Train का आविष्कार किसने किया और कब? जानेदुनिया में प्रतिवर्ष अरबों लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। आज यह तेज गति और लंबी या छोटी यात्रा में लगने वाले सस्ते भाड़े कारण यातायात का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। लेकिन क्या आपको पता है, यात्रियों व वस्तुओं को ढोने वाली विश्व की पहली train ka avishkar kisne kiya और कब? तो बता दे, विश्व की पहली सफल ट्रेन 27 सितंबर, 1825 को जार्ज स्टीफेन्सन (George Stephenson) द्वारा बनाई गई थी। उस ट्रेन का नाम ‘लोकोमोशन’ था।Watch ka Avishkar Kisne Kiya?(Opens in a new browser tab)
जार्ज स्टीफेन्सन एक ब्रिटिश इंजीनियर थे। उनके द्वारा बनाई गई ट्रेन की रफ्तार 24 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जिससे पहली बार 450 यात्रियों ने इंग्लैंड के डार्लिंगटन और स्टॉकटन के बीच यात्रा की थी।Koshika ki khoj kisne ki?(Opens in a new browser tab)
जर्ज स्टीफेन्सन और उनका तेज ट्रेन इंजन ‘राॅकेट’
अपनी पहली ट्रेन की सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने लिवरपूल और मैनचेस्टर के बीच एक 64 किलोमीटर लंबी रेल लाइन भी बनाई थी। यह विश्व की पहली इंटर-सिटी रेलवे थी, जिसका परिचालन 18 सितंबर, 1830 को शुरू हुआ था।
सन् 1829 में जब लिवरपूल-मैनचेस्टर लाइन का कार्य पूरा होने वाला था तभी इंगलैंड में एक लोकोमोटिव प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था, जिसमें स्टीफेन्सन ने भी अपने दूसरे रेल इंजन ‘रॉकेट’ के साथ भाग लिया था।
स्टीफेन्सन ने रॉकेट को 58 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाकर उस प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने उस स्टीम रेल इंजन को अपने बेटे राॅबर्ट के साथ मिलकर बनाया था।
ट्रेन से जुड़े 20 महत्वपूर्ण तथ्य
जार्ज स्टीफेन्सन से भी पहले इंग्लैंड के रिचर्ड ट्रेविथिक ने भी सन् 1804 में एक स्टीम रेल इंजन का निर्माण किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य कोयले की खान से कोयले को लोहे की ढलाई करने वाले कारखाने तक पहुंचाना था। लेकिन उनका वह स्टीम रेल इंजन कई खामियों के कारण लोकप्रिय नहीं हो पाया।
बिजली से चलने वाला दुनिया का पहला रेल इंजन स्कॉटलैंड के रसायनज्ञ रॉबर्ट डेविडसन द्वारा 1837 में बनाया गया था। इसे बैटरी से संचालित किया जाता था।
ट्रेनों का ट्रैक बदलने वाले रेलरोड स्विच का आविष्कार अंग्रेज सिविल इंजीनियर सर चाल्र्स फाॅक्स ने सन् 1832 में किया गया था।
इंग्लैंड के ब्राइटन शहर में स्थित वोल्क इलेक्ट्रिक रेलवे दुनिया का सबसे पुराना ईलेक्ट्रिक रेलवे है, जिसका परिचालन आज भी किया जा रहा है। इसकी शुरूआत सन् 1883 में कि गई थी।
दुनिया की पहली डीजल से चलने वाली ट्रेन की शुरूआत सन् 1912 में स्विट्जरलैंड में कि गई थी। उस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 100 Km/hr थी।
विश्व की पहली तेज रफ्तार ट्रेन की शुरूआत वर्ष 1964 में जापान के टोक्यो और ओसाका शहर बीच हुई थी, जिसकी अधिकतम रफ्तार 164 किलोमीटर प्रति घंटा थी।
इंग्लैंड के डार्लिंगटन शहर में स्थित स्केर्न ब्रिज (Skerne Bridge) दुनिया का पहला रेलवे ब्रिज है।
‘London Underground’ दुनिया की पहली भूमिगत रेलवे है। इसकी शुरूआत 9 जनवरी, 1863 कोई हुई थी। इसकी लंबाई लगभग 400 किमी. है।
ट्रेन में लगने वाले एयर ब्रेक सिस्टम का आविष्कार अमेरिकी इंजीनियर जाॅर्ज वेस्टिंगहाउस ने सन् 1872 में किया था।
वर्तमान में दुनिया की सबसे तेज रफ्तार ट्रेन शंघाई मैग्लेव है, जिसकी अधिकतम रफ्तार 431 किमी. प्रति घंटा है। यह ट्रेन चीन के शंघाई शहर में चलती है।
दुनिया की सबसे लंबी रेल लाइन यीवू-मैड्रिड रेल लाइन है। इसे चीन के यीवू और स्पेन के मैडिड्र शहर के बीच बनाया गया है। इसकी लंबाई लगभग 13,000 किमी. है।
संयुक्त राज्य अमेरिका का रेल नेटवर्क दुनिया का सबसे लंबा रेल नेटवर्क है। इसकी लंबाई 2,50,000 किमी. से भी ज्यादा है। अमेरिका के 80% रेल लाइनों का उपयोग केवल माल ढुलाई के लिए किया जाता है।
भारत में पहली ट्रेन आज से 166 वर्ष पहले 16 अप्रैल, 1853 को महाराष्ट्र के बोरीबंदर और ठाणे का बीच चली थी। उस ट्रेन में तीन स्टीम इंजन और 14 डिब्बे लगाए गए थे। उसमें पहली बार 400 मेहमान यात्रियों ने यात्रा कि थी।
भारतीय रेल 67,368 किमी. मार्ग की founder of train लंबाई के साथ दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। इसके पास 13,452 यात्री ट्रेनें और 9,141 माल गाडियां हैं।
दुनिया का सबसे लंबा train running status रेलवे प्लेटफार्म भारत founder of train के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित ‘गोरखपुर स्टेशन’ है। इसकी लंबाई 4,430 फीट है।
भारत में सबसे तेज चलने train running status वाली ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ है। founder of train इसकी अधिकत्म रफ्तार 180 km/hr है। train running status भारत की दूसरी सबसे तेज चलने वाली ट्रेन train running status ‘गतिमान एक्सप्रेस’ है। founder of train इसकी अधिकतम रफ्तार 160 km/hr है। यह दिल्ली और झांसी के बीच चलती है।
दुनिया की सबसे लंबी रेलवे सुरंग स्विट्जरलैंड में स्थित ‘गोथार्ड टनल’ है। founder of train यह 57 किमी. लंबा है। live train status वही भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग जम्मू-कश्मीर में स्थित ‘पीर पंजाल रेलवे टनल’ है। इस सुरंग की लंबाई 11.215 किमी. है।
भारत में ट्रेन के डिब्बों में प्रयोग होने वाले live train status बिजली के सभी उपकरण भारतीय मानक 220 वोल्ट के विपरीत 110 वोल्ट पर कार्य करते हैं।
‘विवेक एक्सप्रेस’ भारत में सबसे लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन है। live train status यह असम के डिब्रूगढ़ और तमिलनाडु के कन्याकुमारी के बीच चलती है तथा कुल 4286 किमी. की दूरी तय करती है।
दुनिया की पहली अंतरराष्ट्रीय रेल लाइन सन् 1843 live train status में बेल्जियम और जर्मनी के बीच बनाई गई थी। यह रेलवे लाइन बेल्जियम के ब्रुसेल्स शहर को जर्मनी के कोलोन शहर से जोड़ती थी।
कोशिका की खोज किसने की और कैसे? जानेकोशिका सभी जीवित वस्तुओं की आधारभूत संरचना है। मनुष्य का शरीर खरबों कोशिकाओं से मिलकर बना होता हैं। ये हमारे शरीर को आकार देती है और भोजन से पोषक तत्व प्राप्त कर ऊर्जा का निर्माण करती है। bone marrowकोशिका के अंदर ही DNA जैसे अनुवांशिक पदार्थ भी मौजूद होते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है, सबसे पहले Koshika ki khoj kisne ki और कब? तो इसका उत्तर है- रॉबर्ट हुक ने। इन्होंने ही सन् 1665 में कोशिका की खोज की थी।
रॉबर्ट हुक इंग्लैंड के एक प्राकृतिक दार्शनिक थे। सन् 1665 में उन्होंने बोतल के काॅर्क के पतले टुकड़ों को कंपाउंड माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर देखा तो उन्हें उनमें हजारों छोटे-छोटे छिद्र नजर आये।
उन छोटे-छोटे छिद्रों को उन्होंने ‘Cell’ नाम दिया था। सेल शब्द लैटिन के ‘Cella’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है- एक छोटा कमरा।
हालांकि, हुक उन छिद्रों की वास्तविक संरचना या कार्य के विषय में नहीं जानते थे। जिन छिद्रों को वह कोशिका मान रहे थे; वे वास्तव में पौधों के ऊतकों की खाली कोशिका दीवारें थी।
उस समय अच्छे माइक्रोस्कोप न होने के कारण वे कोशिका दीवार के अंदर झाक कोशिका के अंदर मौजूद अन्य महत्वपूर्ण घटकों को नहीं देख पाये थे।
बाद के वर्षों में विश्व के अन्य वैज्ञानिकों ने कोशिका एवं उसकी वास्तविक संरचना के विषय में अनेक खोजें कि। नीचे कोशिका से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर दिये जा रहे हैं। इन्हें भी पढ़े-
Q2. क्या कोशिकाएं भी आत्महत्या करती हैं?
उत्तरः हां! कोशिकाएं भी आत्महत्या करती है। जब कोशिकाएं बाहरी या आंतरिक कारणों से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो स्वयं को नष्ट करके पूरे शरीर की रक्षा करती हैं। कोशिकाओं के इस प्रकार स्वयं को नष्ट करने की प्रक्रिया को एपोप्टोसिस (Apoptosis) कहा जाता है।
शरीर में किसी विशेष काम को करने के लिए बनी कोशिकाएं काम समाप्त हो जाने के बाद अनावश्यक हो जाती हैं, इसलिए उनका नष्ट होना शरीर के लिए अच्छा होता है।
ऐसी कोशिकाएं जिनका डीएनए किसी कारण खराब हो जाता है, वे स्वयं ही मर जाती हैं। यानी आत्महत्या कर लेती हैं। अगर ऐसी खराब कोशिकाएं जीवित रहकर कोशिका विभाजन करने लगें तो वे कैंसर की कोशिकाओं में भी बदल सकती हैं।
इसी प्रकार वायरस जब हमारी कोशिका से विभाजित होकर बीमारी फैलाने के लिए तैयारी करते रहते हैं तब अचानक हमारी वायरसयुक्त बीमार कोशिकाएं मर जाती हैं। साथ में वायरस भी खत्म हो जाते हैं। इस प्रकार शरीर बीमारी से बचा रहता है।
Q3. रॉबर्ट हुक ने एक मृत कोशिका की खोज की थी, लेकिन क्या आपको पता है जीवित कोशिका की खोज का श्रेय किसे दिया जाता है?
उत्तरः जीवित कोशिका की खोज सन् 1674 में डच वैज्ञानिक एंटोनी वैन लेउवेनहोएक ने की थी। इन्हें ही प्रोटोज़ोआ, बैक्टरीया और शुक्राणु कोशिका (sperm cell) की खोज का श्रेय भी दिया जाता है।
Q4. कोशिका का सिद्धांत (cell theory) किसने दिया था?
उत्तरः कोशिका सिद्धांत का प्रतिपादन सन् 1838 में थियोडोर श्वान और मैथियास जैकब श्लाइडेन ने किया था।
Q5. कोशिका के अंदर ऊर्जा का निर्माण करने वाले Mitochondria की खोज किसने की थी?
उत्तरः माइटोकॉन्ड्रिया की खोज सन् 1857 में अल्बर्ट वॉन कोलिकर ने किया था।
Q6. कोशिका के अध्ययन को क्या कहा जाता है?
उत्तरः कोशिका के अध्ययन को कोशिका विज्ञान (Cytology) कहा जाता है। इस विज्ञान के अंतर्गत कोशिका की संरचना एवं कार्य का अध्ययन किया जाता है।
Q7. दुनिया की सबसे छोटी कोशिका का क्या नाम है?
उत्तरः दुनिया की सबसे छोटी कोशिका ‘Mycoplasma’ को माना जाता है। इसका आकार लगभग 10 माइक्रोमीटर होता है। मनुष्य के शरीर की सबसे छोटी कोशिका शुक्राणु की कोशिका को माना जाता है।
Q8. दुनिया की सबसे बड़ी कोशिका किसे माना जाता है?
उत्तरः दुनिया की सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग पक्षी के अंडे को माना जाता है। मनुष्य के शरीर की सबसे बड़ी कोशिका डिंब (ovum) को माना जाता है।
Q9. मुख्य रूप से कोशिकाएँ कितनी प्रकार की होती हैं?
उत्तरः मुख्य रूप से कोशिकाएं दो प्रकार की होती हैं-
अकेन्द्रिक कोशिका (Prokaryotic Cell) : ये smallest bone in human body ऐसी कोशिका होती है, जिसके मध्य में केन्द्रक नहीं smallest bone in human body पाया जाता। इस प्रकार की कोशिका वाले जीवों का आकार बहुत छोटा होता हैं। जैसे – विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया
सुकेन्द्रिक कोशिका (Prokaryotic Cell) : smallest bone in human body इस कोशिका के मध्य में केन्द्रक पाया जाता है। इस प्रकार की कोशिकाएं आकार में अकेन्द्रिक कोशिका से बड़ी होती है और इनकी संरचना भी जटिल होती है। इस प्रकार की कोशिएं मनुष्य और पौधे में पाई जाती है।
Q10. ऊतकों (tissues) का bone marrow निर्माण कैसे होता हैं?
उत्तरः ऊतकों का निर्माण एक ही तरह की कोशिकाओं के समूह से मिलकर होता है।
Q11. कोशिका दीवार (cell wall) bone marrow किसकी कोशिका में पाया जाता है?
उत्तरः पेड़-पौधों की कोशिकाओं में
Q12. किस प्रकार की कोशिका का bone marrow विकास धरती पर सबसे पहले हुआ था?
उत्तरः अकेन्द्रिक कोशिका (Prokaryotic cell) का
Q13. कोशिका में Ribosome bone marrow का क्या कार्य है?
आज दुनिया घड़ी के अनुसार चलती है। founder of watch हम अपनी पूरी दिनचर्या घड़ी के अनुसार निर्धारित करते है। इसके आविष्कार से पहले लोग सूरज की रोशनी और पानी के उतार-चढ़ाव को देखकर समय का अनुमान लगाया करते थे। लेकिन क्या आपको मालूम है ghadi ka avishkar kisne kiya tha? तो इसका उत्तर है – पीटर हेनलेन (Peter Henlein) ने। उनकी उस पहली घड़ी का नाम ‘पोमेंडर वॉच’ था, जिसे उन्होंने सन् 1505 में बनाया था।
पीटर हेनलेन जर्मनी के न्यूनबर्ग शहर में ताले एवं घड़ी बनाने का कार्य किया करते थे। सन् 1505 में उनके द्वारा बनाई गई पहली घड़ी दुनिया की सबसे पुरानी घड़ी है, जो आज भी सही तरीके से काम कर ही है।
पोमेंडर वाॅच एक डिब्बी के आकार वाली घड़ी है। इसके आधे निचले हिस्से में घड़ी के छोटे-छोटे कलपुर्जे लगे है तथा बाकि के आधे हिस्से से इसके ऊपरी भाग को ढका जाता है। यह घड़ी तांबे और सोने से बनी है। वर्तमान में इसकी कीमत 3 से 5 करोड़ यूरो बताई जा रही है।
Q2. उन दो शुरुआती घड़ियों के नाम बताये, जिनका उपयोग पोमेंडर वाॅच के आविष्कार से पहले विश्व भर में किया जाता था?
उत्तरः उन दो घड़ियों के नाम हैं – सूर्य और पानी घड़ी। यानी Sundial और Water clock. इनको सबसे पहले ईसा से 1500 वर्ष पूर्व मिस्त्र में बनाया गया था। मिस्त्र की पानी घड़ी से उन्नत पानी घड़ी का आविष्कार प्रसिद्ध चीनी विद्वान सु-संग (Su Sung) ने 11वीं सदी में किया था। जो आज भी चीन के कैफेंग शहर में मौजूद है।
Q3. पेंडुलम घड़ी का आविष्कार किस प्रसिद्ध गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी ने किया था?
उत्तरः क्रिस्चियन ह्यूजेन्स ने सन् 1656 में
Q4. दुनिया की पहली कलाई घड़ी किसके लिए और कब बनाई गई थी?
उत्तरः पहली कलाई घड़ी इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम के लिए सन् 1571 में बनाई गई थी। महारानी एलिज़ाबेथ को वह घड़ी उनके पसंदीदा राजनेता रॉबर्ट डुडले द्वारा नये साल के तोहफे के रूप में दी गई थी।
Q5. समय मापने और घड़ी बनाने का विज्ञान क्या कहलाता है?
उत्तरः समय मापन कला या घड़ी निर्माण कला (Horology)
Q6. अंग्रेजी में घड़ी के लिए दो शब्द है – ‘clock’ और ‘watch’. क्या इन शब्दों में कोई अंतर है?
उत्तरः हाँ! वाॅच उस घड़ी को कहा जाता है जिसे हम अपनी कलाई पर पहनते है या जेब में रखते है, वही क्लॉक वॉच के बड़े रूप को कहते है। इसे हम दीवार पर टांगते है या मेज पर रखते है।
Q7. स्टॉपवॉच का आविष्कार किसने किया था?
उत्तरः स्टॉपवॉच का आविष्कार फ्रांस के घड़ीसाज़ लुईस मोइनेट (Louis Moinet) ने सन् 1816 में किया था।
दुनिया का पहला स्टॉपवॉच
Q8. दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक घड़ी का क्या नाम था?
उत्तरः The Hamilton Electric 500, यह विश्व की पहली बैटरी से चलने वाली कलाई घड़ी थी। इसे The Hamilton Electric कंपनी ने वर्ष 1957 में बनाया था।
Q9. जीपीएस और संचार उपग्रहों में किस प्रकार की घड़ी का इस्तेमाल किया जाता है?
उत्तरः परमाणु घड़ी का (Atomic clock)
Q10. दुनिया की सबसे बड़ी घड़ी का क्या नाम है और यह कहाँ है?
उत्तरः दुनिया की सबसे बड़ी घड़ी ‘Makkah Royal Clock Tower’ है। यह सउदी अरब के मक्का में स्थित है। इसका व्यास 141 फीट है। इसे हर रात रौशन करने के लिए 10 लाख एलईडी लाइट का इस्तेमाल किया जाता है।
Q11. पहली डिजिटल घड़ी कब बनाई गई थी?
उत्तरः पहली डिजिटल घड़ी वर्ष 1972 में हैमिल्टन वाॅच कंपनी द्वारा बनाई गई थी। उसका नाम ‘Pulsar Time Computer’ था।
Q12. विश्व की सबसे सटीक watch the founder online free समय बताने वाली घड़ी का क्या नाम है?
उत्तरः NIST-F1, यह एक परमाणु घड़ी है। watch the founder online free इसका निमार्ण अमेरिकी संस्था National Institute of Standards and Technology के वैज्ञानिकों watch the founder online free ने किया है। watch the founder online free यह इतना सटीक समय बताती है कि इसमें 10 करोड़ वर्षों में मात्र 1 सेकेंड ही गलती हो सकती है।
Q13. पहला स्मार्ट वॉच किसने और कब बनाया था?
उत्तरः पहला स्मार्ट वॉच जपानी कंपनी सीको ने 10 जून, 1998 को बनाया था, जिसका नाम Ruputer था।
Q14. एक सेकंड में कितने मिलीसेकंड होते है?
उत्तरः 1000 मिलीसेकंड, एक मिलीसेकंड सेकंड का हजारवां हिस्सा होता है। 10 मिलीसेकंड में 1 सेंटीसेकंड तथा 100 मिलीसेकंड में 1 डेसीसेकंड होता है।
Q15. दुनिया की सबसे कीमती घड़ी कौन-सी है?
उत्तरः दुनिया की सबसे किमती घड़ी Patek Philippe Grandmaster Chime Ref. 6300A-010 है। इसकी कीमत 3.119 करोड़ डॉलर है।
Q16. समय मापने की सबसे छोटी founder of watch इकाई watch the founder online क्या है?
Q17. विश्व की पहली अलार्म घड़ी founder of watch किसनेwatch the founder online बनाई थी?
उत्तरः अमेरिकी घड़ीसाज़ लेवी हचिन्स ने founder of watch सन् 1787 में पहली watch the founder online अलार्म घड़ी का आविष्कार किया था। उसे उन्होंने खुद के founder of watch लिए बनाया था, जो केवल सुबह 4 बजे ही बजती थी।
Q18. घड़ी में मिनट वाला काटा सबसे पहले किसने लगाया था?
उत्तरः घड़ी में मिनट वाला काटा स्विट्जरलैंड के घड़ीसाज़ जोस्ट बर्गी ने सन् 1577 में लगाया था।
पेन का आविष्कार किसने किया और कब? full form of pen मनुष्य पुराने समय में लिखने के लिए पक्षियों के पंखों, सरकंडों आदि इस्तेमाल किया करता था। लेकिन आज से लगभग 80 वर्ष पूर्व हुये आधुनिक बाॅलपाॅइंट पेन के आवष्किार ने लिखने के तरीके को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। लेकिन क्या आपको मालूम है Pen ka avishkar kisne kiya और कब? तो बता दे, इसका आविष्कार अमेरिकी वकील और लेदर का काम करने वाले एक व्यक्ति जॉन जैकब लाउड (John Jacob Loud) ने सन् 1888 में किया था।nawazuddin Siddiqui Kaun Hai? Nawazuddin Siddiqui Jada Famous Kab Hua?(Opens in a new browser tab)
इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने एक ऐसी कलम बनाई जिसकी नोक धातु की एक छोटी बाॅल के आकार की थी और चारों ओर आसानी से घूम सकती थी। उस छोटी बाॅल को उसके स्थान पर बनाये रखने के लिए एक साॅकेट का उपयोग किया गया था।
लाउड का बाॅल पेन लेदर पर लिखने के लिए बहुत अच्छा था लेकिन उससे कागज पर सुचारू रूप से नहीं लिखा जा सकता था; क्योंकि उसकी नोक कठोर थी। अपने इसी दोष के कारण वह उस समय ज्यादा प्रचलित नहीं हो सका।
बाद में वर्ष 1938 में हंगेरियन मूल के अर्जेंटीनियन आविष्कारक लादिसालो जोस बिरो (Ladislao José Biro) पतली स्याही और बाॅल बियरिंग का उपयोग कर आधुनिक बाॅल पेन बनाने में सफल रहे। जोस बिरो का वह पेन व्यावसायिक रूप से भी काफी सफल रहा और कुछ ही वर्षों में दुनिया भर में 100 अरब से ज्यादा पेन बिक गए।शिक्षा ऋण Education Loan Kya Hai Education Loan Kaise Milega(Opens in a new browser tab)
Q2. Fountain Pen का आविष्कार किसने किया था?
उत्तरः फाउंटेन पेन का आविष्कार रोमानियाई आविष्कारक पेट्राक पोएनारू (Petrache Poenaru) ने सन् 1827 में किया था। बाद में सन् 1884 में अमेरिका के लुईस वाटरमैन ने फाउंटेन पेन की डिज़ाइन में कई महत्वपूर्ण बदलाव कर एक बेहतर फाउंटेन पेन बनाया था।
Q3. पेन की स्याही किन चीजों से मिलकर बनी होती हैं?
उत्तरः लगभग सभी कलमों की स्याही एक या एक से अधिक रंग वर्णकों (color pigments) और डाइ को किसी साल्वेंट (जैसे- पानी या तेल) में मिलाकर बनाई जाती है। कलम कागज पर सुचारू रूप से चले इसके लिए स्याही में अतिरिक्त रासायनिक कंपाउंड, जैसे – ओलेक एसिड और अल्काइल अल्कानोलामाइड भी मिलाया जाता है।
Q4. पेन की नोक यानी निब किस चीज की बनी होती है?
उत्तरः आजकल पेन की निब मुख्यतः स्टेनलेस स्टील या टाइटेनियम से बनाई जाती है।
Q5. दुनिया के सबसे किमती पेन का क्या नाम है?
उत्तरः दुनिया का सबसे कीमती पेन ‘टिबाल्डी फुलगोर नोक्टर्नस’ (Tibaldi Fulgor Nocturnus) है। वर्तमान में इसकी कीमत लगभग 60 करोड़ है। इसे बनाया है इटली की कंपनी टिबाल्डी ने।
दुनिया का सबसे कीमती कलम
Q6. क्या पेन की स्याही जहरीली होती है?
उत्तरः नहीं! अगर आपके मुंह में किसी प्रकार से कलम की स्याही चली गई है, तो आपको अत्यधिक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार – “बाॅल पेन या फाउंटेन पेन में इतनी कम स्याही होती है कि अगर उसकी पूरी स्याही मुंह के अंदर चली भी जाए तो वह विषैली नहीं होगी।”
हाँ, अगर आपके पेट के अंदर थोड़ी ज्यादा मात्रा में स्याही चली गई है तो आपको थोड़ा ज्यादा पानी पी लेना चाहिए।
Q7. Pencil का आविष्कार किसने किया था?
उत्तरः आधुनिक पेंसिल का आविष्कार फ्रांसीसी चित्रकार और वैज्ञानिक निकोलस-जैक्स कंट (Nicholas-Jacques Conte) ने सन् 1795 में किया था।
Q8. रबर (eraser) का dab pen आविष्कार किसने किया था?
उत्तरः रबर का आविष्कार dab pen इंग्लैंड के dab pen ऑप्टीशियन एडवर्ड नायरने ने सन् 1770 में किया था।
Q9. पेंसिल के ऊपर रबर fountain pen लगाने dab pen का श्रेय किसे दिया जाता है?
उत्तरः हाइमन लिपमैन fountain pen को, full form of pen लिपमैन को full form of pen ही सबसे पहले पेंसिल के ऊपर fountain pen एक छोटा-सा रबर लगाने का विचार full form of pen आया था। 30 मार्च, 1858 को fountain pen उन्होंने इसके लिए पेटेंट भी प्राप्त किया था।
Q10. पेंसिल शापनर का full form of pen आविष्कार vape pen किसने किया था?
उत्तरः शुरूआती पेंसिल शापनर बनाने का श्रेय फ्रांसीसी गणितज्ञ vape pen बर्नार्ड लैसिमोन को दिया जाता है। लैसिमोन ने सन् 1828 में पहला शापनर बनाया था। vape pen हालांकि xp pen वह आज के शापनर जैसा नहीं था। जिस तरह का शापनर xp pen हम आज उपयोग xp pen करते है, vape pen लगभग वैसा शापनर अफ्रीकी मूल के xp pen अमेरिकी बढ़ई जाॅन ली लव (John Lee Love) ने सन् 1897 में बनाया था।
Q11. पेंसिल का मध्य भाग किस चीज से बना होता है?
उत्तरः ग्रेफाइट से, यह क्रिस्टलीय कार्बन का प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रूप है।
Q12. कागज का आविष्कार किसने किया था?
उत्तरः चीन के राजनेता काई लुन ने सन् 105 में आज से मिलते-जुलते कागज का निर्माण किया था। इसलिए काई लुन को ही कागज का आविष्कारक माना जाता है।
चाँद पर सबसे पहले कौन गया था? जानेदोस्तों, पिछले 100 वर्षों के दौरान मनुष्य के साहस और विज्ञान के मिलाप ने हमें कई अद्भुत नजारे दिखाए हैं। moon knight पर पूरा विश्व मानता है कि उनमें सबसे रोमांचक क्षण वो था जब चंद्रमा sheri moon zombie की सतह पर इंसान ने अपना पहला कदम रखा था। लेकिन क्या आपको पता है chand par sabse pahle kon gaya tha और कब? तो बता दे, चाँद की सतह पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति अमेरिकी अंतरिक्ष-यात्री नील आर्मस्ट्रांग (Neil Armstrong) थे। चांद पर अपना पहला कदम उन्होंने 21 जुलाई, 1969 को रखा था।Tik Tok Video Earn Money App टिकटॉक पर वीडियो बनाकर कमाई करने का तरीका(Opens in a new browser tab)
इसके 19 मिनट बाद एल्ड्रिन भी चंद्रमा पर उतरे। sheri moon zombie उन्होंने चंद्र यान के स्टैंड में लगी एक प्लेट चंद्रमा पर छोड़ दी, जिस पर लिख था: ‘जुलाई 1969 में यहां पृथ्वी के मानव ने सर्वप्रथम अपने पैर रखे।’ और यह भी कि ‘यहां हम समूची मानवता की शांति के लिए आए हैं।’ नीचे तीनों अंतरिक्ष यात्रियों एवं अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी थे।
वर्ष 1969 में इतिहास रचने वाले उन तीन sheri moon zombie अंतरिक्ष यात्रियों की अपूर्व जाँबाजी ने मनुष्य के मन पर अपनी अमिट छोड़ी है। मानव और विज्ञान के इतिहास में यह अद्भुत क्षण था। तो आइए जानते है उन तीन चंद्रयात्रियों के विषय में कुछ और बातें –
नील आर्मस्ट्रांग – चंद्र सतह छूने वाले पहले व्यक्ति
आइए, सबसे पहले आर्मस्ट्रांग के बारे में जान लेते है; क्योंकि वे ऐतिहासिक अपोलो-11 यान के कमांडर तो थे ही, चंद्रमा को स्पर्श करने वाले पृथ्वी के पहले मानव भी थे।
नील आर्मस्ट्रांग 5 अगस्त, 1930 के दिन अमेरिका के ओहियो राज्य की ऑगलाइज़ काउंटी में जन्मे थे। बचपन से ही नील को नीले-नीले आसमान में उड़ना बहुत अच्छा लगता था। छह साल की छोटी-सी उम्र में एक फोर्ड ट्राइमोटर विमान में क्या सैर की, कि उड़ना उनकी लत बन गई। नतीजा ये कि सोलहवें जन्मदिन पर उनके पास कार चलाने का लाइसेंस तो नहीं था, मगर विमान पायलट का लाइसेंस जरूर था।
1947 में नील ने जब ब्लूम हाईस्कूल की पढ़ाई खत्म की तो उस पूरे स्कूल में यह माना जाता था कि असफल होना तो नील जानते ही नहीं। उनके सहपाठी प्यार से कहते थे – “नील… यानी देखा, सोचा, हो गया!”
इसके बाद उन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनने के लिए पर्ड्यू विश्वविद्यालय में प्रवेश किया, मगर कुछ समय पढ़ाई को रोक देश के लिए कोरिया युद्ध में हिस्सा लिया और एक एयर मेडल व दो गोल्ड स्टार पदक जीते।
इंजीनियर बन कर नील ने 1995 में ‘नासा’ में प्रवेश लिया और पायलट, इंजीनियर व अंतरिक्ष-यात्री के तौर पर कई कामों को सफल अंजाम तक पहुंचाया। रिसर्च पायलट के तौर पर नील ने जेट, रॉकेट, हेलीकॉप्टर और ग्लाइडर किस्म वाले 200 प्रकार के मॉडल उड़ाए, जिनमें 4000 मील प्रति घंटे रफ्तार वाला एक्स-15 एयरक्राफ्ट भी शामिल था। इन सभी उड़ानों में रोमांच का अहसास तो होता है, मगर खतरा भी लगातार बना रहता है। मगर नील आर्मस्ट्रांग मन के सचमुच स्ट्रांग सिद्ध हुए… हर बार।
अपनी हाजिर-दिमागी, आत्मविश्वास, ज्ञान और निर्भीकता के कारण उन्होंने हर मुश्किल को जीता। इतना ही नहीं, दो बार उन्होंने साक्षात यमराज का सामना किया और उन्हें पछाड़ा।
जी हाँ, एक बार जेमिनी-8 व दूसरी बार अपोलो-11 की उड़ान के दौरान! जेमिनी-8 का कमांड नील के हाथों में था, मगर तकनीकी खराबी इतनी जबर्दस्त थी कि यान ‘राॅल’ और ‘टम्बल’ करने लगा। ऐसी विकट हालत में भी धैर्य और हाजिर दिमागी से नील ने मुश्किलों पर नियंत्रण पा लिया था, और इसी कारण बाद में उन्हें अपोलो-11 की बागडोर सौंपी गई।
मगर जब वह बज़ एल्ड्रिन के संग लूनर मॉड्यूल ‘ईगल’ में चंद्रमा पर उतरने वाले थे, अचानक कंप्यूटर बार-बार रुकावट डालने लगा, तो नील ने सारे कंट्रोल स्वयं के हाथ में ले लिए और यान को चंद्रमा की सतह पर सफलता से उतार लिया।
उस समय ईगल के लैंडिंग टैंक में सिर्फ 15 सेकंड के लिए ईंधन बचा था। इसका मतलब यह हुआ कि अगर ईंगल अगले 15 सेकंड में न उतर पाता तो निश्चित ही चंद्रमा की सतह पर क्रैश हो जाता… मगर यमराज से नील की यह पहली मुठभेड़ तो थी नहीं कि व घबरा जाते!
पृथ्वी से उड़ान भरने के 109 घंटे और 25 मिनट बाद जब नील ने चंद्रमा पर अपना पहला कदम रखा तो इस अलौकिक घटना के साथी थे संपूर्ण पृथ्वी के एक-चौथाई मनुष्य जो अपने टी.वी. अथवा रेडियो से चिपके थे। आर्मस्ट्रांग के कई वक्तव्य आज भी जन-जन की जुबान पर हैं… मसलन – ‘ह्यूस्टन, ये ट्रांक्विलिटी बेस है, ईगल उतर चुका है’; ‘मेरा यह छोटा-सा कदम पूरी मनुष्य जाति के लिए प्रगति की बड़ी छलांग है’, तथा ‘यहां चलने-फिरने में कोई दिक्कत नहीं’ आदि।
नील आर्मस्ट्रांग को दुनिया ने सिर्फ चंद्रपुरूष के रूप में ही नहीं, युगपुरुष के रूप में भी देखा-निहारा है। कुल 17 देशों ने उन्हें बड़े-बड़े सम्मान दिए मगर नील को घमंड ने छुआ तक नहीं। अपनी बहादुरी और उपलब्धियों के बारे में वे बस इतना कहते थे – “मैं लकी रहा हूं।”
बज़ एल्ड्रिन – चांद पर दूसरा कदम
पृथ्वी से चार लाख किलोमीटर दूर पहुंच कर चंद्रमा पर चहलकदमी करने वाले दूसरे इंसान थे बज़ एल्ड्रिन। नील आर्मस्ट्रांग के 19 मिनट बाद चाँद पर कदम रखने वाले एल्ड्रिन ही सचमुच ‘ईगल’ के पायलट थे, और जाहिर है कि नील की तरह उन्होंने भी यमराज का सामना किया।
बज़ एल्ड्रिन का जन्म अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के मोंटक्लैयर स्थान पर हुआ, दिन था 20 जनवरी 1930! ऐस्ट्रोनाॅमिक्स में पी.एच.डी. करने के बाद जब 1963 में उन्होंने नासा ज्वाइन की, तो उनके मित्रों ने भविष्यवाणी कर दी थी कि एल्ड्रिन चंद्रमा पर अवश्य उतरेंगे।
इसका पहला कारण तो यह है कि एल्ड्रिन की मां का नाम है मैरियन मून, तो मून का बेटा मूनमैन बने ऐसा तो स्वाभाविक ही माना जाएगा न? दूसरा कारण – एल्ड्रिन के पिता महान रॉकेट वैज्ञानिक रॉबर्ट गोडार्ड के शिष्य रहे।
11 नवंबर, 1966 को जब जेमिनी-12 अंतरिक्षयान में बज़ उड़े और जितनी सुगमता से उन्होंने बाहर निकल अंतरिक्ष की सैर कर दिखाई, तभी से उनका मूनमैन बनना समझो पक्का हो गया। सच पूछिए तो जेमिनी कार्यक्रम के इस अंतिम अंतरिक्षयान की सफलता का मुख्य श्रेय एल्ड्रिन की सूझबूझ और व्यवहारकुशलता को ही दिया गया है।
कैपकॉम (पृथ्वी पर ह्यूस्टन में मौजूद कैप्सूल कम्युनिकेटर) ने जब आर्मस्ट्रांग तथा एल्ड्रिन को चंद्रतल की विशेषताएं बताने को कहा तो एल्ड्रिन के शब्द ज्यादा काव्यमय थे। एल्ड्रिन ने कहा था – “ये दृश्य अति सुंदर, अति मनोरम हैं। दूर-दूर तक अतुलनीय स्तब्धता छाई है!”
माइकल कोलिन्स – कमांड मॉड्यूल के नियंत्रक
माइकल चंद्रमा पर नहीं उतरे, moon knight बल्कि चंद्रमा की परिक्रमा करते रहने वाले कमांड माॅडयूल ‘कोलंबिया’moon knight का सफल संचालन करते रहे। इस बीच माइकल ने moon knight कैपकॉम के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और महत्व की जरूरी सूचनाएं आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन तक पहुंचाते रहे।
दो घंटे के मूनवॉक के बाद जब आर्मस्ट्रांग तथा एल्ड्रिन moon knight थक कर पाँच घंटे सोते रहे, चंद्रमा के 60 मील ऊपर चंद्र-परिक्रमा करते प्रहरी moon knight माइकल कोलिन्स सतर्क और जागरूक रहे। फिर चंद्र अनवेशेषण के बाद ‘ईगल’ moon knight के साथ सफल डाॅकिंग कर आर्मस्ट्रांग तथा एल्ड्रिन को कोलंबिया द्वारा पृथ्वी पर सुरक्षित वापस ले आए!
कोलिन्स इटली के रोम शहर में 31 अक्टूबर, moon knight 1930 को जन्मे, मगर उनकी शिक्षा-दीक्षा अमेरिका में ही हुई। विज्ञान में 1952 में स्नातक की डिग्री लेने के बाद वे एयरफोर्स में आए, फिर नासा में प्रवेश किया।
कोलिन्स ने अपोलो-11 के अपने chand sign शानदार काम से chand sign पहले जेमिनी-10 अंतरिक्षयान में भी उड़ान chand sign भरी और chand sign अपनी अंतरिक्ष-कुशलता और प्रवीणता का परिचय दिया। chand sign नासा से रिटायर होने के बाद वे वाशिंगटन स्थित ‘नेशनल एयर एण्ड स्पेस म्यूजियम’ के chand sign डायरेक्टर के soleil moon frye पद पर शानदार काम करते रहे।
आर्मस्ट्रांग, एल्ड्रिन और कोलिन्स chand sign का नाम आज soleil moon frye भी जन-जन की जुबान पर है, soleil moon frye क्योंकि दुनिया जानती है soleil moon frye कि उन्होंने अपनी जान chand sign की बाजी लगाकर चंद्रान्वेषण जैसी अनोखी कल्पना को साकार कर दिखाया। soleil moon frye
स चंद्रान्वेषण को ‘Moonshot’ chand पुस्तक के लेखकों, chand एलन शेपर्ड, डेके स्लेटन तथा जे बारब्री ने इन शब्दों में chand बयान किया chand है – chand “उनका हर कदम एक chand नया प्रयोग था; उनकी हर हलचल अपने आप में एक chand अन्वेषण थी; उनका मुड़ना-चलना-फिरना, कम गुरूत्व में उछलना-कूदना chand हर काम अपूर्व एडवेंचर से सराबोर था!”
अंतरिक्ष में जाने वाला पहला व्यक्ति कौन था? जानेमनुष्य के लिए अंतरिक्ष हमेशा से ही जिज्ञासा का विषय रहा है। उसकी इच्छा धरती की सीमा से बाहर जाकर चांद, तारों और ग्रहों का अध्ययन करने की रही हैं। मनुष्य की उस शताब्दियों पुरानी इच्छा first man in space को आज से 60 वर्ष पूर्व एक व्यक्ति ने अंतरिक्ष में जाकर पूरा किया। लेकिन क्या आपको मालूम है antriksh mein jane wala pehla vyakti कौन था? तो बता दे, वो व्यक्ति था रूस का वायु सेना का पायलट यूरी गगारिन (Yuri Gagarin)। गगारिन ने ही 12 अप्रैल, 1961 को अंतरिक्ष में जाकर मनुष्य के वर्षों पुराने अंतरिक्ष-यात्रा के सपने को पूरा किया था।
यूरी गगारिन का जन्म वर्ष 1934 में हुआ था और जब उन्हें 1960 में अंतरिक्ष में जाने के लिए चुना गया तब वे मात्र 27 साल के थे।
उन्होंने वोस्तोक-1 अंतरिक्षयान द्वारा सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर रूस के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से अपनी यात्रा शुरू कि तथा अंतरिक्ष में 1 घंटे 48 मिनट बिताने के बाद 8 बजकर 5 मिनट पर धरती पर वापस आ गए। इस दौरान उन्होंने 327 किलोमीटर ऊपर से धरती की एक पूरी परिक्रमा भी की।
Q2. यूरी गगारिन अंतरिक्ष में जाने वाले पहले इंसान थे; लेकिन अंतरिक्ष में जाने वाला पहला जानवर कौन-सा था?
उत्तरः गगारिन से भी पहले रूस के अंतरिक्ष विज्ञानीयों ने एक कुत्ते ‘लाइका’ (Laika) को अंतरिक्ष में भेजा था। यह अंतरिक्ष में जाने वाला पहला जानवर था। उसे 3 नवंबर, 1957 को अंतरिक्षयान स्पुतनिक-2 द्वारा जीवों पर माइक्रोग्रैविटी के कारण पड़ने वाले प्रभावों को जानने के लिए भेजा गया था। हालांकि, अंतरिक्षयान के लाॅन्च होने के कुछ घंटों बाद ही पृथ्वी की कक्षा में लाइका की मृत्यु हो गई थी।
Q3. पहली महिला अंतरिक्ष-यात्री कौन थी?
उत्तरः प्रथम महिला अंतरिक्ष-यात्री रूस की वैलेंटीना तेरेश्कोवा (Valentina Tereshkova) थी। ये प्रथम महिला अंतरिक्ष-यात्री के साथ-साथ सबसे कम उम्र की महिला अंतरिक्ष-यात्री भी थी। ये वोस्तोक-6 अंतरिक्षयान द्वारा 16 जून, 1963 को अंतरिक्ष में गयी थी। ये अंतरिक्ष में लगभग तीन दिनों तक रही और इस दरम्यान उन्होंने धरती की 48 बार परिक्रमा की।
Q4. प्रथम भारतीय अंतरिक्ष-यात्री कौन थे?
उत्तरः प्रथम भारतीय अंतरिक्ष-यात्री विंग कमांडर राकेश शर्मा थे। राकेश शर्मा भारतीय वायु सेना के पायलट थे। वे 2 अप्रैल, 1984 को रूस के दो अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ सोयूज टी-11 स्पेसक्राफ्ट द्वारा अंतरिक्ष में गए थे। वे अंतरिक्ष में लगभग 7 दिन रहे तथा विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजमा दिया।
Q5. अंतरिक्ष में जाने वाले सबसे बुजुर्ग व्यक्ति का क्या नाम है?
उत्तरः अमेरिका के जॉन ग्लेन अंतरिक्ष में जाने वाले सबसे अधिक उम्र के व्यक्ति थे। वे 1998 में 77 वर्ष की उम्र में अंतरिक्ष में गये थे। अंतरिक्ष में जाने वाली सबसे वयोवृद्ध महिला अंतरिक्ष-यात्री अमेरिका की पैगी व्हिट्सन है, जो वर्ष 2016 में 57 वर्ष की उम्र में अंतरिक्ष में गई थी।
Q6. प्रथम भारतीय महिला अंतरिक्ष-यात्री कौन थी? और वह पहली बार अंतरिक्ष में कब गई थी?
उत्तरः अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला कल्पना चावला (Kalpana Chawla) थी और वे पहली बार अंतरिक्ष में नासा के एसटीएस-87 स्पेस शटल मिशन द्वारा पांच अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ 19 नवंबर, 1997 को अंतरिक्ष में गई थी। इस मिशन के दौरान वे अंतरिक्ष में लगभग 15 दिनों तक रही और 252 बार पृथ्वी की परिक्रमा की।
कल्पना चावला और एसटीएस-107 मिशन के अन्य 6 अंतरिक्ष-यात्री
कल्पना चावला दूसरी बार अंतरिक्ष में नासा के एसटीएस-107 स्पेस शटल मिशन द्वारा 6 अन्य अमेरिकी अंतरिक्षयात्रियों के साथ गई थी लेकिन सफलतापूर्वक मिशन समाप्त कर धरती पर वापसी के वक्त स्पेस शटल में आग लग जाने के कारण 1 फरवरी, 2003 को सातों अंतरिक्षयात्रियों की मृत्यु हो गई।
Q7. अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने वाले अंतरिक्ष-यात्री कौन है?
उत्तरः रूस के वायु सेना अधिकारी गेनाडी पडल्का (Gennady Padalka) अंतरिक्ष में सबसे अधिक दिनों रहने वाले अंतरिक्ष-यात्री है। ये पांच से अधिक अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान 879 दिनों तक अंतरिक्ष में रह चुके हैं।
रूसी अंतरिक्ष-यात्री वलेरी पाॅलाकोव (Valeri Polyakov) अंतरिक्ष में लगातार सबसे अधिक दिनों तक रहने वाले व्यक्ति है। ये जनवरी 1994 से मार्च 1995 तक लगातार 14 महीने तक अंतरिक्ष में रहे थे।
Q8. किस महिला अंतरिक्ष-यात्री के पास लगातार सबसे first man in space अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहने का विश्व रिकॉर्ड है?
उत्तरः अमेरिकी महिला अंतरिक्ष-यात्री first man in space क्रिस्टीना first man in outer space कोच (Christina Koch) के पास। first man in outer space क्रिस्टीना 14 मार्च, 2019 से लेकर 6 फरवरी, 2020 के बीच 328 दिनों तक first man in outer space अंतरिक्ष में रही। यह अभी तक किसी भी महिला first man in space अंतरिक्ष-यात्री द्वारा अंतरिक्ष में बिताया गया सबसे लंगा समय है।
Q9. अमेरिका के प्रथम अंतरिक्ष-यात्री कौन थे?
उत्तरः प्रथम अमेरिकी अंतरिक्ष-यात्री एलन शेपर्ड थे। first american man in space वे मरकरी अंतरिक्षयान द्वारा 5 मई, 1961 को first american man in space अंतरिक्ष गये थे तथा मात्र 15 मिनट अंतरिक्ष में first american man in space बिताकर पृथ्वी पर वापस आ गए थे। शेपर्ड वर्ष 1971 में first american man in space अपोलो-14 मिशन के दौरान दो अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ चंद्रमा पर भी गये थे।
अमेरिका की पहली महिला अंतरिक्ष-यात्री सैली राइड (Sally Ride) थी, जो 18 जून, 1983 को स्पेस शटल द्वारा अंतरिक्ष में गई थी।
Q10. भारतीय मूल की दूसरी महिला अंतरिक्ष-यात्री कौन है?
उत्तरः सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की दूसरी महिला अंतरिक्ष-यात्री है। उनकी अंतरिक्ष यात्रा 9 दिसंबर, 2006 को शुरू हुई तथा 194 दिनों बाद, 22 जून, 2007 को वे धरती पर वापस आ गई।
दुनिया का सबसे बड़ा जानवर कौन-सा है? जानेधरती ऐसे लाखों तरह के जीवों का घर हैं, जो आकार, रहने के स्थान, रंग-रूप एवं स्वभाव में अलग-अलग है। biggest bird लेकिन क्या आपको पता है, दुनिया का sabse bada janwar kaun sa hai? तो बता दे, दुनिया का सबसे विशाल जानवर ‘नीली व्हेल‘ (Blue Whale) को माना जाता है। विश्व में सबसे लंबा और वजनदार प्राणी नीली व्हेल ही है। इसकी लंबाई लगभग 32 मीटर और वजन 200 टन तक होता है।मार्कशीट लोन क्या है और कैसे मिलेगा Marksheet Loan in Hindi(Opens in a new browser tab)
ज्यादातर लोग नीली व्हेल को मछली की एक प्रजाति समझते है, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि समुद्र में रहने वाला यह जीव मछली नहीं बल्कि एक स्तनधारी जीव यानी mammal है; जिसकी मादा अंडे न देकर सीधा बच्चे पैदा करती है तथा उन्हें अपना दूध भी पिलाती है।
नीली व्हेल को मछली इसलिए भी नहीं माना जाता है क्योंकि इसमें मछलियों की भांति गिल्स नहीं होते। यह हमारी ही तरह फेफड़ों से सांस लेती है। इसके सिर के आगे के हिस्से में नथुने होते हैं। जब ये पानी के अंदर होती है तो नथुने बंद रहते हैं। इसे सांस लेने के लिए हर 5-10 मिनट में पानी के ऊपर आना पड़ता है। The Wright Brothers Kaun hai? First Airplane Kisne Banaya?(Opens in a new browser tab)
नीली व्हेल से जुड़े 10 आश्चर्यजनक एवं महत्वपूर्ण तथ्य
नीली व्हेल की तुलना अगर विशाल अफ्रीकी हाथी से कि जाए तो यह 5 अफ्रीकी हाथियों जितना लंबा और 40 अफ्रीकी हाथियों जितना भारी होगा।
दुनिया के सभी महासागरों में पाए जाने वाले ब्लू व्हेल विश्व के सबसे बड़े प्रवासी जानवर भी हैं। ये हर वर्ष सर्दीयों में हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्थित महासागरों में प्रजनन करने के लिए चले जाते हैं तथा गर्मियों में पुनः अत्यंत ठंडे धुव्रीय महासागरों में लौट जाते हैं।
अपने विशाल आकार के बावजूद नीली व्हेल महासागरों में पाये जाने वाले केकड़े जैसे छोटे जीव ‘क्रिल’ को खाती हैं। वर्ष के कुछ निश्चित दिनों में एक व्यस्क ब्लू व्हेल लगभग 4 टन क्रिल प्रतिदिन खा लेती हैं।
इस विशाल जानवर का जीभ पृथ्वी पर मौजूद किसी भी जानवर की जीभ की तुलना में भारी होता है। इसके जीभ का वजन लगभग 4 टन यानी 3,600 किलोग्राम तक होता है।
बड़े शरीर के कारण ब्लू व्हेल को ज्यादा ऑक्सीजन की भी जरूरत होती है। इसलिए इसके फेफड़ें भी बहुत बड़े होते हैं, जिनकी क्षमता लगभग 5000 लीटर होती है।
ब्लू व्हेल का दिल सभी जानवरों में सबसे बड़ा होता है। इसका दिल एक कार जितना बड़ा होता है तथा वजन लगभग 680 किलोग्राम। हालांकि ये किसी भी स्तनपायी जानवर की दिल की तुलना में बहुत धीरे धड़कता है, एक मिनट में केवल 4 से 8 बार!
ब्लू व्हेल पानी के अंदर बिना सांस लिए लगभग 1 घंटे तक रह सकती है।
इसका दिमाग शरीर के अनुपात में बहुत छोटा होता है। जिसका वजन केवल 6 किलोग्राम होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मनुष्य के दिमाग का वजन 1.4 किलोग्राम होता है।
नीली व्हेल दुनिया के सबसे तेज आवाज निकालने वाले जानवरों में से एक हैं। ये एक विशेष प्रकार की आवाज निकलती है, जिसे लगभग 1600 किलोमीटर दूर स्थित अन्य व्हेलें भी सुन लेती हैं।
जन्म के समय नीली व्हेल की बच्चे की लंबाई 8 मीटर तथा वजन लगभग 4000 किलोग्राम होता है। यह पहले साल सिर्फ अपनी माँ का वासायुक्त दुध (fatty milk) पीता है, जिससे प्रतिदिन बच्चे का वजन लगभग 90 किलोग्राम बढ़ता जाता है!
उत्तरः नीली व्हेल की औसत आयु 80 से 90 वर्ष है, लेकिन कई ब्लू व्हेल 110 वर्ष की आयु तक भी जीवित रहती है।
Q4. पानी में ब्लू व्हेल की तैरने sabse bada janwar की रफ्तार कितनी sabse bada janwar होती है?
उत्तरः नीली व्हेल पानी में सामान्य sabse bada janwar रूप से 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तैरती है, लेकिन किसी प्रकार का खतरा महसूस होने पर या उत्तेजित होने पर ये लगभग 32 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी तैर सकती है।
Q5. ब्लू व्हेल का संबंध व्हेल की biggest bird of prey किस प्रजाति से है?
उत्तरः बैलीन व्हेल (Baleen whale) से, biggest bird of prey यह व्हेल की ऐसी biggest bird प्रजाति है जिसके मुंह में the biggest bird in the world दांत नहीं होते। biggest bird of prey दांत के स्थान पर इनके मुंह में biggest bird नाखूनों जैसा एक the biggest bird in the world जालीदार प्लेट the biggest bird in the world होता है। biggest bird of prey जिसकी मदद से ये भोजन को निगलने समय पानी से अलग the biggest bird in the world कर देती है।
Q6. ब्लू व्हेल को और biggest bird किस biggest bird नाम से जाना जाता है?
दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी कौन-सा है? जानेपक्षी रीढ़ की हड्डी वाले ऐसे जीव है जिनके पंख होते है। ये पंखों को फड़फड़ाने के लिए अपनी मजबूत मांसपेशियों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि पक्षियों की कुछ ऐसी प्रजातियां हैं जिनका आकार बहुत बड़ा होता है largest bird in the world लेकिन उनके पंख इतने शक्तिशाली नहीं होते की वे उड़ पाये। क्या आपको मालूम है, Duniya ka sabse bada pakshi kaun sa hai? तो बता दे, दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी शुतुरमुर्ग (Ostrich) है। यह 2 से 3 मीटर लंबा तथा 100 से 150 किलोग्राम तक वजनी होता है।Duniya Me Sabse Jahrila Saap Kaunsa Hai?(Opens in a new browser tab)
नर शुतुरमुर्ग अपेक्षाकृत बड़ा होता है तथा उसका रंग काला होता है जिस पर सफेद रंग के पंख व पूँछ होती है। मादा आकार में छोटी होती है तथा उसका रंग भूरा होता है। एक नर शुतुरमुर्ग के साथ दो मादा शुतुरमुर्गों का जोड़ा बन सकता है।
यह विशालकाय पक्षी शाकाहारी होता है जो लगभग 80 किमी. प्रति घंटा की गति से भाग सकता है। शुतुरमुर्ग के संबंध में प्रचलित यह कहानी बिल्कुल गलत है कि भयभीत होकर यह अपना सिर रेत में छिपा लेता है। वास्तव में यह बहुत बहादुर पक्षी है तथा खतरे का डट कर मुकाबला करता है और दुश्मन पर आक्रमण करके उसे भगा देता है।
शुतुरमुर्ग कठोर परिस्थितियों को सहन कर सकता है तथा 2 से 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में रह सकता है। यह लगभग 30-40 वर्ष तक जीवित रहता है तथा लगभग 30 वर्षों तक प्रजनन कर सकता है।
शुतुरमुर्ग का अंडा हल्का पीला रंग लिये सफेद होता है, जिसका भार लगभग 1.5 किलोग्राम (लगभग 24 मुर्गी के अंडों के बराबर) होता है। इसके अंडे को दुनिया की सबसे बड़ी कोशिका माना जाता है। मादा शुतुरमुर्ग एक वर्ष में लगभग 50 अंडे देती है। वैसे सभी अण्डों से बच्चे नहीं निकलते हैं।
जंगलों में बहुत सी मादायें एक साथ एक ही घोंसले में अपने अंडे देती हैं जिन्हें दिन के समय मादा तथा रात के समय नर सेता है। शुतुरमुर्ग के अंडों को उबालने में 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता है। इसके एक आमलेट से 8-10 लोगों का नाश्ता हो जाता है।
Q2. शुतुरमुर्ग के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी कौन-सा है?
उत्तरः शुतुरमुर्ग के बाद एमू (Emu) दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी है। यह भी शुतुरमुर्ग की तरह रैटाइट प्रजाति का ही पक्षी है और मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह 1.50-1.88 मीटर तक लंबा तथा 30-45 किलोग्राम तक वजनी होता है।
Emu – दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी
ऐमू के बच्चे के शरीर पर सफेद भूरी धारियां होती हैं। लेकिन ऐमू जब युवा होता है तो उसकी धारियां समाप्त हो जाती हैं और पंखों का रंग भूरा हो जाता है। इसकी गर्दन नीली-सफेद तथा बगैर बालों की होती है।
नर तथा मादा ऐमू देखने में एक जैसे लगते हैं तथा उनमें भेद कर पाना अत्यंत कठिन होता है। मादा ऐमू एक वर्ष में लगभग 25 अंडे देती है, जिसका भार 500 ग्राम से लेकर 800 ग्राम तक होता है। अंडों का रंग चमकदार गहरा हरा होता है। इनका अंडा देखने में अति सुंदर होता है जिसके छिलके पर कलात्मक व सजावटी चित्रकारी भी की जाती है। आकार तथा भार में ऐमू का एक अंडा मुर्गी के लगभग 14 अंडों के बराबर होता है।
Q3. दुनिया का सबसे छोटा पक्षी कौन-सा है?
उत्तरः विश्व का सबसे छोटा पक्षी बी हमिंगबर्ड (Bee hummingbird) है। इसकी लंबाई मात्र 57 मिलीमीटर होती है तथा वजन मात्र 1.6 ग्राम। यह सिर्फ कैरिबियाई सागर में स्थित देश क्यूबा में ही पाया जाता है। इसे जुनजुनसिटो और हेलेना हमिंगबर्ड भी कहा जाता है।
Q4. विश्व का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी कौन-सा है?
उत्तरः पेरेग्रीन फाल्कन दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी है। यह हवा में 385 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। यह सिर्फ अंटार्कटिका को छोड़ सभी महाद्वीपों में पाया जाता है। भारत में इसे घुमन्तु बाज तथा बिहिरी भी कहा जाता है।
Q5. दुनिया के सबसे largest bird of prey बड़े तैरने वाले largest bird of prey पक्षी का क्या नाम है?
उत्तरः सबसे बड़ा तैरने वाला पक्षी एम्परर largest bird of prey पेंगुइन (Emperor penguin) है। ये सिर्फ दक्षिणी ध्रुव के अंटार्कटिका महाद्वीप में पाया जाता है। एम्परर पेंगुइन सभी पेंगुइनों में सबसे बड़ा होता है, largest bird of prey जिसकी लंबाई 1.5 मीटर तक होती है। ये समुद्र में 500 मीटर तक गोता लगा सकता है तथा पानी में बिना सांसl argest bird of prey लिए 22 मिनट तक रह सकता है।
Q6. भारत का सबसे बड़ा पक्षी कौन-सा है?
उत्तरः द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian bustard) भारत का सबसे बड़ा पक्षी है। यह 1 मीटर तक लंबा तथा 15 किलोग्राम तक वजनी होता है। यह दुनिया के उड़ने वाले सबसे भारी पक्षियों में से एक है। यह भारत के राजस्थान राज्य का राज्य पक्षी भी है। इसे भारत में सोहन चिड़िया, गोडावण, तूंगदार, गगन भेड़, गुरहना, गुराइन आदि नामों से जाना जाता है।
Q7. सबसे अधिक ऊंचाई पर उड़ने वाला पक्षी का नाम क्या है?
उत्तरः रूपेल का ग्रिफ़ाॅन गिद्ध largest bird sanctuary in india (Rüppell’s Griffon Vulture) सबसे अधिक largest bird sanctuary in india ऊंचाई पर largest bird sanctuary in india उड़ने वाला पक्षी है। largest bird sanctuary in india मध्य अफ्रीका में पाया जाना वाला यह गिद्ध 36,000-38,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है।
Q8. भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर (Indian peafowl) का वैज्ञानिक नाम क्या है और इसका संबंध पक्षियों के किस परिवार से है?
उत्तरः मोर का वैज्ञानिक largest flying bird नाम पावो क्रिस्टेटस (Pavo cristatus) है तथा इसका संबंध पक्षियों के फासिंडी (Phasianidae) परिवार largest flying bird से है।
Q9. किस पक्षी की आंखें largest flying bird सभी स्थलीय जीवों largest bird in the world में सबसे बड़ी होती है?
उत्तरः शुतुरमुर्ग की, largest flying bird जी हाँ! largest bird in the world शुतुरमुर्ग की largest bird in the world आंखें जमीन पर रहने वाले सभी largest flying bird जीवों में सबसे बड़ी होती हैं। largest bird in the world इनके आंखों का आकार छोटे बिलियर्ड गेंद जितना होता हैं।
Q10. दुनियाभर में पक्षियों की कितनी प्रजातियां पाई जाती हैं?
सांप रेंगने वाले जीवों में सबसे खूबसूरत जीव है। indian cobra दुनिया के बर्फीले इलाकों को छोड़कर यह लगभग हर स्थान पर पाये जाते हैं। विश्व में सांपों की हजारों प्रजातियां हैं, जिनमें कुछ कम विषैले और कुछ अत्यधिक विषैले होते हैं। king cobra snake लेकिन क्या आप sabse jahrila saap konsa hai; ये जानते है? तो बता दे, इनलैंड ताइपन (Inland Taipan) दुनिया का सबसे जहरीला सांप है। इसका सिर्फ एक दंश इतना घातक होता है कि उससे लगभग 100 व्यक्तियों की मौत हो सकती हैं।Martin Cooper Kaun Hai ? Phone Ki Khoj Kisne ki?(Opens in a new browser tab)
ज्यादातर सांपों के विपरीत इनलैंड ताइपन विशेषकर स्तनपायी जानवरों का शिकार करता हैं। जिस कारण इसका जहर विशेष रूप से गर्म खून वाली प्रजातियों के शिकार के अनुकूल हो गया हैं। इसका दंश इतना जानलेवा होता है कि अगर इसके द्वारा काटे गये व्यक्ति का उपचार तुरंत नहीं किया जाता तो उसकी मृत्यु 35-45 मिनट के अंदर हो जाती है।Business Ke Liye Loan Apply Kaise Kare in Hindi(Opens in a new browser tab)
सामान्य रूप से यह अन्य विषैले सांपों से थोड़ा शर्मीला एवं शांत स्वभाव का है, जो ज्यादातर एकांत में रहता है तथा मुसीबत से बचकर भागने का प्रयास करता है। यह ऑस्ट्रेलिया के जंगली और दुर्गम स्थानों पर रहता है। इसलिए इसका संपर्क लोगों से कभी-कभी ही होता है और जिस कारण विश्वभर में इसके काटने से मरने वाले लोगों की संख्या न के बराबर हैं।
Q2. दुनिया में किस सांप के काटने से सबसे ज्यादा लोगों की मौत होती हैं?
उत्तरः सॉ-स्केल्ड वाइपर (Saw-scaled viper) सांप के काटने से विश्व में हर साल सबसे अधिक लोगों की मौत होती हैं। साॅ-स्केल्ड वाइपर को भारत में ‘अफई’ कहा जाता है।
पूरे विश्व में प्रतिवर्ष स्केल्ड वाइपर तथा अन्य सांपों के काटने से लगभग 80,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती हैं। इसमें 70% से ज्यादा मृत्यु दक्षिण एशिया के देशों – श्रीलंका, भारत, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान में होती है।
भारत में सबसे अधिक ‘करैत’ सांप के काटने से लोगों की मौत होती हैं। भारत में हर साल 45,000 हजार लोग सांप काटने से मर जाते हैं।
Q3. क्या सभी सांप विषैले होते है?
उत्तरः नहीं, दुनिया के सभी सांप विषैले नहीं होते। पूरे विश्व में सांपों की लगभग 3600 प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन इनमें मात्र 16% यानी लगभग 600 प्रजातियां ही जहरीली होती हैं। इन 600 प्रजातियों में भी सिर्फ 200 प्रजातियों के सांप ही अत्यधिक जहरीले होते हैं।
Q4. सांपों के कान नहीं होते; तो फिर वे बीन की धुन पर कैसे नाचते हैं?
उत्तरः हाँ, अन्य जानवरों की तरह सांपों के बाहरी कान नहीं होते; लेकिन उनकी आंखों के ठीक पीछे दो आंतरिक कान जरूर होते है। जिनसे वे हवा या धरती में उत्पनन हुए कंपन को महसूस कर सकते है।
सपेरा जब बीन बजाता है और सांप बीन के साथ हिलते हैं तो लोग बेवजह ही यह समझ लेते हैं कि वे बीन की धुन पर नाच रहे हैं। मगर यह धारणा गलत है। सपेरे के बीन और सांपों के हिलने-डुलने के बीच केवल इतना संबंध है कि सांप सपेरे की बीन से भयभीत रहते हैं और जैसे बीन हिलता है वो उस पर कड़ी नजर रखे हुये हिलते रहते हैं।
Q5. विष का निर्माण सांप के किस अंग में होता है?
उत्तरः सांप का विष सांप के आंखों के पीछे ऊपरी जबड़े में स्थित विषग्रंथियों (Venom Glands) में तैयार होता हैं। ये विषग्रंथियां प्राणियों में पायी जाने वाली लार ग्रंथियों का ही परिवर्ति रूप होती हैं। विषग्रंथियों का विष विष-नली से होता हुआ सांप के खोखले दांतों में पहुंचता हैं।
Q6. सांप का विष किन चीजों से मिलकर बना होता हैं?
उत्तरः सांपों का विष मुख्य रूप से प्रोटीन, एंजाइम और अन्य आणविक पदार्थों से मिलकर बना होता है। यह हल्का पीला या हरे रंग का होता है। यह बिना स्वाद और बिना गंध वाला चिपचिपा पदार्थ है। इनके विष में साइटोलाइसिन, कोगुलिन, प्रोटीयोलाइसिन, कार्डियोलिपिन, न्यूक्लीयोटाइडेज, थ्राम्बोकाइजेन जैसे जहरीले पदार्थ मौजूद होते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सांपों का विष एक बढ़िया पाचक रस का काम करता है। यदि आपके मुंह या आहार नली में कहीं कोई खरोंच या चोट नहीं है तो यह आसानी से पचकर बाहर निकल जायेगा। यह जानलेवा तभी बनता है जब खून से इसका सम्पर्क स्थापित होता है।
Q7. सांप की ऐसी कौन-सी प्रजाति है जो अंडे न देकर सीधा बच्चों को जन्म देती हैं?
उत्तरः विविपरस और ओवोविविपरस (Viviparous and Ovoviviparous) प्रजाति के सांप ज्यादातर सांपों के विपरीत अंडे नहीं देते बल्कि बच्चों को जन्म देते हैं। इस प्रजाति के कुछ सांपों के उदाहरण हैं – रैटलस्नेक, बाॅल पाइथन, एनाकोंडा, ग्रीन एनाकोंडा आदि।
Q8. सांप का विष कितने प्रकार का होता है?
उत्तरः सांपों का विष मुख्यतः दो प्रकार का होता है-
हिमोटाॅक्सिन (Hemotoxins) : जो रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है। जैसे वाइपर सांप का विष।
न्यूरोटॉक्सिन (Neurotoxins) : danger snake यह विष तंत्रिका कोशिकाओं danger snake यानी को नष्ट करता है, danger snake जिससे शिकार को लकवा मार जाता है। danger snake जैसे – नाग, danger snake करैत तथा danger snake समुद्री सांपों का विष। शरीर में काटे हुये स्थान पर विषदंतों के निशान बन जाते danger snake हैं जिन्हें फैंग मार्क कहते हैं।
Q9. सांप के डर या भय को क्या कहते है?
उत्तरः सर्पभीति यानी ओफिडीवोफोबिया या ओफियोफोबिया (Ophidiophobia or ophiophobia)
Q10. सांप अपनी केंचुली क्यों बदलते हैं?
उत्तरः क्योंकि पूरे उम्र सांप का शरीर बढ़ता रहता है। जिस कारण उनकी त्वचा छोटी पड़ने लगती है और उन्हें उसे एक निश्चित समय के बाद छोड़ते रहना जरूरी होता है।
Q11. भारत के 4 सबसे खतरनाक सांप कौन-से है; जिनके काटने से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं?
उत्तरः भारत के चार सबसे खतरनाक सांप जिन्हें ‘Big Four’ भी कहा जाता है, ये हैं-
नाग (Indian Cobra) : फन वाले नाग को सभी जानते हैं। यह लोकप्रिय है। जब ये क्रोध में होता है तो अपनी गर्दन को उठाकर लचीली मांसपेशियों को फन के रूप में फैला लेता है। नाग वास्तव में नाग परिवार का नहीं होता है। उसका यह नाम उसके नाग की तरह फन फैलाने के कारण ही रखा गया है।
करैत (Common krait) : करैत के काले भूरे शरीर पर सफेद रंग की क्षैतिज पट्टियां होती हैं। इनका सिर छोटा और शरीर की लंबाई एक मीटर तक होती है। करैत बिग फोर का सबसे जहरीला सदस्य है। इसका विष नाग के विष से भी दस गुना तेज होता है।
सॉ-स्केल्ड वाइपर (Indian Saw-scaled viper): स्केल्ड वाइपर की आंख और नाक के बीच में दोनों तरफ हलके गड्ढे होते हैं।
रसैल वाइपर (Russell’s viper) : रसैल वाइपर लगभग डेढ़ मीटर लंबा होता है। इसका सिर तिकोना और चपटा होता है। शरीर पर काले रंग के बड़े-बड़े छल्लों की तीन कतारें होती हैं। यह हमला करते समय तेज फुफकार मारता है।
Q12. जो सांप दूसरे सांपों को sea snake खाते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?
उत्तरः उन्हें ओपिओफैजिक स्नेक sea snake (ophiophagic snake) कहा जाता है। ओपिओफैजिक स्नेक के उदाहरण – किंगस्नेक, किंग कोबरा, रेसर स्नेक, ईस्टर्न इंडिगो स्नेक आदि।
Q13. सबसे tiger snake तेज रफ्तार tiger snake से sea snake हमला करना king cobra snake वाला सांप कौन-सा है?
उत्तरः डेथ ऐडर (Death Adder) sea snake दुनिया king cobra snake का tiger snake सबसे तेज tiger snake हमला करना वाला सांप है। sea snake यह मात्र 0.15 सेकंड में किसी king cobra snake पर हमला कर काट लेता है king cobra snake तथा फिर tiger snake हमला करने के लिए तैयार tiger snake हो जाता है। king cobra snake यह सिर्फ sea snake ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है sea snake तथा दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक है।
Q14. इतना छोटा मुंह होने पर भी सांप indian cobra अपने से कई गुना बड़े जानवर को कैसे निगल जाते हैं?
उत्तरः सांप की मुंह की हड्डियां tiger snake और indian cobra मांसपेशिया बेहद लचीली होती हैं इसलिए ये अपने मुंह के आकार से कई गुना बड़े indian cobra शिकार को भी गटक जाते हैं। indian cobra इनके दांत सिलाई मशीन के दांतों की तरह अन्दर को नुकीले होते हैं indian cobra जो शिकार को बाहर की ओर निकलने से रोकते हैं।
Q15. सांप काटने पर दी जाने वाली दवाओं को क्या कहा जाता हैं?
मार्टिन कूपर , बायने मार्टी कूपर , (जन्म 26 दिसंबर, 1928, शिकागो , इलिनोइस , यूएस), अमेरिकी इंजीनियर जिन्होंने 1972-73 में टीम का नेतृत्व किया थामोबाइल सेल फोन और पहला सेल फोन कॉल किया। उन्हें व्यापक रूप से सेलुलर फोन के पिता के रूप phone number founder में माना जाता है कूपर ने शिकागो में इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (1950) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की । martin cooper वह अमेरिकी नौसेना में शामिल हो गए और कोरियाई युद्ध के दौरान सेवा की । युद्ध के बाद, वह टेलेटाइप कॉर्पोरेशन में शामिल हो गए, और 1954 में उन्होंने काम करना शुरू कियामोटोरोला । उन्होंने IIT (1957) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। मोटोरोला में, कूपर ने वायरलेस संचार से जुड़ी कई परियोजनाओं पर काम किया , जैसे पहला रेडियो-नियंत्रित ट्रैफ़िक-लाइट सिस्टम, जिसे उन्होंने 1960 में पेटेंट कराया, और पहला हैंडहेल्ड पुलिस रेडियो, जिसे 1967 में पेश किया गया था। उन्होंने बाद में एक उपाध्यक्ष के रूप में काम किया। और कंपनी के लिए अनुसंधान और विकास (1978-83) के निदेशक।What is Ielts Paper & How Can I Improve My Score क्या है इलेट्स पेपर and मैं अपना स्कोर कैसे सुधार सकता हूं(Opens in a new browser tab)
द्वारा मोबाइल टेलीफोन पेश किए गए थे अमेरिकी टेलीफोन और टेलीग्राफ कंपनी (एटी एंड टी) 1946 में। हालांकि, किसी दिए गए क्षेत्र में केवल 11 या 12 चैनल उपलब्ध थे, इसलिए उपयोगकर्ताओं को अक्सर सिस्टम का उपयोग करने के लिए इंतजार करना पड़ता था। पहले मोबाइल फोन की एक और कमजोरी यह थी कि उन्हें चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आपूर्ति केवल कार बैटरी द्वारा की जा सकती थी । इस प्रकार, वास्तव में पोर्टेबल फोन नहीं थे, लेकिन केवल कार फोन थे।Thomas Edison Kon Hai(Opens in a new browser tab)
1947 में एटी एंड टी बेल लेबोरेटरीज के इंजीनियर डब्लू। राय। यंग और डगलस एच। रिंग ने दिखाया कि बड़े क्षेत्र को कई छोटी कोशिकाओं में तोड़कर अधिक मोबाइल उपयोगकर्ता जोड़े जा सकते हैं, लेकिन तब जरूरत से ज्यादा फ्रीक्वेंसी कवरेज की जरूरत थी। हालांकि, 1968 में यूएस फेडरल कम्युनिकेशंस कमिशन (FCC) ने एटी एंड टी से UHF (अल्ट्राहिग फ्रिक्वेंसी) टेलिविज़न बैंड के थोड़े-थोड़े हिस्से को काम में लेने की योजना के लिए कहा । एटी एंड टी ने अपनी कार-फोन सेवा का विस्तार करने के लिए एक सेलुलर वास्तुकला का प्रस्ताव रखा।
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मोटोरोला नहीं चाहता था कि AT & T का सेल फोन पर एकाधिकार हो और उसे अपने मोबाइल कारोबार के खत्म होने की आशंका हो। सेल फोन विकसित करने के लिए तत्काल परियोजना के प्रभारी कूपर को रखा गया था। उसने सोचा कि सेल फोन को कार तक जंजीर नहीं बनाया जाना चाहिए बल्कि पोर्टेबल होना चाहिए। परिणाम,डायनाटैक (डायनेमिक एडेप्टिव टोटल एरिया कवरेज) फोन, 23 सेमी (9 इंच) लंबा और वजन 1.1 किलोग्राम (2.5 इंच) था। इसकी बैटरी नीचे गिरने से पहले 35 मिनट की बात की अनुमति दी।
3 अप्रैल, 1973 को कूपर ने न्यूयॉर्क शहर में एक संवाददाता सम्मेलन में DynaTAC फोन पेश किया । यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले काम करता है, उसने पहले सार्वजनिक सेल फोन कॉल को इंजीनियर जोएल एंगेल, एटी एंड टी के प्रतिद्वंद्वी परियोजना के प्रमुख के पास रखा, और कहा कि वह पोर्टेबल सेलुलर फोन से कॉल कर रहा है।
1983 में, आगे के विकास के वर्षों के बाद, मोटोरोला ने उपभोक्ताओं के लिए पहला पोर्टेबल सेल फोन, DynaTAC 8000x पेश किया। $ 3,995 की कीमत के बावजूद, फोन एक सफलता थी। उसी वर्ष, कूपर ने मोटोरोला को छोड़ दिया और सेलुलर बिजनेस सिस्टम्स, इंक। (CBSI) की स्थापना की, जो बिलिंग सेलुलर फोन सेवाओं में अग्रणी कंपनी बन गई। 1986 में उन्होंने और उनके सहयोगियों ने CBSI को सिनसिनाटी बेल को $ 23 मिलियन में बेच दिया, और उन्होंने और उनकी पत्नी, अर्लेन हैरिस ने Dyna, LLC की स्थापना की। डायना ने एक केंद्रीय संगठन के रूप में सेवा की, जहां से उन्होंने अन्य कंपनियों को लॉन्च किया, जैसे कि ArrayComm (1996), जिसने वायरलेस सिस्टम के लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया , और GreatCall (2006), जिसने जिटरबग के लिए वायरलेस सेवा प्रदान की, जो साधारण सुविधाओं के लिए एक सेल फोन था। बुजुर्ग। कूपर ने चार्ल्स स्टार्क ड्रेपर पुरस्कार प्राप्त किया 2013 में नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग से।
दोस्तों, पूरा विश्व आज एक परिवार का रूप ग्रहण कर चुका है और हालत यहां तक पहुंच गयी है कि कोई भी व्यक्ति विश्व के किसी भी हिस्से में स्थित दूसरे आदमी से पलभर में संपर्क कर सकता है। यह सब मुमकिन हुआ है मात्र एक उपकरण के आविष्कार के कारण और वो है ‘मोबाइल फोन’। कृषि क्रांति, औद्योगिक क्रांति से सूचना क्रांति के इस उपकरण ने मानव जीवन पर गहरा असर डाला है। लेकिन क्या आपको मालूम है पूरे विश्व को समीप ला देने वाले इस Mobile ka aviskar kisne kiya ? तो हम बता दे कि सर्वप्रथम इसको 3 अप्रैल 1973 को अमेरिकी इंजीनियर मार्टिन कूपर (Martin Cooper ) ने बनाया था।
यह पहला मोबाइल बहुराष्ट्रीय दूरसंचार कम्पनी ‘Motorola’ का था। 1970 में वे इसी कंपनी में एक इंजीनियर के रूप में पदभार संभाल बेतार संचार-व्यवस्था (wireless communication) के उपकरणों को बनाने का प्रयास करने लगे, जिसके फलस्वरूप दुनिया के पहले मोबाइल फोन का आविष्कार हो सका।
विश्व के पहले मोबाइल फोन की कुछ विशेषताएं :
मार्टिन कूपर द्वारा बनाये गए पहले मोबाइल फोन का वजन लगभग 2 Kg था!
एक बार चार्ज होने के बाद उस मोबाइल से 30 मिनट तक बाते कि जा सकती थी लेकिन उसे दोबारा चार्ज करने में 10 घंटे का समय लगता था!
उस समय उसकी कीमत लगभग 2700 अमेरिकी डॉलर (2 लाख रूपए) थी।
1973 में उसे 0G (Zero Generation) मोबाइल फोन कहा जाता था।
पहले मोबाइल फोन के आविष्कार के 10 साल बाद वर्ष 1983 में मोटोरोला ने आम लोगों के लिए पहली बार मोबाइल बाजार में लाया जिसका नाम था – Motorola DynaTAC 8000X . एक बार चार्ज होने के बाद इससे 30 मिनट तक बाते हो सकती थी। इसमें 30 मोबाइल नंबर भी save किया जा सकता था और उस समय उसका मूल्य 3995 अमेरिकी डॉलर (₹ 295669) रखा गया था।
India में मोबाइल फोन कब आया?
भारत में मोबाइल फोन का आगमन दुनिया के पहले मोबाइल (DynaTAC 8000X) बनने के 12 साल बाद 31 जुलाई, 1995 को हुआ। मतलब आज से 23 वर्ष पहले। दूरसंचार सेवाओं के विस्तार के लिए भारत में 20 फरवरी, 1997 में ट्राई (Telecom Regulatory Authority of India) की स्थापना की गयी।
भारत में मोबाइल सेवा प्रारम्भ करने का प्रयास वर्ष 1994 के मध्य से ही भारत के उद्यमी भूपेन्द्र कुमार मोदी द्वारा किया जाने लगा था। उन्हीं की कंपनी ‘Modi Telstra’ ने देश में पहली बार मोबाइल सेवा का प्रारम्भ किया तथा पहला मोबाइल काॅल इसी कंपनी के नेटवर्क (जिसे मोबाइल नेट कहा जाता था) पर कोलकता से दिल्ली किया गया था। इसी कंपनी को आगे चलकर ‘Spice Mobiles’ के नाम से जाना गया।
वर्तमान में भारत तथा विश्व में कितने मोबाइल फोन यूजर्स है?
पिछले वर्ष (2018) के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में भारत में लगभग 1 अरब 5 करोड़ मोबाइल फोन यूजर्स हैं, जिसमें से लगभग 38 करोड़ 69 लाख 34 हजार स्मार्टफोन यूजर्स हैं।
वर्ष 2014 के बाद भारत में मोबाइल प्रयोग करने वाले लोगों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है। इस वर्ष (2018) तक भारत विश्व का दूसरा सबसे ज्यादा मोबाइल प्रयोग करने वाला तथा उत्पादन करने वाला देश बन गया है। वर्ष 2014 में 30 लाख मोबाइल फोन भारत में बनाये गए, जो वर्ष 2017 में बढ़कर 1.1 करोड़ तक पहुंच गया। वर्तमान में चीन मोबाइल प्रयोग तथा उत्पादन करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश है।
पूरे विश्व तथा अन्य देशों में मोबाइल फोन यूजर्स की संख्या :
S. No.
देश
यूजर्स की संख्या
1.
दुनिया में
457 करोड़
2.
चीन
115 करोड़
3.
अमेरिका
27 करोड़
4.
ब्राजील
13.92 करोड़
5.
रूस
10.43 करोड़
6.
इंडोनेशिया
17.4 करोड़
ये सारे आंकड़े वर्ष 2018 के हैं। Source : Statista
मोबाइल के रोचक एवं महत्वपूर्ण तथ्य (Facts of Mobile Phones)
दोस्तों, आपने Nokia 1100 मोबाइल कभी न कभी तो खरीदा ही होगा लेकिन क्या आपको मालूम है, यह अभी तक के इतिहास में सबसे ज्यादा बिकने वाला मोबाइल फोन तथा electrical gadgets है। पूरी दुनिया में इसके 25 करोड़ से ज्यादा सेट बिके थे और वो भी मात्र 5 वार्षों में!
वर्ष 1983 में जो पहला मोबाइल आम लोगों के लिए अमेरिकी बाजार में लाया गया था उस समय उसकी कीमत $4000 थी। मतलब आज के हिसाब से 296440 रूपए!
वर्ष 2012 में Apple कंपनी ने हर दिन 3,40,000 से ज्यादा iPhones बेचे थे, जिसका अर्थ हुआ हर सेकेंड 4 iPhone बिक रहे थे! और एक वर्ष में 12 करोड़ 41 लाख से ज्यादा।
2010 में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पाया था कि मोबाइल फोन पर हमारे घर के शौचालय के फ्लश हैंडल से 18 गुना अधिक कीटाणु होते हैं तथा उसकी सीट से मोबाइल 10 गुना अधिक गंदा होता है!
एक ऑनलाइन सर्वेक्षण कंपनी ‘App Annie’ के अनुसार भारत में हर रोज लोग 3 घंटे स्मार्टफोन पर बिताते हैं तथा स्मार्टफोन पर सबसे ज्यादा प्रयोग किये जाने वाले 5 प्रमुख एप – Whatsapp, Facebook, Facebook Messenger, Truecaller और SHAREit – हैं।
विश्व का पहला मोबाइल कॉल आज से 45 साल पहले (1973) स्वयं मोबाइल फोन के आविष्कारक मार्टिन कूपर द्वारा अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर से न्यू जर्सी में स्थित Bell Labs के मुख्यालय में किया गया था।
जापान में लगभग 90% से 95% तक मोबाइल फोन वाटरप्रूफ होते है। इसका मुख्य कारण है जापानी लोगों की आदत विशेषकर महिलाओं कि। जापानी महिलाएं अपने मोबाइल से इतनी जुड़ी हुई होती है कि शावर लेते समय भी वे अपना फोन अपने आस-पास ही रखती है। उनकी इसी आदत को देखते हुए जापान में हर मोबाइल manufacturing कंपनी को वाटरप्रूफ मोबाइल फोन तैयार करने होते हैं।
विश्व के पहले स्मार्टफोन को आज से 23 साल पहले वर्ष 1995 में आईबीएम तथा बेल साउथ सेलुलर कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया था। उसका नाम – सिमोन (Simon) रखा गया था और इसे पहली बार अमेरिके के Wireless World Conference में प्रदर्शित किया गया । यह पूरी तरह एक टच स्क्रीन फोन था, जिसकी कीमत उस समय $899 रखी गई थी। उससे आप फोन के अलावा ई-मेल तथा फैक्स कर सकते थे। उसमे नोट, कैलेंडर, कंटैक्ट बुक आदि की भी सुविधाएं थी।
uSwitch वेबसाइट के मुताबिक ब्रिटेन में हर साल लोग लगभग 1 लाख मोबाइल टॉयलेट में और 23,000 मोबाइल फोन बाथ टब में गिरा देते हैं!
मोबाइल फोन के आदि हो जाने वाले लोगों को एक बीमारी होती है जिसे ‘नोमोफोबिया‘ (Nomophobia) के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी में लोगों को बाहर जाते समय घर में फोन छूटने का डर, फोन आस-पास न होने पर बेचैनी, फोन खोने का डर आदि समस्याएं होती हैं। दुनिया भर में लगभग 2 अरब लोग इस बीमारी व फोबिया से पीड़ित हैं।
पूरी दुनिया में मोबाइल से भेजे जाने वाले 90% martin cooper टेक्स्ट मैसेज मात्र 3 मिनट के अंदर पढ़ लिये जाते हैं।
आप हर महीने कितना मोबाइल बिल भरते martin cooper है? ₹1000 या ₹2000… लेकिन क्या आपको पता है martin cooper दुनिया में अभी martin cooper तक का सबसे अधिक मोबाइल बिल ₹1,06,65,060 है। यह बिल वर्ष 2011 में एक अमेरिकी महिला सेलिना आरोन्स का था।
गिनीज वर्ल्ड martin cooper रिकॉर्ड्स के martin cooper मुताबिक Sonim XP3300 Force विश्व का सबसे मजबूत (toughest) martin cooper मोबाइल फोन है। martin cooper इसे 84 फीट ऊपर से गिराने पर भी न तो इसमें कोई खराबी आई न ही इसके कोई पार्ट्स टूटे!
विश्व के पहले कैमरे martin cooper फोन martin cooper का निर्माण martin cooper जापान के Sharp Corporation द्वारा नवंबर, 2000 में किया गया था। इस फोन का नाम Sharp J-SH04 था।
पिछले वर्ष (2017) पूरी दुनिया में लगभग 153.65 करोड़ मोबाइल फोन बिके। जिसमें सबसे अधिक हिस्सेदारी सैमसंग (32.12 करोड़) तथा एप्पल (21.49 करोड़) कंपनी की रही।
विश्व के सबसे कीमती मोबाइल फोन का क्या नाम है तथा यह किस कंपनी का है?
तो हम बता दे कि उस कीमती मोबाइल फोन का नाम है – फॉल्कन सुपरनोवा पिंक डायमंड आईफोन 6 । इसे वर्ष 2014 में एक अमेरिकी कंपनी ‘Falcon’ ने बनाया था और इसकी कीमत थी 3 अरब 24 करोड़ रूपए। इसके इतने महंगे होने का मुख्य कारण इस फोन के पिछले भाग में लगा गुलाबी रंग का हीरा है; जो विश्व के सबसे कीमती हीरों में से एक है।
इंडिया में 5g सर्विस कब लांच होगा?
वर्तमान में 5g सेवा विश्व स्तर virgin mobile founder पर martin cooper व्यावसायिक virgin mobile founder रूप में virgin mobile founder प्रयोग virgin mobile founder करने के लिए उपलब्ध नहीं है लेकिन, Ministry of Communications की योजना virgin mobile founder इसे जल्द से जल्द भारत में लाने की है।virgin mobile founder भारत में 5g सेवा वर्ष 2022 या 2023 तक शुरू होने कि संभावना है। देश में Reliance Jio और Samsung virgin mobile founder कंपनी साथ virgin mobile founder मिलकर अभी इस प्रौद्योगिकी को विकसित करने का प्रयास कर रही है।
अंत में एक और सवाल…
क्या आप बता सकते है कि Mobile तथा Wireless में क्या अंतर है?
मोबाइल और वायरलेस ये दोनों शब्द एक प्रकार से समान दिखते हुए भी समान नहीं हैं। मुख्य अन्तर इन दोनों के कार्य करने की प्रणाली, व दोनों के अलग-अलग फायदे का है।
मोबाइल की विशेषता यह है कि वह घर, phone number founder दफ्तर, शहर या शहर के बाहर कहीं भी दूर सुनसान जगह आदि में भी कार्य कर सकता है। phone number founder जहां चाहे वहां कार्य करने की प्रणाली उपलब्ध है। phone number founder किसी भी जगह से हम मोबाइल का उपयोग कर सकते हैं, phone number founder जबकि वायरलेस/वायरलेस लैन (Local Network) का मतलब है phone number founder कि दो भिन्न प्रकार phone number founder के यंत्रों आदि को बिना तार के जोड़ना व उसी प्रकार सामान्य रूप से कार्य करना जैसे कि तारों को जोड़ कर किया जाता हैं।
मोबाइल का मतलब है कि आप अपना कार्य phone number founder जहां चाहे ले जा सकते हैं, phone number founder चाहे आप घर में हों, founder insurance phone number हवाई जहाज में बैठे हों, होटल में हों, phone number founder चाहें कहीं दूर, founder insurance phone number आप इसके founder insurance phone number फायदे वहां बैठ कर उठा सकते हैं, चाहे आपको founder insurance phone number बात करनी हो founder insurance phone number या अपने मोबाइल को कंप्यूटर से जोड़कर कोई नई फाइल या फोल्डर खोलना हो या फिर कुछ आंकड़ों founder insurance phone number का आदान-प्रदान करना हो या ई-मेल भेजना हो या देखना हो, founder insurance phone number मोबाइल के जरिये आप दुनिया founder insurance phone number भर की सूचनाएं अपने साथ ले जा सकते हैं, देख सकते हैं व उनका प्रयोग जहां चाहे वहां कर सकते हैं।
जबकि वायरलेस का मतलब है कि आपके यंत्र (Computer, Keyboard, Mouse, Printer आदि) किसी विशेष प्रणाली से बिना तार के जुड़े रहते हैं जैसे कि वायरलेस लेन, जी.पी.आर.एस., ब्लूटूथ तकनीक, वाई.फाई. आदि। ये आधुनिक यंत्रों को बिना तार के तार से जोड़ने का कार्य करते है। आप इनके जरिये अपना ई-मेल देख व भेज सकते हैं, virgin mobile founder मनचाहे दस्तावेज दूर बैठकर छाप सकते हैं, जबकि दो यंत्रों के बीच कोई तार या किसी प्रकार का वास्तिवक सम्बन्ध नहीं होता है।