के साथ वेबसाइट कम्‍यूनिकेशन की प्राइवेसी और अखंडता की रक्षा के लिए प्रमाणीकरण प्रदान करते हैं।

SSL सर्टिफिकेट्स का काम secure sockets layer (SSL) प्रोटोकॉल के माध्यम से यूजर के ब्राउज़र के साथ secure sessions शुरू करना है। यह सुरक्षित कनेक्शन SSL सर्टिफिकेट्स के बिना स्थापित नहीं किया जा सकता है, जो डिजिटल रूप से कंपनी की इनफॉर्मेशन को एक cryptographic key से जोड़ता है।

कोई भी ऑर्गनाइज़ैशन जो e-Commerce में संलग्न है, उसके पास कस्‍टमर और कंपनी की इनफॉर्मेशन, साथ ही फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने वेब सर्वर पर एक SSL सर्टिफिकेट्स होना चाहिए।

 

 

 

 

 

 

Important of SSL in Hindi

SSL in Hindi – SSL क्यों महत्वपूर्ण है?

SSL सर्टिफिकेट्स स्थापित करने का प्राथमिक महत्व वेब सर्वर और ब्राउज़र के बीच एक सुरक्षित सेशन शुरू करना है। एक बार सुरक्षित कनेक्शन स्थापित हो जाता हैं, तो बाद में वेब सर्वर और विजिटर के बीच पास की गई सभी इनफॉर्मेशन को प्राइवेट और एन्क्रिप्टेड रखा जाएगा।

 

Other SSL advantages in Hindi:

1) ग्राहक के विश्वास में सुधार करता है

URL में यह छोटा s कस्‍टमर को आश्वासन देता हैं कि उनकी इनफॉर्मेशन से समझौता नहीं किया जाएगा। डेटा को इच्छित टार्गेट सर्वर पर भेजा जाएगा, और इसे अनधिकृत थर्ड पार्टी पर रिडाइरेक्‍ट नहीं किया जाएगा। SSL सर्टिफिकेट्स प्राप्त करने से पहले, CA प्रामाणिकता को वेरिफाई करेगा क्योंकि यह केवल वास्तविक कंपनियों और व्यवसायों को SSL सर्टिफिकेट्स वितरित करता है।

 

2) फ़िशिंग हमलों के विरुद्ध इनफॉर्मेशन की सुरक्षा करता है

Phishing साइटें प्रसिद्ध वेबसाइटों की कपटपूर्ण कॉपिज होती हैं, जिनका उद्देश्य आपको अपने क्रेडिट कार्ड या बैंक डिटेल्‍स जैसी मूल्यवान इनफॉर्मेशन जमा करने में धोखा देना है।

 

फ़िशिंग साइटों में अक्सर मूल साइट के समान रूप और दृश्य होते हैं, लेकिन वेबसाइट का एड्रेंस अलग होता है और यह आमतौर पर SSL सर्टिफिकेट्स के साथ सुरक्षित नहीं होता।

उदाहरण के लिए, PayPal.com, इन नकली, कॉपी-कैट फ़िशिंग साइटों के लिए एक लोकप्रिय टार्गेट है। Extended validation certificates आपको एड्रेस बार में वेबसाइट के मालिक का पूरा बिज़नेस नेम दिखाते हुए फ़िशिंग हमलों से बचाता है। फ़िशिंग साइट ऑपरेटर, व्यापक वेरिफिकेशन आवश्यकताओं के कारण EV सर्टिफिकेट्स प्राप्त नहीं कर सकते।

 

 

 

 

 

3) बेहतर सर्च इंजन रैंकिंग

HTTPS को अब दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजनों में से एक Google द्वारा रैंकिंग सिग्‍नल के रूप में माना जाता है। यदि आप ऑप्टिमाइजेशन कर रहे हैं, तो आपको अपनी रैंकिंग को बढ़ाने में मदद करने के लिए SSL सर्टिफिकेट्स प्राप्त करने पर विचार करना चाहिए, खासकर ecommerce साइटों के लिए।

 

Disadvantages of SSL in Hindi

इतने सारे फायदों के साथ, कोई SSL का उपयोग क्यों नहीं करेगा? SSL सर्टिफिकेट्स का उपयोग करने से कोई नुकसान नहीं हैं? लागत एक स्पष्ट नुकसान है। SSL प्रोवाइडर्स को एक विश्वसनीय इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने और आपकी पहचान को मान्य करने की आवश्यकता है, इसलिए इसमें एक लागत शामिल होती हैं। हालांकि इस उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और Let’s Encrypt जैसे प्रोवाइडर्स की शुरूआत ने इसे काफी धीमा कर दिया है।

 

 

 

 

 

परफॉर्मेंस SSL से होने वाला एक और नुकसान है। क्योंकि आपके द्वारा भेजी जाने वाली इनफॉर्मेशन को सर्वर द्वारा एन्क्रिप्ट किया जाता है, अगर इनफॉर्मेशन को एन्क्रिप्ट नहीं किया गया है तो यह सर्वर से अधिक सिसोर्सेस लेता है। बहुत बड़ी संख्या में विजिटर्स के साथ वेब साइटों के लिए परफॉर्मेंस में अंतर केवल ध्यान देने योग्य है और ऐसे मामलों में विशेष हार्डवेयर के साथ कम किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, SSL का उपयोग करने के नुकसान बहुत कम हैं और फायदे बहुत अधिक हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आप सभी वेबसाइटों पर SSL का सही उपयोग करें। SSL सर्टिफिकेट्स का उचित उपयोग आपके कस्‍टमर्स की रक्षा करने में मदद करेगा, आपकी रक्षा करने में मदद करेगा, और आपको अपने कस्‍टमर्स का विश्वास हासिल करने और अधिक बेचने में मदद करेगा।

 

 

 

 

 

How SSL Certificates Work in Hindi:

SSL in Hindi – SSL सर्टिफिकेट्स कैसे काम करते हैं

निम्नलिखित SSL कनेक्शन प्रोसेस की स्‍टेप-बाई-स्‍टेप रूपरेखा है:

  • एक यूजर अपने इंटरनेट ब्राउज़र का उपयोग करके https: // के साथ शुरू होने वाले वेब एड्रेस को रिक्‍वेस्‍ट करता है। ब्राउज़र रिक्‍वेस्‍ट करता है कि सर्वर स्वयं ही इसकी पहचान करें।

 

 

 

 

 

  • सर्वर अपने SSL सर्टिफिकेट्स की एक कॉपी भेजकर उत्तर देता है, जिसमें इसकी पब्लिक key शामिल होती है।

 

  • ब्राउज़र यह जानने के लिए सर्टिफिकेट्स रूट की जांच करता है कि क्या वह विश्वसनीय CA से संबंधित है। यह भी जांचता है कि SSL सर्टिफिकेट अनइंस्टाल किया गया है या नहीं। इसके अलावा, यह जाँचता है कि क्या इसका सामान्य नाम वेबसाइट के लिए मान्य है।

 

  • एक बार जब ब्राउज़र पुष्टि करता है कि वह वेबसाइट पर भरोसा कर सकता है, तो वह एन्क्रिप्टस बनाता हैं और सर्वर की public key का उपयोग करके एक symmetric session key वापस भेजता है।

 

  • अब, सर्वर अपनी private key का उपयोग करके symmetric session key को डिक्रिप्ट करता है।

 

 

 

 

  • बदले में, सर्वर एन्क्रिप्टेड सेशन शुरू करने के लिए session key के साथ एन्क्रिप्टेड एक acknowledgment भेजता है।

 

  • अब, सर्वर और ब्राउज़र के बीच ट्रांसमिट होने वाला सभी डेटा एन्क्रिप्ट किया गया है।

 

 

 

 

 

 

Who issues SSL Certificates?

SSL सर्टिफिकेट्स कौन जारी करता है?

SSL सर्टिफिकेट एक Certificate Authority (CA) द्वारा जारी किए जाते हैं, साथ में अन्य डिजिटल सर्टिफिकेट भी। वे सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने वाले बिज़नेस या कंपनी की पहचान और स्वामित्व की पुष्टि करते हैं। ये जारी किए गए सर्टिफिकेट आपके चुने हुए CA के स्वामित्व वाले एक विश्वसनीय रूट सर्टिफिकेट की जंजीर हैं। भरोसेमंद रूट सर्टिफिकेट्स फ़ायरफ़ॉक्स, क्रोम, इंटरनेट एक्सप्लोरर और सफारी जैसे लोकप्रिय वेब ब्राउज़रों में एक “सर्टिफिकेट्स स्टोर” में एम्बेडेड हैं।

जब भी आप किसी ऐसी वेबसाइट पर जाते हैं, जो SSL सर्टिफिकेट का उपयोग करती है, तो आपका ब्राउज़र यह जाँचता है कि उसके स्टोर में trusted roots में से एक द्वारा हस्ताक्षरित है। यदि ऐसा नहीं है, तो यह आपको चेतावनी देगा कि कनेक्शन सुरक्षित नहीं है। आपकी साइट पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को एक एरर मैसेज भी दिखाई देगा। यही कारण है कि हम केवल एक विश्वसनीय CA से SSL सर्टिफिकेट्स खरीदने की सलाह देते हैं।

 

 

 

 

 

How do I implement SSL on my site?

मैं अपनी साइट पर SSL कैसे लागू कर सकता हूं?

SSL को अपनी वेबसाइट पर सेट करना आसान है! सामान्य तौर पर, ये आपके नए SSL सर्टिफिकेट्स को इंस्‍टॉल करने के लिए 3 सरल स्‍टेप हैं।

1) एक विश्वसनीय CA द्वारा जारी सर्टिफिकेट खरीद

विश्वसनीय सर्टिफिकेट्स आपके वेब-होस्ट से खरीदे जा सकते हैं या अन्य विश्वसनीय CA से सीधे खरीदे जा सकते हैं। एक विश्वसनीय CA से सर्टिफिकेट्स आपके विजिटर्स (क्रोम, फ़ायरफ़ॉक्स, इंटरनेट एक्सप्लोरर, सफारी आदि) द्वारा उपयोग किए जाने वाले सभी लोकप्रिय इंटरनेट ब्राउज़रों द्वारा मान्यता प्राप्त होंगे।

 

 

 

 

 

2) सर्टिफिकेट को एक्टिवेट और इंस्‍टॉल करें

यदि आपने अपने वेब-होस्ट से अपना सर्टिफिकेट्स खरीदा है तो वे आपके लिए यह कदम उठा सकते हैं। यदि आप स्वयं साइट को मैनेज कर रहे हैं, तो आपको जिन दो स्‍टेप को पूरा करने की आवश्यकता है, उनमें से एक हैं एक certificate signing request (CSR) और उसके बाद अपना सर्टिफिकेट्स इंस्‍टॉल करें।

 

3) अपनी पूरी साइट को HTTPS में बदलें

अपने सर्टिफिकेट्स को अपने टार्गेट पेजेस पर इंस्‍टॉल करने के बाद, अपनी साइट को मॉडिफाइ करें ताकि सभी कंटेंट सुरक्षित रूप से सर्व हो सके? इंटरनेट तेजी से हर पेज के लिए एक डिफ़ॉल्ट HTTPS की ओर बढ़ रहा है, और यदि किसी वेबसाइट को HTTPS से अधिक सेवा दी जाती है, तो Google वेबसाइटों को बेहतर सर्च रैंकिंग भी दे रहा है।

 

Types of SSL in Hindi

SSL के कौनसे प्रकार हैं?

दुनिया भर में वेबसाइटों की अलग-अलग मांगों के कारण, SSL सर्टिफिकेट्स विभिन्न प्रकारों की विविधता में हैं। मुख्य वेलिडेशन लेवल Extended Validation certificates (EV) और Domain Validated certificates (DV) हैं।

प्रत्येक प्रकार के यूजर विश्वास के अलग-अलग लेवल हैं। चलो यूजर के इन लेवल के बारे में बात करते हैं-

 

 

 

 

 

 

1) Extended Validation Certificates

EV सर्टिफिकेट्स ऑनलाइन बिज़नेसेस के लिए उच्चतम स्तर की सुरक्षा, विश्वास और कस्‍टमर कन्वर्शन प्रदान करते हैं। EV सर्टिफिकेट जारी करने के बाद ही कंपनी को Certificate Authority/Browser (CA/B) फोरम द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कंपनी पर कठोर बैकग्राउंड चेक दिए जाते हैं। इस वजह से, EV सर्टिफिकेट में एक यूनिक विभेदक होता है जो स्पष्ट रूप से अपने विजिटर्स के लिए वेबसाइट की विश्वसनीयता को स्पष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

जब भी कोई EV सर्टिफिकेट का उपयोग करने वाली वेबसाइट पर जाता है, तो एड्रेस बार इंटरनेट एक्सप्लोरर, फ़ायरफ़ॉक्स और क्रोम जैसे प्रमुख ब्राउज़रों में ग्रीन हो जाएगा। EV सर्टिफिकेट सभी प्रमुख ऑनलाइन रिटेलर्स और बैंकों द्वारा उपयोग किए जाते हैं और उन बिज़नेसेस के लिए अत्यधिक रेकमेंडेड हैं जो तुरंत अपनी साइट में ग्राहक विश्वास का निर्माण करना चाहते हैं।

 

2) Domain Validated Certificates

DV सर्टिफिकेट्स EV और OV ssl connection error के समान उच्च hostgator ssl डेटा एन्क्रिप्शन प्रदान करते हैं लेकिन वेबसाइट के bluehost ssl certificate पीछे बिज़नेस की पहचान के बारे में आश्वासन नहीं देते हैं। जबकि EV और OV सर्टिफिकेट, सर्टिफिकेट अथॉरिटी द्वारा मैन्युअल रूप से भली प्रकार जाँच करने के बाद ही एप्‍लीकेंट ऑर्गनाइज़ेशन को जारी किए जाते हैं, invalid ssl certificate DV सर्टिफिकेट्स को एक आटोमेटिक, ऑनलाइन प्रक्रिया का उपयोग करके invalid ssl certificate डोमेन कंट्रोल इंस्‍टॉल होने के बाद जारी किया जाता है। DV सर्टिफिकेट्स छोटे-मध्यम आकार की वेब साइटों के बीच एक लोकप्रिय विकल्प हैं, hostgator ssl क्योंकि वे तेजी से जारी किए जाते हैं और लागत कम होती हैं।

 

 

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