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Venus Planet ki Puri Jankari

शुक्र ग्रह से जुड़े 30 महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य | Venus Planet in Hindiशुक्र ग्रह सूरज के नजदीक स्थित दूसरा ग्रह है तथा सौर-परिवार का तीसरा सबसे छोटा ग्रह है। रात में चांद के बाद यह सबसे अधिक चमकने वाला खगोलीय पिंड है। इस ग्रह का चमकीलापन अपनी सबसे अच्छी अवस्था में सूर्योदय के पहले और सूर्यास्त के बाद पहुंचता है; इसलिए इसे भोर अथवा सांझ का तारा भी कहा जाता है।nawazuddin Siddiqui Kaun Hai? Nawazuddin Siddiqui Jada Famous Kab Hua?(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

यहां मैं नीचे दिए गये तथ्यों के माध्यम से आपको शुक्र ग्रह की संरचना, वायुमंडल, परिक्रमण, घूर्णन, भूगर्भ विज्ञान, चुम्बकीय क्षेत्र आदि के विषय में विस्तार से जानकारी दूंगा।Martin Cooper Kaun Hai ? Phone Ki Khoj Kisne ki?(Opens in a new browser tab)

 

#1. शुक्र एक स्थलीय ग्रह है; जिसका मतलब है कि पृथ्वी की तरह इसका भी निर्माण धातु से हुआ है और सतह चट्टानी है। इसे पृथ्वी की बहन (sister planet) भी कहा जाता है; क्योंकि शुक्र और पृथ्वी दोनों का आकार एवं आंतरिक संरचना काफी मिलती-जुलती हैं।

#2. शुक्र का वायुमंडल बहुत घना है, जो इसे सौर-मंडल का सबसे गर्म ग्रह बनाता है। दूसरा सबसे गर्म ग्रह Mercury (बुध) है।Duniya Me Sabse Jahrila Saap Kaunsa Hai?(Opens in a new browser tab)

#3. इस ग्रह का नाम रोम की प्यार और सुंदरता की देवी ‘Venus’ के नाम पर रखा गया है। आठों ग्रहों में यही एक ऐसा ग्रह जिसका नाम किसी औरत के नाम पर है। इसकी सतह के अधिकांश लक्षणों के नाम भी पौराणिक महिलाओं के नाम के साथ रखे गये हैं।Cashless Machine Kaise laye? Cashless Machine kitne ki hai?(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

 

Roman goddess and planet Venus

 

 

#4. इस ग्रह का व्यास 12,104 किलोमीटर है, जोकि पृथ्वी के व्यास से लगभग 640 किलोमीटर ही कम है। वही शुक्र का द्रव्यमान 4.867 × 1024 kg है, ये भी पृथ्वी के द्रव्यमान से केवल 1.105 × 1024 kg ही कम है।

#5. शुक्र सूर्य की वृत्ताकार कक्षा में औसतन 32.02 km/s की रफ्तार से परिक्रमा करता है। सूर्य की एक परिक्रमा करने में इसे 224.7 दिनों का समय लगता है।

 

 

#6. यह ग्रह सूर्य से 10,82,08,000 km और पृथ्वी से 26.1 करोड़ किलोमीटर दूर स्थित है। शुक्र ग्रह 584 दिनों में एक बार पृथ्वी के सबसे करीब आता है। उस वक्त पृथ्वी से इसकी दूरी 3.8 करोड़ किलोमीटर होती है।

#7. वीनस अपनी धुरी पर 3 डिग्री झुका हुआ है। यह अन्य ग्रहों के विपरीत अपनी धुरी पर पूरब से पश्चिम की ओर धीमी गति से घुमता है। इसे धुरी पर एक पूरा चक्कर लगाने में 243 दिनों का समय लगता हैं।

 

#8. शुक्र का वायुमंडल बहुत सघन है, जो मुख्य रूप से कार्बन-डाईऑक्साइड और सल्फ्यूरिक एसिड की बूंदों के घने बादलों से बना हैं। वायुमंडल घना होने के कारण सूरज से प्राप्त गर्मी बाहरी अंतरिक्ष में प्रसारित नहीं हो पाती; जिससे सतह का तापमान 470°C तक पहुंच जाता है।

 

 

 

 

 

 

 

#9. इसके दिन और रात के तापमान में बहुत अधिक परिवर्तन नहीं होता। शुक्र ग्रह की सतह में हालांकि हवा की गति बहुत कम होती है लेकिन वायुमंडल अत्यधिक सघन होने के कारण ये हवाएँ काफी अधिक बलशाली होती हैं और धूल और छोटे पत्थरों को भी उड़ा ले जाती हैं।

शुक्र के वायुमंडल में निम्न गैसें पाई जाती हैं-

कार्बन-डाइऑक्साइड96.5%
नाइट्रोजन3.5%
सल्फर-डाइऑक्साइड0.015%
ऑर्गन0.007%
जलवाष्प0.002%
कार्बन-मोनोऑक्साइड0.0017%
हीलियम0.0012%
नियोन0.0007%

 

 

 

 

 

#10. इसकी सतह पर वायुमंडलीय दाब पृथ्वी से 90 गुना अधिक है। आपको इसकी सतह पर उतना ही भारीपन महसूस होगा, जितना भारीपन समुद्र के 1.6 किलोमीटर अंदर जाने पर होता है।

#11. शुक्र ग्रह की आंतरिक संरचना पृथ्वी से मिलती-जुलती है। इसमें पृथ्वी की तरह एक कोर, एक मैन्टल और एक क्रस्ट है। इसके कोर का व्यास लगभग 6400 किलोमीटर है तथा पृथ्वी की तरह इसका कोर भी आंशिक रूप से द्रव रूप में है।

 

 

शुक्र ग्रह की आंतरिक संरचना

#12. इस ग्रह की सतह का लगभग 80 प्रतिशत भाग ज्वालामुखी निर्मित समतल मैदानों से बना हुआ है। शेष 20 प्रतिशत उच्च-स्थलीय महाद्वीपों से बना है जिसमें एक इस ग्रह के उत्तरी गोलाद्र्ध में तथा दूसरा इसकी भूमध्य रेखा के दक्षिण में स्थित है।

#13. इसके उत्तरी महाद्वीप को ‘इश्तार टेरा’ (Ishtar Terra) के नाम से संबोधित किया जाता हैं जो प्राचीन मेसोपोटामिया की एक देवी के नाम पर है। इसका आकार लगभग ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के बराबर है।

 

 

 

 

#14. दक्षिणी महाद्वीप को ‘एफ्रोडाईट टेरा’ (Aphrodite Terra) कहते हैं तथा इसका नाम भी यूनानी प्यार की देवी के नाम के साथ रखा गया है। इसका आकार अनुमानतः दक्षिण अमेरिका के बराबर है। इस महाद्वीप का अधिकांश भाग दरारों से ढका हुआ है।

#15. शुक्र ग्रह का सबसे ऊंचा पर्वत ‘मैक्सवेल मोंटेस’ (Maxwell Montes) है जो इश्तार टेरा में ही स्थित है तथा इसकी चोटी की ऊंचाई शुक्र ग्रह की सतह से 11 km है, जोकि पृथ्वी के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट से भी 2 km ऊंचा है। मैक्सवेल मोंटेस का नाम विश्व विख्यात वैज्ञानिक जेम्स क्लर्क मैक्सवेल के नाम पर रखा गया है।

 

 

 

 

 

 

 

#16. शुक्र ग्रह पर अनेक इम्पैक्ट क्रेटर, पहाड़ और घाटियां भी हैं जोकि इस चट्टानी ग्रह की संरचना को दर्शाते हैं। साथ-साथ इस ग्रह में कुछ विचित्र प्रकार की ज्वालामुखी आकृतियां भी हैं जिन्हें ‘फरा’ (farra) कहते हैं। ये आकृतियां 20-50 कि.मी. क्षेत्र में समतल रूप में फैली होती है।

#17. इस ग्रह पर 167 विशाल ज्वालामुखी हैं जो 100 कि.मी. क्षेत्र में फैले हुए हैं। इस प्रकार का ज्वालामुखी समूह पृथ्वी पर हवाई द्वीप है।

 

#18. शुक्र ग्रह में लगभग 1000 इम्पैक्ट क्रेटर हैं। जो लगभग समान रूप से फैले हुए हैं। शुक्र ग्रह के क्रेटर 3 कि.मी. से 280 कि.मी. व्यास क्षेत्र में फैले हुए हैं।

#19. शुक्र ग्रह का चुंबकीय फील्ड पृथ्वी की तुलना में कमजोर और छोटा है।

 

#20. शुक्र ग्रह तथा किसी भी ग्रह के लिए प्रथम अंतरिक्ष मिशन ‘वेनेरा-1‘ प्रोब था, जिसका प्रमोचन 12 फरवरी 1961 को किया गया लेकिन 7 दिन बाद इस स्पेसक्राफ्ट का संपर्क टूट गया। संपर्क टूटने के वक्त यह स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से 20 लाख किलोमीटर दूर था। यह मिशन सोवियत संघ द्वारा भेजा गया था।

 

 

 

 

 

#21. अमेरिका का भी पहला शुक्र ग्रह मिशन मैरिनर-1 असफल हुआ था: venus planet kids लेकिन उसका venus planet kids दूसरा मिशन मैरिनर-2 सफल सिद्ध venus planet kids हुआ। 14 दिसंबर, 1962 को शुक्र की venus planet kids कक्षा में 109 दिन तक रहने के venus planet kids बाद यह विश्व का प्रथम सफल अंतरतारकीय मिशन था जो शुक्र की सतह के ऊपर 34,833 कि.मी. की ऊंचाई से गुजरा था।

 

‘#22. सोवियत संघ का वेनेरा-3 प्रोब 1 मार्च, 1966 को शुक्र ग्रह की सतह पर लैंड करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। यह प्रथम मानव-निर्मित लैंडर था जिसने किसी अन्य ग्रह (पृथ्वी को छोड़कर) के वायुमंडल में प्रवेश किया तथा उसकी सतह को छुआ था। संचार तंत्र खराब हो जाने के कारण यह कोई डाटा नहीं भेज सका।

वर्ष 1966 से आज तक सोवियत संघ, अमेरिका तथा जापान द्वारा शुक्र ग्रह पर 25 से भी ज्यादा सफल मिशन भेजे जा चुके हैं।

#23. इस ग्रह के अध्ययन के लिए हाल venus the planet में भेजा गया मिशन जापान का ‘अकात्सुकी’ (Akatsuki) है। venus the planet इसे 20 मई, 2010 को लाॅन्च किया गया था, जो इस समय भी शुक्र का चक्कर लगा रहा है। venus the planet यह लगभग वर्ष 2021 के अंत तक कार्य करता रहेगा।

 

 

 

 

 

 

अकात्सुकी स्पेसक्राफ्ट / Source: The Japan Aerospace Exploration Agency (JAXA)

#24. पश्चिम देशों में टेलीस्कोप venus the planet की खोज से पहले शुक्र ग्रह को ‘भटकनेवाला तारा’ (wandering star) के नाम से जाना जाता था।

#25. 490 ईसा पूर्व तक शुक्र venus the planet ग्रह की विभिन्न आकृतियों – ‘मॉर्निंग स्टार’ और ‘इवनिंग स्टार’ को दो अलग-अलग आकाशिय पिंड माना जाता था लेकिन पहली बार ग्रीक गणितज्ञ पाइथागोरस ने यह पता लगाया था कि माॅर्निंग और इवनिंग स्टार एक ही पिंड है, दो अलग-अलग पिंड नहीं हैं।

 

 

 

 

#26. बुध की तरह ही planet venus facts शुक्र का भी planet venus facts अपना कोई चंद्रमा नहीं है।

#27. शुक्र की सतह का planet venus facts गुरुत्वाकर्षण planet venus facts बल 8.87 m/s² है, जोकि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण शक्ति का 90% है। planet venus facts अगर पृथ्वी पर आपका वजन 60 kg है तो शुक्र की सतह पर आपका वजन 55 kg होगा।

Neptune Planet ki Khoj Kisne Ki in Hindi

नेपच्यून: एक नीला मनोरम ग्रह | Neptune Planet in Hindiशक्तिशाली दूरबीनों की मदद से आकाशीय पिण्डों की खोज की बात तो आसानी से समझ आ जाती है। पर, यदि कोई कहे कि सौरमंडल के किसी ग्रह की खोज आकाश में टेलीस्कोप द्वारा बाद में, सबसे पहले गणित द्वारा कागज के पन्नों पर हुई, तो दिमाग कुछ चकरा सा जाता है।The Best Robot in Market in Hindi Information बाजार में सर्वश्रेष्ठ रोबोट(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

 

 

भला गणित द्वारा गणना करके किसी ग्रह की खोज कैसे संभव है? पर हमारे सौरमंडल के अंतिम ग्रह नेपच्यून के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। आइए, बात को कुछ विस्तार से जानें।IRCTC User ID Kaise Banaye? – IRCTC रजिस्ट्रेशन की इन प्रोसेस की मदद से बनाये नया खाता!(Opens in a new browser tab)

नेपच्यून की खोज की कहानी

जैसा कि आप जानते है से लेकर शनि तक के ग्रहों के बारे में लोग प्राचीनकाल से ही जानते थे। क्योंकि इन्हें आकाश में खुली आंखों से देखा जा सकता है।मार्कशीट लोन क्या है और कैसे मिलेगा Marksheet Loan in Hindi(Opens in a new browser tab)

शनि (Saturn) के बाद सौरमंडल में सूर्य से शनि तक की दूरी के बराबर खाली स्थान है। जिसके बाद फिर से ग्रहों की श्रृंखला प्रारंभ होती है। अत्यधिक दूरी के कारण इन ग्रहों को खुली आंखों से देखना संभव नहीं है। साधारण दूरबीनों से भी इन्हें नहीं देखा जा सकता।Martin Cooper Kaun Hai ? Phone Ki Khoj Kisne ki?(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

 

नासा की नेपच्यून ग्रह की तस्वीर
Credit: NASA/JPL

13 मार्च, सन् 1781 को जर्मन मूल के ब्रिटिश खोलशास्त्री विलियम हशॅल द्वारा अपनी उच्च कोटि की दूरबीन द्वारा आकाश में एक नये ग्रह Uranus (अरुण) की खोज के पहले किसी ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि सूर्य से इतनी दूरी पर उसका कोई ग्रह हो सकता है। इसके पश्चात आकाश का और गहराई से अध्ययन किया जाने लगा।

सन् 1846 की बात है। फ्रांस के खगोलविद और पेरिस ऑब्जर्वेटरी के अध्यक्ष उर्बैन ली वेर्रिएर (Urbain Le Verrier) ने सूक्ष्म गणना करने पर पाया कि यूरेनस की कक्षा में कुछ अनियमितता है। वह आकाश में ठीक उस स्थान पर नहीं है, जहां न्यूटन और केप्लर के खगोलीय सिद्धांतों के अनुसार उसे होना चाहिए था।

अतः उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि यूरेनस के परे अवश्य ही सौरमंडल का कोई अनखोजा ग्रह है, जो उसके रोटेशन को प्रभावित करता है।

उन्होंने बड़ी मेहनत से गणित की मदद से उस अनदेखे ग्रह की कक्षा और द्रव्यमान का निर्धारण किया और आकाश में उस स्थान का भी, जहां उसे होना चाहिए था।

 

 

 

 

 

उस समय पेरिस में कोई शक्तिशाली दूरबीन नहीं थी। अतः उन्होंने जर्मनी के खगोलविद जोहान गाले को एक पत्र लिख कर अपने बताए स्थान पर उस ग्रह को खोजने का अनुरोध किया। गाले ने उसी रात अपने दूरदर्शी द्वारा ली वेर्रिएर के बताए स्थान पर आकाश में सौरमंडल के उस नए सदस्य को ढूंढ निकाला।

23 सितंबर, 1846 की उसी रात जर्मनी के एक अन्य खगोलविद हेनरिक लुइस डी अरेस्ट ने भी अपनी दूरदर्शी से एक नए ग्रह का दर्शन किया। इसके पहले सन् 1820 में फ्रांसीसी खगोलविद एलेक्सिस बूवार्ड ने भी यूरेनस के परिक्रमा पथ का अध्ययन करते वक्त यह पाया था कि वह अपनी राह से कुछ विचलित होता है, पर वे इसका कारण नहीं समझ पाए थे।

तो, इस प्रकार इस ग्रह की खोज संयोगवश नहीं हुई। बल्कि, बाकायदा गणितीय सिद्धांतों के आधार पर एक निश्चित स्थान पर आकाश में इसे खोजा गया।

इस ग्रह की खोज से सारी दुनिया अचंभित रह गई। पर, सबसे अधिक धक्का लगा इंग्लैंड के खगोलविदों को! क्योंकि, ली वेर्रिएर से एक वर्ष पूर्व ही लंदन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक युवा छात्र जाॅन काउच एडम्स ने भी गणित के ही आधार पर इस ग्रह की कक्षा और गति का निर्धारण कर दिया था और वहां के खगोलज्ञों को उसके बताए स्थान पर नेपच्यून ग्रह को खोजने का अनुरोध किया था।

 

लेकिन, उन खगोलज्ञों ने उस विद्यार्थी की बातों पर ध्यान देना उचित नहीं समझा। परिणामस्वरूप, इंग्लैण्ड में अच्छी दूरबीन होते हुए भी इस ग्रह की प्रथम खोज का श्रेय इंग्लैंड को नहीं मिल पाया था। फिर भी, आज ली वेर्रिएर और एडम्स दोनों को संयुक्त से नेपच्यून का खोजकर्ता माना जाता है।

 

 

 

 

 

नेपच्यून ग्रह के खोजकर्ता – Urbain Le Verrier और John Couch Adams

नेपच्यून को आकाश में ली वेर्रिएर से बताए गये स्थान से 1 अंश की दूरी पर तथा एडम्स के बताए गए स्थान से 12 अंश परे हट कर खोजा गया। महान खगोलविद गैलीलियो ने भी अपनी दूरबीन से नेपच्यून को देखा था, उन्होंने इसे कोई तारा समझा।

हल्का हरा और नीला होने के कारण इस ग्रह को रोमन कथाओं के सागर के देवता ‘Neptune’ का नाम दिया गया। इसलिए हमारे यहां इसे ‘वरूण’ की संज्ञा दी गई है।

 

 

 

आकार, दूरी, परिक्रमा और कक्षा

वर्ष 2006 में अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा प्लूटो को एक बौना ग्रह घोषित किये जाने के पश्चात अब नेपच्यून ही सौरमंडल का अंतिम ग्रह है। नेपच्यून पृथ्वी से चार गुना अधिक चौड़ा है, जिसका व्यास 49,244 किमी. है।

शक्तिशाली दूरबीन से भी यह हरे नीले रंग की एक धुंधली गेंद-सा नजर आता है। यह सूर्य से 4.5 अरब किलोमीटर दूर स्थित है। सूर्य के प्रकाश को यहां तक पहुंचने में 4 घंटे का समय लगता है। सूर्य यहां से एक चमकीले तारे-सा दिखाई देता है। दोपहर में भी यहां शाम जैसी हल्की रोशनी रहती है।

 

 

 

 

 

आकार की दृष्टि से यह सौरमंडल का चौथा सबसे बड़ा ग्रह है। इसमें पृथ्वी जैसे 64 ग्रह समा सकते हैं। यद्यपि यह पृथ्वी से 17 गुना भारी है, लेकिन इसका घनत्व अधिक नहीं है। यदि इसे किसी विशाल महासागर में डालना संभव हो तो यह उसमें डूबेगा नहीं, वरन् तैरने लगेगा।

नेपच्यून 19,720 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से 165 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरा करता है; जिसका अर्थ ये हुआ कि जब से इसकि खोज हुई है, तब से आज तक यह एक परिक्रमा भी पूरी नहीं कर पाया है।

 

 

 

 

 

नेपच्यून अपनी धुरी पर 16 घंटों में एक चक्कर लगा लेता है। यह अपने अक्ष पर 28 डिग्री झुका हुआ है, जोकि पृथ्वी और मंगल ग्रह के अक्षीय झुकाव के लगभग समान ही है। अक्ष पर पृथ्वी के समान झुका हुआ होने के कारण नेपच्यून पर भी चार अलग-अलग ऋतुएँ होती हैं। प्रत्येक ऋतु लगभग 40 साल लंबी होती है।

नेपच्यून की संरचना और वायुमंडल

नेपच्यून यूरेनस की तरह ही एक विशालकाय बर्फीला ग्रह है। इसका ज्यादातर हिस्सा गर्म तरल पदार्थों, जैसे – पानी, मीथेन और अमोनिया के घने परतों से बना हुआ हैं। कई वैज्ञानिकों का मानना है कि इन घने परतों के नीचे गर्म पानी का एक सागर है, जो अत्यधिक दबाव के कारण भाप बनकर उड़ता नहीं है।

नेपच्यून की सतह ठोस नहीं अगर आप इस पर खड़े होने कि कोशिस करेगें तो आप हजारों किलोमीटर मोटी गैसीय परतों में डूबतें जाएगे और अंत में इस ग्रह की ठोस कोर पर पहुंचेंगे जो मुख्य रूप से लौह, निकल एवं सिलिकेट से बना हुआ है। नेपच्यून के कोर का द्रव्यमान पृथ्वी के कोर के द्रव्यमान के लगभग बराबर है।

 

 

 

 

 

Credit: NASA

नेपच्यून का वायुमंडल मुख्य रूप से हाइड्रोजन, हीलियम तथा थोड़ी मात्रा में मीथेन से बना हुआ है। नेपच्यून अपने पड़ोसी ग्रह यूरेनस से ज्यादा चमकीला है। यूरेनस के वायुमंडल में भी थोड़ी मात्रा में मीथेन गैस है; जिसके कारण वह भी हल्का नीला और हरे रंग का दिखाई देता है।

इस ग्रह पर पूरे सौरमंडल के ग्रहों की तुलना में सबसे तेज़ रफ्तार हवाएं चलती है। सूर्य से इतनी दूरी तथा कम ऊर्जा प्राप्त होने के बावजूद भी इसपर बृहस्पति से तीन गुना तथा हमारी पृथ्वी से नौ गुना अधिक श्क्तिशाली हवाएं चलती है। ये हवाएं 2000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हुए पूरे ग्रह पर में जमे हुए मीथेन के बादलों को उड़ा देती हैं। आपको बता दे कि पृथ्वी पर चलने वाली सबसे तेज हवा की रफ्तार 400 Km/hr है।

 

 

 

 

वर्ष 1989 में इस ग्रह के दक्षिणी-गोलार्द्ध neptune society में एक विशालकाय अंडाकार तूफान देखा गया था, जिसकी neptune society रफ्तार neptune society 2,414 Km/hr की थी। वह तूफान इतना विशाल neptune society था कि हमारी पूरी पृथ्वी neptune society  उस में आसानी से समा सकती थी। हालांकि, वर्तमान neptune society में नेपच्यून के दक्षिणी भाग से वह तूफान समाप्त हो चुका है; neptune society लेकिन आज neptune society भी इस ग्रह के अन्य हिस्सों में कई छोटे-छोटे तूफान देखे जा सकते हैं। वैज्ञानिकों ने काले धब्बे के समान दिखने वाले उस तूफान का नाम ‘The Great Dark Spot’ रखा था। neptune society उसे आप नीचे की तस्वीर में भी देख सकते है-

 

 

 

 

 

नेपच्यून के छल्ले

नेपच्यून सौरमंडल के उन 4 ग्रहों में से एक है, जिनके पास उपग्रही छल्ले (planetary rings) हैं। इन छल्लों की खोज सन् 1989 में वॉयजर-2 स्पेसक्राफ्ट ने कि थी। neptune theatre halifax नेपच्यून के कुल 5 छल्ले हैं। इन छल्लों के नाम हैं – Galle, Leverrier, Lassell, Arago और Adams । इन छल्लों के नाम इस ग्रह के विषय में महत्वपूर्ण खोज करने वाले खगोल विज्ञानियों के नाम पर रखे गए हैं।

 

 

 

 

 

 

नेपच्यून ग्रह के छल्लों का रेखाचित्र / Credit: Don Dixion, cosmographica.com

इन छल्लों का 20 से 70% भाग धूल कणों neptune theatre halifax से तथा बाकि का हिस्सा अलग-अलग प्रकार के पत्थरों से बना हैं। neptune theatre halifax नेपच्यून के ये छल्ले आसानी से दिखाई नहीं देते; neptune theatre halifax क्योंकि ये बहुत ही गहरे neptune theatre halifax काले रंग के पदार्थों से बने हुए है neptune theatre halifax तथा इनका घनत्व और आकार भी भिन्न-भिन्न हैं। neptune theatre halifax इस ग्रह के सबसे नजदीकी neptune theatre halifax छल्ले का नाम Galle है और सबसे दूर स्थित neptune theatre halifax छल्ले का नाम Adams है।

नीचे दी गई सारणी में पांचों छल्लों के नाम के साथ नेपच्यून ग्रह के केन्द्र से उनकी दूरी और उनकी चौड़ाई को बताया गया है।

नामग्रह के केंद्र से दूरीचौड़ाई
गाले41,900 किमी.2,000 किमी.
ली वेर्रिएर53,200 किमी.113 किमी.
लैसल55,400 किमी.4,000 किमी.
अर्गो57,600 किमी.<100 किमी.
एडम्स62,930 किमी.15–50 किमी.

 

 

 

 

 

नेपच्यून के उपग्रह

सर्वप्रथम वॉयजर-2 neptune theatre स्पेसक्राफ्ट ने नेपच्यून neptune theatre के सबसे neptune theatre बड़े उपग्रह ट्राइटन (Triton) की तस्वीरें ली थी। neptune theatre नेपच्यून की neptune theatre खोज के 17 दिन बाद 10 अक्टूबर, 1846 को अंग्रेज व्यापारी खगोलशास्त्री विलियम लासेल ने ट्राइटन को खोज निकाला था।

यह नेपच्यून से 3,54,759 किलोमीटर दूर neptune theatre स्थित है तथा 5.9 दिनों (144 घंटे) में इसकी एक परिक्रमा neptune theatre पूरा करता है। neptune theatre नेपच्यून की परिक्रमा यह उसके घूमने की उल्टी दिशा में करता है। neptune theatre सौरमंडल में neptune theatre यही एक बड़ा उपग्रह है जो अपने पितृग्रह की परिक्रमा उल्टी दिशा में करता है।

 

 

 

 

 

ट्राइटन उपग्रह
नेपच्यून का सबसे बड़ा उपग्रह – Triton / Credit: NASA/JPL/USGS

इसका वायुमंडल पारदर्शी है Neptune तथा मीथेन और अमोनिया से भरा हुआ है। यह बर्फ से आच्छादित है Neptune और चंद्रमा से कुछ छोटा है। Neptune इसका तापमान -240 °C है। यह सौरमंडल का सर्वाधिक ठंडा पिण्ड है। Neptune यहां नाइट्रोजन से भरा समुद्र है जिसमें नेपच्यून का प्रतिबिंब देखना भी संभव है। Neptune ट्राइटन पर बर्फ के पहाड़ हैं। Neptune इन पहाड़ों से गुलाबी बर्फ छिटकर पूरे आकाश में छा जीती है।

नेपच्यून का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है- प्रोटियस। यह 27 घंटे में नेपच्यून की एक परिक्रमा पूरा करता है। इसकी खोज भी वॉयजर-2 ने वर्ष 1989 में कि था।

 

 

 

 

 

बाद में इसके अन्य 12 उपग्रहों को Neptune भी खोज निकाला गया, ये सभी उपग्रह अत्यंत छोटे और नेपच्यून के वलयों के ही भाग हैं। Neptune इस प्रकार अब इसके उपग्रहों की संख्या 14 हो गई है। Triton और Proteus के Neptune अलावा इसके अन्य 12 उपग्रहों के नाम इस प्रकार हैं- Naiad, Thalassa, Despina, Galatea, Larissa, Hippocamp, Nereid, Halimede, Sao, Laomedeia, Psamathe और Neso. उपग्रहों के ये सभी नाम छोटे-छोटे यूनानी पौराणिक समुद्री देवताओं के नाम हैं।

Train Founder Kon Hain

Train का आविष्कार किसने किया और कब? जानेदुनिया में प्रतिवर्ष अरबों लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। आज यह तेज गति और लंबी या छोटी यात्रा में लगने वाले सस्ते भाड़े कारण यातायात का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। लेकिन क्या आपको पता है, यात्रियों व वस्तुओं को ढोने वाली विश्व की पहली train ka avishkar kisne kiya और कब? तो बता दे, विश्व की पहली सफल ट्रेन 27 सितंबर, 1825 को जार्ज स्टीफेन्सन (George Stephenson) द्वारा बनाई गई थी। उस ट्रेन का नाम ‘लोकोमोशन’ था।Watch ka Avishkar Kisne Kiya?(Opens in a new browser tab)

 

 

 

जार्ज स्टीफेन्सन एक ब्रिटिश इंजीनियर थे। उनके द्वारा बनाई गई ट्रेन की रफ्तार 24 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जिससे पहली बार 450 यात्रियों ने इंग्लैंड के डार्लिंगटन और स्टॉकटन के बीच यात्रा की थी।Koshika ki khoj kisne ki?(Opens in a new browser tab)

 

 

ट्रेन के आविष्कारक जार्ज स्टीफेन्सन
जर्ज स्टीफेन्सन और उनका तेज ट्रेन इंजन ‘राॅकेट’

अपनी पहली ट्रेन की सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने लिवरपूल और मैनचेस्टर के बीच एक 64 किलोमीटर लंबी रेल लाइन भी बनाई थी। यह विश्व की पहली इंटर-सिटी रेलवे थी, जिसका परिचालन 18 सितंबर, 1830 को शुरू हुआ था।

 

 

 

 

 

सन् 1829 में जब लिवरपूल-मैनचेस्टर लाइन का कार्य पूरा होने वाला था तभी इंगलैंड में एक लोकोमोटिव प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था, जिसमें स्टीफेन्सन ने भी अपने दूसरे रेल इंजन ‘रॉकेट’ के साथ भाग लिया था।

स्टीफेन्सन ने रॉकेट को 58 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाकर उस प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने उस स्टीम रेल इंजन को अपने बेटे राॅबर्ट के साथ मिलकर बनाया था।

 

 

ट्रेन से जुड़े 20 महत्वपूर्ण तथ्य

    1. जार्ज स्टीफेन्सन से भी पहले इंग्लैंड के रिचर्ड ट्रेविथिक ने भी सन् 1804 में एक स्टीम रेल इंजन का निर्माण किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य कोयले की खान से कोयले को लोहे की ढलाई करने वाले कारखाने तक पहुंचाना था। लेकिन उनका वह स्टीम रेल इंजन कई खामियों के कारण लोकप्रिय नहीं हो पाया।
    2. बिजली से चलने वाला दुनिया का पहला रेल इंजन स्कॉटलैंड के रसायनज्ञ रॉबर्ट डेविडसन द्वारा 1837 में बनाया गया था। इसे बैटरी से संचालित किया जाता था।

 

 

 

 

    1. ट्रेनों का ट्रैक बदलने वाले रेलरोड स्विच का आविष्कार अंग्रेज सिविल इंजीनियर सर चाल्र्स फाॅक्स ने सन् 1832 में किया गया था।
      1. इंग्लैंड के ब्राइटन शहर में स्थित वोल्क इलेक्ट्रिक रेलवे दुनिया का सबसे पुराना ईलेक्ट्रिक रेलवे है, जिसका परिचालन आज भी किया जा रहा है। इसकी शुरूआत सन् 1883 में कि गई थी।
      2. दुनिया की पहली डीजल से चलने वाली ट्रेन की शुरूआत सन् 1912 में स्विट्जरलैंड में कि गई थी। उस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 100 Km/hr थी।
      3. विश्व की पहली तेज रफ्तार ट्रेन की शुरूआत वर्ष 1964 में जापान के टोक्यो और ओसाका शहर बीच हुई थी, जिसकी अधिकतम रफ्तार 164 किलोमीटर प्रति घंटा थी।
      4. इंग्लैंड के डार्लिंगटन शहर में स्थित स्केर्न ब्रिज (Skerne Bridge) दुनिया का पहला रेलवे ब्रिज है।
      5. ‘London Underground’ दुनिया की पहली भूमिगत रेलवे है। इसकी शुरूआत 9 जनवरी, 1863 कोई हुई थी। इसकी लंबाई लगभग 400 किमी. है।
      6. ट्रेन में लगने वाले एयर ब्रेक सिस्टम का आविष्कार अमेरिकी इंजीनियर जाॅर्ज वेस्टिंगहाउस ने सन् 1872 में किया था।
      7. वर्तमान में दुनिया की सबसे तेज रफ्तार ट्रेन शंघाई मैग्लेव है, जिसकी अधिकतम रफ्तार 431 किमी. प्रति घंटा है। यह ट्रेन चीन के शंघाई शहर में चलती है।
      8. दुनिया की सबसे लंबी रेल लाइन यीवू-मैड्रिड रेल लाइन है। इसे चीन के यीवू और स्पेन के मैडिड्र शहर के बीच बनाया गया है। इसकी लंबाई लगभग 13,000 किमी. है।
      9. संयुक्त राज्य अमेरिका का रेल नेटवर्क दुनिया का सबसे लंबा रेल नेटवर्क है। इसकी लंबाई 2,50,000 किमी. से भी ज्यादा है। अमेरिका के 80% रेल लाइनों का उपयोग केवल माल ढुलाई के लिए किया जाता है।

 

 

 

 

 

 

  1. भारत में पहली ट्रेन आज से 166 वर्ष पहले 16 अप्रैल, 1853 को महाराष्ट्र के बोरीबंदर और ठाणे का बीच चली थी। उस ट्रेन में तीन स्टीम इंजन और 14 डिब्बे लगाए गए थे। उसमें पहली बार 400 मेहमान यात्रियों ने यात्रा कि थी।
  2. भारतीय रेल 67,368 किमी. मार्ग की founder of train लंबाई के साथ दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। इसके पास 13,452 यात्री ट्रेनें और 9,141 माल गाडियां हैं।
  3. दुनिया का सबसे लंबा train running status रेलवे प्लेटफार्म भारत founder of train के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित ‘गोरखपुर स्टेशन’ है। इसकी लंबाई 4,430 फीट है।
  4. भारत में सबसे तेज चलने train running status वाली ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ है। founder of train इसकी अधिकत्म रफ्तार 180 km/hr है। train running status भारत की दूसरी सबसे तेज चलने वाली ट्रेन train running status ‘गतिमान एक्सप्रेस’ है।  founder of train इसकी अधिकतम रफ्तार 160 km/hr है। यह दिल्ली और झांसी के बीच चलती है।
  5. दुनिया की सबसे लंबी रेलवे सुरंग स्विट्जरलैंड में स्थित ‘गोथार्ड टनल’ है। founder of train यह 57 किमी. लंबा है। live train status वही भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग जम्मू-कश्मीर में स्थित ‘पीर पंजाल रेलवे टनल’ है। इस सुरंग की लंबाई 11.215 किमी. है।
  6. भारत में ट्रेन के डिब्बों में प्रयोग होने वाले live train status बिजली के सभी उपकरण भारतीय मानक 220 वोल्ट के विपरीत 110 वोल्ट पर कार्य करते हैं।
  7. ‘विवेक एक्सप्रेस’ भारत में सबसे लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन है। live train status यह असम के डिब्रूगढ़ और तमिलनाडु के कन्याकुमारी के बीच चलती है तथा कुल 4286 किमी. की दूरी तय करती है।
  8. दुनिया की पहली अंतरराष्ट्रीय रेल लाइन सन् 1843 live train status में बेल्जियम और जर्मनी के बीच बनाई गई थी। यह रेलवे लाइन बेल्जियम के ब्रुसेल्स शहर को जर्मनी के कोलोन शहर से जोड़ती थी।

Koshika ki khoj kisne ki?

कोशिका की खोज किसने की और कैसे? जानेकोशिका सभी जीवित वस्तुओं की आधारभूत संरचना है। मनुष्य का शरीर खरबों कोशिकाओं से मिलकर बना होता हैं। ये हमारे शरीर को आकार देती है और भोजन से पोषक तत्व प्राप्त कर ऊर्जा का निर्माण करती है। bone marrowकोशिका के अंदर ही DNA जैसे अनुवांशिक पदार्थ भी मौजूद होते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है, सबसे पहले Koshika ki khoj kisne ki और कब? तो इसका उत्तर है- रॉबर्ट हुक ने। इन्होंने ही सन् 1665 में कोशिका की खोज की थी।

 

 

 

 

रॉबर्ट हुक इंग्लैंड के एक प्राकृतिक दार्शनिक थे। सन् 1665 में उन्होंने बोतल के काॅर्क के पतले टुकड़ों को कंपाउंड माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर देखा तो उन्हें उनमें हजारों छोटे-छोटे छिद्र नजर आये।

 

 

 

 

 

रॉबर्ट हुक

 

 

उन छोटे-छोटे छिद्रों को उन्होंने ‘Cell’ नाम दिया था। सेल शब्द लैटिन के ‘Cella’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है- एक छोटा कमरा।

हालांकि, हुक उन छिद्रों की वास्तविक संरचना या कार्य के विषय में नहीं जानते थे। जिन छिद्रों को वह कोशिका मान रहे थे; वे वास्तव में पौधों के ऊतकों की खाली कोशिका दीवारें थी।

उस समय अच्छे माइक्रोस्कोप न होने के कारण वे कोशिका दीवार के अंदर झाक कोशिका के अंदर मौजूद अन्य महत्वपूर्ण घटकों को नहीं देख पाये थे।

बाद के वर्षों में विश्व के अन्य वैज्ञानिकों ने कोशिका एवं उसकी वास्तविक संरचना के विषय में अनेक खोजें कि। नीचे कोशिका से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर दिये जा रहे हैं। इन्हें भी पढ़े-

 

 

 

Q2. क्या कोशिकाएं भी आत्महत्या करती हैं?

उत्तरः हां! कोशिकाएं भी आत्महत्या करती है। जब कोशिकाएं बाहरी या आंतरिक कारणों से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो स्वयं को नष्ट करके पूरे शरीर की रक्षा करती हैं। कोशिकाओं के इस प्रकार स्वयं को नष्ट करने की प्रक्रिया को एपोप्टोसिस (Apoptosis) कहा जाता है।

शरीर में किसी विशेष काम को करने के लिए बनी कोशिकाएं काम समाप्त हो जाने के बाद अनावश्यक हो जाती हैं, इसलिए उनका नष्ट होना शरीर के लिए अच्छा होता है।

ऐसी कोशिकाएं जिनका डीएनए किसी कारण खराब हो जाता है, वे स्वयं ही मर जाती हैं। यानी आत्महत्या कर लेती हैं। अगर ऐसी खराब कोशिकाएं जीवित रहकर कोशिका विभाजन करने लगें तो वे कैंसर की कोशिकाओं में भी बदल सकती हैं।

इसी प्रकार वायरस जब हमारी कोशिका से विभाजित होकर बीमारी फैलाने के लिए तैयारी करते रहते हैं तब अचानक हमारी वायरसयुक्त बीमार कोशिकाएं मर जाती हैं। साथ में वायरस भी खत्म हो जाते हैं। इस प्रकार शरीर बीमारी से बचा रहता है।

 

 

 

 

Q3. रॉबर्ट हुक ने एक मृत कोशिका की खोज की थी, लेकिन क्या आपको पता है जीवित कोशिका की खोज का श्रेय किसे दिया जाता है?

उत्तरः जीवित कोशिका की खोज सन् 1674 में डच वैज्ञानिक एंटोनी वैन लेउवेनहोएक ने की थी। इन्हें ही प्रोटोज़ोआ, बैक्टरीया और शुक्राणु कोशिका (sperm cell) की खोज का श्रेय भी दिया जाता है।

Q4. कोशिका का सिद्धांत (cell theory) किसने दिया था?

उत्तरः कोशिका सिद्धांत का प्रतिपादन सन् 1838 में थियोडोर श्वान और मैथियास जैकब श्लाइडेन ने किया था।

 

 

 

 

 

Q5. कोशिका के अंदर ऊर्जा का निर्माण करने वाले Mitochondria की खोज किसने की थी?

उत्तरः माइटोकॉन्ड्रिया की खोज सन् 1857 में अल्बर्ट वॉन कोलिकर ने किया था।

Q6. कोशिका के अध्ययन को क्या कहा जाता है?

उत्तरः कोशिका के अध्ययन को कोशिका विज्ञान (Cytology) कहा जाता है। इस विज्ञान के अंतर्गत कोशिका की संरचना एवं कार्य का अध्ययन किया जाता है।

 

 

 

Q7. दुनिया की सबसे छोटी कोशिका का क्या नाम है?

उत्तरः दुनिया की सबसे छोटी कोशिका ‘Mycoplasma’ को माना जाता है। इसका आकार लगभग 10 माइक्रोमीटर होता है। मनुष्य के शरीर की सबसे छोटी कोशिका शुक्राणु की कोशिका को माना जाता है।

 

 

 

Q8. दुनिया की सबसे बड़ी कोशिका किसे माना जाता है?

उत्तरः दुनिया की सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग पक्षी के अंडे को माना जाता है। मनुष्य के शरीर की सबसे बड़ी कोशिका डिंब (ovum) को माना जाता है।

दुनिया की सबसे बड़ी कोशिका

 

 

 

Q9. मुख्य रूप से कोशिकाएँ कितनी प्रकार की होती हैं?

उत्तरः मुख्य रूप से कोशिकाएं दो प्रकार की होती हैं-

  1. अकेन्द्रिक कोशिका (Prokaryotic Cell) : ये smallest bone in human body ऐसी कोशिका होती है, जिसके मध्य में केन्द्रक नहीं smallest bone in human body पाया जाता। इस प्रकार की कोशिका वाले जीवों का आकार बहुत छोटा होता हैं। जैसे – विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया
  2. सुकेन्द्रिक कोशिका (Prokaryotic Cell) : smallest bone in human body इस कोशिका के मध्य में केन्द्रक पाया जाता है। इस प्रकार की कोशिकाएं आकार में अकेन्द्रिक कोशिका से बड़ी होती है और इनकी संरचना भी जटिल होती है। इस प्रकार की कोशिएं मनुष्य और पौधे में पाई जाती है।

 

 

 

 

 

Q10. ऊतकों (tissues) का bone marrow निर्माण कैसे होता हैं?

उत्तरः ऊतकों का निर्माण एक ही तरह की कोशिकाओं के समूह से मिलकर होता है।

Q11. कोशिका दीवार (cell wall) bone marrow किसकी कोशिका में पाया जाता है?

उत्तरः पेड़-पौधों की कोशिकाओं में

 

 

 

 

 

Q12. किस प्रकार की कोशिका का bone marrow विकास धरती पर सबसे पहले हुआ था?

उत्तरः अकेन्द्रिक कोशिका (Prokaryotic cell) का

Q13. कोशिका में Ribosome bone marrow का क्या कार्य है?

उत्तरः प्रोटीन संश्लेषण करना

 

 

 

Q14. कोशिका में केन्द्रक का Koshika  मुख्य collar bone कार्य क्या है?

उत्तरः कोशिका वृद्धि और Koshika प्रजनन को collar bone नियंत्रित करना

Q15. कोशिकाएं collar bone प्रजनन कैसे Koshika collar bone करती हैं?

उत्तरः ज्यादातर प्रोकैरियोटिक कोशिकाएं collar bone बाइनरी फिजन द्वारा तथा यूकेरियोटिक कोशिकाएं लैंगिक या अलैंगिक प्रक्रिया द्वारा प्रजनन करती हैं।

Q16. अनुमानतः हमारे शरीर में Koshika कितनी कोशिकाएं होती है?

उत्तरः वैज्ञानिकों का अनुमान है koshika ki khoj kisne ki कि मानव Koshika शरीर में लगभग 75 से 100 खरब कोशिकाएं होती हैं।

Watch ka Avishkar Kisne Kiya?

आज दुनिया घड़ी के अनुसार चलती है। founder of watch हम अपनी पूरी दिनचर्या घड़ी के अनुसार निर्धारित करते है। इसके आविष्कार से पहले लोग सूरज की रोशनी और पानी के उतार-चढ़ाव को देखकर समय का अनुमान लगाया करते थे। लेकिन क्या आपको मालूम है ghadi ka avishkar kisne kiya tha? तो इसका उत्तर है – पीटर हेनलेन (Peter Henlein) ने। उनकी उस पहली घड़ी का नाम ‘पोमेंडर वॉच’ था, जिसे उन्होंने सन् 1505 में बनाया था।

पीटर हेनलेन जर्मनी के न्यूनबर्ग शहर में ताले एवं घड़ी बनाने का कार्य किया करते थे। सन् 1505 में उनके द्वारा बनाई गई पहली घड़ी दुनिया की सबसे पुरानी घड़ी है, जो आज भी सही तरीके से काम कर ही है।

 

 

दुनिया की पहली घड़ी

 

पोमेंडर वाॅच एक डिब्बी के आकार वाली घड़ी है। इसके आधे निचले हिस्से में घड़ी के छोटे-छोटे कलपुर्जे लगे है तथा बाकि के आधे हिस्से से इसके ऊपरी भाग को ढका जाता है। यह घड़ी तांबे और सोने से बनी है। वर्तमान में इसकी कीमत 3 से 5 करोड़ यूरो बताई जा रही है। 

 

 

 

 

Q2. उन दो शुरुआती घड़ियों के नाम बताये, जिनका उपयोग पोमेंडर वाॅच के आविष्कार से पहले विश्व भर में किया जाता था?

उत्तरः उन दो घड़ियों के नाम हैं – सूर्य और पानी घड़ी। यानी Sundial और Water clock. इनको सबसे पहले ईसा से 1500 वर्ष पूर्व मिस्त्र में बनाया गया था। मिस्त्र की पानी घड़ी से उन्नत पानी घड़ी का आविष्कार प्रसिद्ध चीनी विद्वान सु-संग (Su Sung) ने 11वीं सदी में किया था। जो आज भी चीन के कैफेंग शहर में मौजूद है।

Q3. पेंडुलम घड़ी का आविष्कार किस प्रसिद्ध गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी ने किया था?

उत्तरः क्रिस्चियन ह्यूजेन्स ने सन् 1656 में

Q4. दुनिया की पहली कलाई घड़ी किसके लिए और कब बनाई गई थी?

उत्तरः पहली कलाई घड़ी इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम के लिए सन् 1571 में बनाई गई थी। महारानी एलिज़ाबेथ को वह घड़ी उनके पसंदीदा राजनेता रॉबर्ट डुडले द्वारा नये साल के तोहफे के रूप में दी गई थी।

Q5. समय मापने और घड़ी बनाने का विज्ञान क्या कहलाता है?

उत्तरः समय मापन कला या घड़ी निर्माण कला (Horology)

 

 

 

 

 

Q6. अंग्रेजी में घड़ी के लिए दो शब्द है – ‘clock’ और ‘watch’. क्या इन शब्दों में कोई अंतर है?

उत्तरः हाँ! वाॅच उस घड़ी को कहा जाता है जिसे हम अपनी कलाई पर पहनते है या जेब में रखते है, वही क्लॉक वॉच के बड़े रूप को कहते है। इसे हम दीवार पर टांगते है या मेज पर रखते है।

Q7. स्टॉपवॉच का आविष्कार किसने किया था?

उत्तरः स्टॉपवॉच का आविष्कार फ्रांस के घड़ीसाज़ लुईस मोइनेट (Louis Moinet) ने सन् 1816 में किया था।

 

 

 

 

 

दुनिया का पहला स्टॉपवॉच

Q8. दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक घड़ी का क्या नाम था?

उत्तरः The Hamilton Electric 500, यह विश्व की पहली बैटरी से चलने वाली कलाई घड़ी थी। इसे The Hamilton Electric कंपनी ने वर्ष 1957 में बनाया था।

Q9. जीपीएस और संचार उपग्रहों में किस प्रकार की घड़ी का इस्तेमाल किया जाता है?

उत्तरः परमाणु घड़ी का (Atomic clock)

Q10. दुनिया की सबसे बड़ी घड़ी का क्या नाम है और यह कहाँ है?

उत्तरः दुनिया की सबसे बड़ी घड़ी ‘Makkah Royal Clock Tower’ है। यह सउदी अरब के मक्का में स्थित है। इसका व्यास 141 फीट है। इसे हर रात रौशन करने के लिए 10 लाख एलईडी लाइट का इस्तेमाल किया जाता है।

Q11. पहली डिजिटल घड़ी कब बनाई गई थी?

उत्तरः पहली डिजिटल घड़ी वर्ष 1972 में हैमिल्टन वाॅच कंपनी द्वारा बनाई गई थी। उसका नाम ‘Pulsar Time Computer’ था।

 

 

 

 

 

Q12. विश्व की सबसे सटीक watch the founder online free समय बताने वाली घड़ी का क्या नाम है?

उत्तरः NIST-F1, यह एक परमाणु घड़ी है। watch the founder online free इसका निमार्ण अमेरिकी संस्था National Institute of Standards and Technology के वैज्ञानिकों watch the founder online free ने किया है। watch the founder online free यह इतना सटीक समय बताती है कि इसमें 10 करोड़ वर्षों में मात्र 1 सेकेंड ही गलती हो सकती है।

Q13. पहला स्मार्ट वॉच किसने और कब बनाया था?

उत्तरः पहला स्मार्ट वॉच जपानी कंपनी सीको ने 10 जून, 1998 को बनाया था, जिसका नाम Ruputer था।

Q14. एक सेकंड में कितने मिलीसेकंड होते है?

उत्तरः 1000 मिलीसेकंड, एक मिलीसेकंड सेकंड का हजारवां हिस्सा होता है। 10 मिलीसेकंड में 1 सेंटीसेकंड तथा 100 मिलीसेकंड में 1 डेसीसेकंड होता है।

Q15. दुनिया की सबसे कीमती घड़ी कौन-सी है?

उत्तरः दुनिया की सबसे किमती घड़ी Patek Philippe Grandmaster Chime Ref. 6300A-010 है। इसकी कीमत 3.119 करोड़ डॉलर है।

 

 

 

 

 

 

Q16. समय मापने की सबसे छोटी founder of watch इकाई watch the founder online क्या है?

उत्तरः प्लैंक समय (Planck time)

Q17. विश्व की पहली अलार्म घड़ी founder of watch किसनेwatch the founder online बनाई थी?

उत्तरः अमेरिकी घड़ीसाज़ लेवी हचिन्स ने founder of watch सन् 1787 में पहली watch the founder online अलार्म घड़ी का आविष्कार किया था। उसे उन्होंने खुद के founder of watch लिए बनाया था, जो केवल सुबह 4 बजे ही बजती थी।

 

 

 

 

Q18. घड़ी में मिनट वाला काटा सबसे पहले किसने लगाया था?

उत्तरः घड़ी में मिनट वाला काटा स्विट्जरलैंड के घड़ीसाज़ जोस्ट बर्गी ने सन् 1577 में लगाया था।

PEN ka Khoj Kisne Ki?

पेन का आविष्कार किसने किया और कब? full form of pen मनुष्य पुराने समय में लिखने के लिए पक्षियों के पंखों, सरकंडों आदि इस्तेमाल किया करता था। लेकिन आज से लगभग 80 वर्ष पूर्व हुये आधुनिक बाॅलपाॅइंट पेन के आवष्किार ने लिखने के तरीके को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। लेकिन क्या आपको मालूम है Pen ka avishkar kisne kiya और कब? तो बता दे, इसका आविष्कार अमेरिकी वकील और लेदर का काम करने वाले एक व्यक्ति जॉन जैकब लाउड (John Jacob Loud) ने सन् 1888 में किया था।nawazuddin Siddiqui Kaun Hai? Nawazuddin Siddiqui Jada Famous Kab Hua?(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

 

जाॅन लाउड को बाॅल पेन बनाने का विचार लेदर की विस्तुओं पर काम करते वक्त आया था। दरअसल, उन्हें लेदर के बड़े-बड़े टुकड़ों को काटते वक्त उनपर निशान लगाने होते थे। इसके लिए उस समय मौजूद पेंसिल और फाउंटेन पेन से निशान लगाना मुमकिन नहीं होता था।The Wright Brothers Kaun hai? First Airplane Kisne Banaya?(Opens in a new browser tab)

 

जाॅन लाउड की पहली पेन

 

 

इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने एक ऐसी कलम बनाई जिसकी नोक धातु की एक छोटी बाॅल के आकार की थी और चारों ओर आसानी से घूम सकती थी। उस छोटी बाॅल को उसके स्थान पर बनाये रखने के लिए एक साॅकेट का उपयोग किया गया था।

जाॅन लाउड ने अपने इस नये आविष्कार के लिए 30 अक्टूबर, 1888 को अमेरिका में पेटेंट प्राप्त किया। यह बाॅल पेन के लिए दुनिया का पहला पटेंट था।होम लोन इंश्योरेंस क्या है What is Home Loan Insurance??(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

 

लाउड का बाॅल पेन लेदर पर लिखने के लिए बहुत अच्छा था लेकिन उससे कागज पर सुचारू रूप से नहीं लिखा जा सकता था; क्योंकि उसकी नोक कठोर थी। अपने इसी दोष के कारण वह उस समय ज्यादा प्रचलित नहीं हो सका।

बाद में वर्ष 1938 में हंगेरियन मूल के अर्जेंटीनियन आविष्कारक लादिसालो जोस बिरो (Ladislao José Biro) पतली स्याही और बाॅल बियरिंग का उपयोग कर आधुनिक बाॅल पेन बनाने में सफल रहे। जोस बिरो का वह पेन व्यावसायिक रूप से भी काफी सफल रहा और कुछ ही वर्षों में दुनिया भर में 100 अरब से ज्यादा पेन बिक गए।शिक्षा ऋण Education Loan Kya Hai Education Loan Kaise Milega(Opens in a new browser tab)

 

 

 

Q2. Fountain Pen का आविष्कार किसने किया था?

उत्तरः फाउंटेन पेन का आविष्कार रोमानियाई आविष्कारक पेट्राक पोएनारू (Petrache Poenaru) ने सन् 1827 में किया था। बाद में सन् 1884 में अमेरिका के लुईस वाटरमैन ने फाउंटेन पेन की डिज़ाइन में कई महत्वपूर्ण बदलाव कर एक बेहतर फाउंटेन पेन बनाया था।

Q3. पेन की स्याही किन चीजों से मिलकर बनी होती हैं?

उत्तरः लगभग सभी कलमों की स्याही एक या एक से अधिक रंग वर्णकों (color pigments) और डाइ को किसी साल्वेंट (जैसे- पानी या तेल) में मिलाकर बनाई जाती है। कलम कागज पर सुचारू रूप से चले इसके लिए स्याही में अतिरिक्त रासायनिक कंपाउंड, जैसे – ओलेक एसिड और अल्काइल अल्कानोलामाइड भी मिलाया जाता है।

Q4. पेन की नोक यानी निब किस चीज की बनी होती है?

उत्तरः आजकल पेन की निब मुख्यतः स्टेनलेस स्टील या टाइटेनियम से बनाई जाती है।

Q5. दुनिया के सबसे किमती पेन का क्या नाम है?

उत्तरः दुनिया का सबसे कीमती पेन ‘टिबाल्डी फुलगोर नोक्टर्नस’ (Tibaldi Fulgor Nocturnus) है। वर्तमान में इसकी कीमत लगभग 60 करोड़ है। इसे बनाया है इटली की कंपनी टिबाल्डी ने।

 

 

 

 

 

दुनिया का सबसे कीमती कलम

Q6. क्या पेन की स्याही जहरीली होती है?

उत्तरः नहीं! अगर आपके मुंह में किसी प्रकार से कलम की स्याही चली गई है, तो आपको अत्यधिक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार – “बाॅल पेन या फाउंटेन पेन में इतनी कम स्याही होती है कि अगर उसकी पूरी स्याही मुंह के अंदर चली भी जाए तो वह विषैली नहीं होगी।”

हाँ, अगर आपके पेट के अंदर थोड़ी ज्यादा मात्रा में स्याही चली गई है तो आपको थोड़ा ज्यादा पानी पी लेना चाहिए।

Q7. Pencil का आविष्कार किसने किया था?

उत्तरः आधुनिक पेंसिल का आविष्कार फ्रांसीसी चित्रकार और वैज्ञानिक निकोलस-जैक्स कंट (Nicholas-Jacques Conte) ने सन् 1795 में किया था।

Q8. रबर (eraser) का dab pen आविष्कार किसने किया था?

उत्तरः रबर का आविष्कार dab pen इंग्लैंड के dab pen ऑप्टीशियन एडवर्ड नायरने ने सन् 1770 में किया था।

 

 

 

 

 

Q9. पेंसिल के ऊपर रबर fountain pen लगाने dab pen का श्रेय किसे दिया जाता है?

उत्तरः हाइमन लिपमैन fountain pen को, full form of pen लिपमैन को full form of pen ही सबसे पहले पेंसिल के ऊपर fountain pen एक छोटा-सा रबर लगाने का विचार full form of pen आया था। 30 मार्च, 1858 को fountain pen उन्होंने इसके लिए पेटेंट भी प्राप्त किया था।

Q10. पेंसिल शापनर का full form of pen आविष्कार vape pen किसने किया था?

उत्तरः शुरूआती पेंसिल शापनर बनाने का श्रेय फ्रांसीसी गणितज्ञ vape pen बर्नार्ड लैसिमोन को दिया जाता है। लैसिमोन ने सन् 1828 में पहला शापनर बनाया था। vape pen हालांकि xp pen वह आज के शापनर जैसा नहीं था। जिस तरह का शापनर xp pen हम आज उपयोग xp pen करते है, vape pen लगभग वैसा शापनर अफ्रीकी मूल के xp pen अमेरिकी बढ़ई जाॅन ली लव (John Lee Love) ने सन् 1897 में बनाया था।

 

 

 

 

Q11. पेंसिल का मध्य भाग किस चीज से बना होता है?

उत्तरः ग्रेफाइट से, यह क्रिस्टलीय कार्बन का प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रूप है।

Q12. कागज का आविष्कार किसने किया था?

उत्तरः चीन के राजनेता काई लुन ने सन् 105 में आज से मिलते-जुलते कागज का निर्माण किया था। इसलिए काई लुन को ही कागज का आविष्कारक माना जाता है।

Chand Par Pahle kaun Gaya?

चाँद पर सबसे पहले कौन गया था? जानेदोस्तों, पिछले 100 वर्षों के दौरान मनुष्य के साहस और विज्ञान के मिलाप ने हमें कई अद्भुत नजारे दिखाए हैं। moon knight पर पूरा विश्व मानता है कि उनमें सबसे रोमांचक क्षण वो था जब चंद्रमा sheri moon zombie की सतह पर इंसान ने अपना पहला कदम रखा था। लेकिन क्या आपको पता है chand par sabse pahle kon gaya tha और कब? तो बता दे, चाँद की सतह पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति अमेरिकी अंतरिक्ष-यात्री नील आर्मस्ट्रांग (Neil Armstrong) थे। चांद पर अपना पहला कदम उन्होंने 21 जुलाई, 1969 को रखा था।Tik Tok Video Earn Money App टिकटॉक पर वीडियो बनाकर कमाई करने का तरीका(Opens in a new browser tab)

 

अपोलो 11 अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ के अपोलो अभियान का वह महत्वपूर्ण चरण था, जिसके तहत आदमी चांद पर पहुंचा। चंद्रमा पर उतरने की वह ऐतिहासिक उड़ान 16 जुलाई, 1969 को प्रारंभ हुई एवं 24 जुलाई, 1969 को रात 9 बजकर 30 मिनट पर समाप्त।How to Apply Indian Passport Online Tips Step by Step in Hindi ऑनलाइन भारतीय पासपोर्ट कैसे आवेदन करें(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

 

 

चांद पर पहला व्यक्ति - नील आर्मस्ट्रांग

 

 

उस चंद्र अभियान में आर्मस्ट्रांग के साथ दो और अंतरिक्षयात्री – sheri moon zombie बज़ एल्ड्रिन और माइकल कोलिन्स भी थे।sheri moon zombie  नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन चंद्रमा की सतह पर उतरे। तीसरे यात्री कोलिन्स कमांड माॅडयूल में चंद्रमा की परिक्रमा करते रहे।How to open blocked websites easily PC & Mobile ? How to use VPN ? ब्लॉक की गई वेबसाइट को आसानी से कैसे खोलें(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

 

21 जुलाई, 1969 की सुबह 8 बजकर 25 मिनट sheri moon zombie पर आर्मस्ट्रांग ने निम्न शब्दों के साथ चांद की सतह पर अपने sheri moon zombie कदम रखे – “मानव का छोटा कदम, मानवता की विशाल छलांग है।”How to open blocked websites easily PC & Mobile ? How to use VPN ? ब्लॉक की गई वेबसाइट को आसानी से कैसे खोलें(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

 

इसके 19 मिनट बाद एल्ड्रिन भी चंद्रमा पर उतरे। sheri moon zombie उन्होंने चंद्र यान के स्टैंड में लगी एक प्लेट चंद्रमा पर छोड़ दी, जिस पर लिख था: ‘जुलाई 1969 में यहां पृथ्वी के मानव ने सर्वप्रथम अपने पैर रखे।’ और यह भी कि ‘यहां हम समूची मानवता की शांति के लिए आए हैं।’ नीचे तीनों अंतरिक्ष यात्रियों एवं अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी थे।

वर्ष 1969 में इतिहास रचने वाले उन तीन sheri moon zombie अंतरिक्ष यात्रियों की अपूर्व जाँबाजी ने मनुष्य के मन पर अपनी अमिट छोड़ी है। मानव और विज्ञान के इतिहास में यह अद्भुत क्षण था। तो आइए जानते है उन तीन चंद्रयात्रियों के विषय में कुछ और बातें –

 

 

 

 

 

नील आर्मस्ट्रांग – चंद्र सतह छूने वाले पहले व्यक्ति

आइए, सबसे पहले आर्मस्ट्रांग के बारे में जान लेते है; क्योंकि वे ऐतिहासिक अपोलो-11 यान के कमांडर तो थे ही, चंद्रमा को स्पर्श करने वाले पृथ्वी के पहले मानव भी थे।

नील आर्मस्ट्रांग 5 अगस्त, 1930 के दिन अमेरिका के ओहियो राज्य की ऑगलाइज़ काउंटी में जन्मे थे। बचपन से ही नील को नीले-नीले आसमान में उड़ना बहुत अच्छा लगता था। छह साल की छोटी-सी उम्र में एक फोर्ड ट्राइमोटर विमान में क्या सैर की, कि उड़ना उनकी लत बन गई। नतीजा ये कि सोलहवें जन्मदिन पर उनके पास कार चलाने का लाइसेंस तो नहीं था, मगर विमान पायलट का लाइसेंस जरूर था।

 

1947 में नील ने जब ब्लूम हाईस्कूल की पढ़ाई खत्म की तो उस पूरे स्कूल में यह माना जाता था कि असफल होना तो नील जानते ही नहीं। उनके सहपाठी प्यार से कहते थे – “नील… यानी देखा, सोचा, हो गया!”

 

 

 

 

 

इसके बाद उन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनने के लिए पर्ड्यू विश्वविद्यालय में प्रवेश किया, मगर कुछ समय पढ़ाई को रोक देश के लिए कोरिया युद्ध में हिस्सा लिया और एक एयर मेडल व दो गोल्ड स्टार पदक जीते।

 

इंजीनियर बन कर नील ने 1995 में ‘नासा’ में प्रवेश लिया और पायलट, इंजीनियर व अंतरिक्ष-यात्री के तौर पर कई कामों को सफल अंजाम तक पहुंचाया। रिसर्च पायलट के तौर पर नील ने जेट, रॉकेट, हेलीकॉप्टर और ग्लाइडर किस्म वाले 200 प्रकार के मॉडल उड़ाए, जिनमें 4000 मील प्रति घंटे रफ्तार वाला एक्स-15 एयरक्राफ्ट भी शामिल था। इन सभी उड़ानों में रोमांच का अहसास तो होता है, मगर खतरा भी लगातार बना रहता है। मगर नील आर्मस्ट्रांग मन के सचमुच स्ट्रांग सिद्ध हुए… हर बार।

 

 

 

 

 

अपनी हाजिर-दिमागी, आत्मविश्वास, ज्ञान और निर्भीकता के कारण उन्होंने हर मुश्किल को जीता। इतना ही नहीं, दो बार उन्होंने साक्षात यमराज का सामना किया और उन्हें पछाड़ा।

 

जी हाँ, एक बार जेमिनी-8 व दूसरी बार अपोलो-11 की उड़ान के दौरान! जेमिनी-8 का कमांड नील के हाथों में था, मगर तकनीकी खराबी इतनी जबर्दस्त थी कि यान ‘राॅल’ और ‘टम्बल’ करने लगा। ऐसी विकट हालत में भी धैर्य और हाजिर दिमागी से नील ने मुश्किलों पर नियंत्रण पा लिया था, और इसी कारण बाद में उन्हें अपोलो-11 की बागडोर सौंपी गई।

मगर जब वह बज़ एल्ड्रिन के संग लूनर मॉड्यूल ‘ईगल’ में चंद्रमा पर उतरने वाले थे, अचानक कंप्यूटर बार-बार रुकावट डालने लगा, तो नील ने सारे कंट्रोल स्वयं के हाथ में ले लिए और यान को चंद्रमा की सतह पर सफलता से उतार लिया।

 

 

 

 

 

 

उस समय ईगल के लैंडिंग टैंक में सिर्फ 15 सेकंड के लिए ईंधन बचा था। इसका मतलब यह हुआ कि अगर ईंगल अगले 15 सेकंड में न उतर पाता तो निश्चित ही चंद्रमा की सतह पर क्रैश हो जाता… मगर यमराज से नील की यह पहली मुठभेड़ तो थी नहीं कि व घबरा जाते!

पृथ्वी से उड़ान भरने के 109 घंटे और 25 मिनट बाद जब नील ने चंद्रमा पर अपना पहला कदम रखा तो इस अलौकिक घटना के साथी थे संपूर्ण पृथ्वी के एक-चौथाई मनुष्य जो अपने टी.वी. अथवा रेडियो से चिपके थे। आर्मस्ट्रांग के कई वक्तव्य आज भी जन-जन की जुबान पर हैं… मसलन – ‘ह्यूस्टन, ये ट्रांक्विलिटी बेस है, ईगल उतर चुका है’; ‘मेरा यह छोटा-सा कदम पूरी मनुष्य जाति के लिए प्रगति की बड़ी छलांग है’, तथा ‘यहां चलने-फिरने में कोई दिक्कत नहीं’ आदि।

 

 

 

 

 

 

नील आर्मस्ट्रांग को दुनिया ने सिर्फ चंद्रपुरूष के रूप में ही नहीं, युगपुरुष के रूप में भी देखा-निहारा है। कुल 17 देशों ने उन्हें बड़े-बड़े सम्मान दिए मगर नील को घमंड ने छुआ तक नहीं। अपनी बहादुरी और उपलब्धियों के बारे में वे बस इतना कहते थे – “मैं लकी रहा हूं।”

बज़ एल्ड्रिन – चांद पर दूसरा कदम

पृथ्वी से चार लाख किलोमीटर दूर पहुंच कर चंद्रमा पर चहलकदमी करने वाले दूसरे इंसान थे बज़ एल्ड्रिन। नील आर्मस्ट्रांग के 19 मिनट बाद चाँद पर कदम रखने वाले एल्ड्रिन ही सचमुच ‘ईगल’ के पायलट थे, और जाहिर है कि नील की तरह उन्होंने भी यमराज का सामना किया।

बज़ एल्ड्रिन का जन्म अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के मोंटक्लैयर स्थान पर हुआ, दिन था 20 जनवरी 1930! ऐस्ट्रोनाॅमिक्स में पी.एच.डी. करने के बाद जब 1963 में उन्होंने नासा ज्वाइन की, तो उनके मित्रों ने भविष्यवाणी कर दी थी कि एल्ड्रिन चंद्रमा पर अवश्य उतरेंगे।

 

 

 

 

 

 

इसका पहला कारण तो यह है कि एल्ड्रिन की मां का नाम है मैरियन मून, तो मून का बेटा मूनमैन बने ऐसा तो स्वाभाविक ही माना जाएगा न? दूसरा कारण – एल्ड्रिन के पिता महान रॉकेट वैज्ञानिक रॉबर्ट गोडार्ड के शिष्य रहे।

 

11 नवंबर, 1966 को जब जेमिनी-12 अंतरिक्षयान में बज़ उड़े और जितनी सुगमता से उन्होंने बाहर निकल अंतरिक्ष की सैर कर दिखाई, तभी से उनका मूनमैन बनना समझो पक्का हो गया। सच पूछिए तो जेमिनी कार्यक्रम के इस अंतिम अंतरिक्षयान की सफलता का मुख्य श्रेय एल्ड्रिन की सूझबूझ और व्यवहारकुशलता को ही दिया गया है।

कैपकॉम (पृथ्वी पर ह्यूस्टन में मौजूद कैप्सूल कम्युनिकेटर) ने जब आर्मस्ट्रांग तथा एल्ड्रिन को चंद्रतल की विशेषताएं बताने को कहा तो एल्ड्रिन के शब्द ज्यादा काव्यमय थे। एल्ड्रिन ने कहा था – “ये दृश्य अति सुंदर, अति मनोरम हैं। दूर-दूर तक अतुलनीय स्तब्धता छाई है!”

 

 

 

 

 

 

माइकल कोलिन्स – कमांड मॉड्यूल के नियंत्रक

माइकल चंद्रमा पर नहीं उतरे, moon knight बल्कि चंद्रमा की परिक्रमा करते रहने वाले कमांड माॅडयूल ‘कोलंबिया’moon knight  का सफल संचालन करते रहे। इस बीच माइकल ने moon knight कैपकॉम के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और महत्व की जरूरी सूचनाएं आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन तक पहुंचाते रहे।

दो घंटे के मूनवॉक के बाद जब आर्मस्ट्रांग तथा एल्ड्रिन moon knight थक कर पाँच घंटे सोते रहे, चंद्रमा के 60 मील ऊपर चंद्र-परिक्रमा करते प्रहरी moon knight माइकल कोलिन्स सतर्क और जागरूक रहे। फिर चंद्र अनवेशेषण के बाद ‘ईगल’ moon knight के साथ सफल डाॅकिंग कर आर्मस्ट्रांग तथा एल्ड्रिन को कोलंबिया द्वारा पृथ्वी पर सुरक्षित वापस ले आए!

कोलिन्स इटली के रोम शहर में 31 अक्टूबर, moon knight 1930 को जन्मे, मगर उनकी शिक्षा-दीक्षा अमेरिका में ही हुई। विज्ञान में 1952 में स्नातक की डिग्री लेने के बाद वे एयरफोर्स में आए, फिर नासा में प्रवेश किया।

 

 

 

 

 

 

कोलिन्स ने अपोलो-11 के अपने chand sign शानदार काम से chand sign पहले जेमिनी-10 अंतरिक्षयान में भी उड़ान chand sign भरी और chand sign अपनी अंतरिक्ष-कुशलता और प्रवीणता का परिचय दिया। chand sign नासा से रिटायर होने के बाद वे वाशिंगटन स्थित ‘नेशनल एयर एण्ड स्पेस म्यूजियम’ के chand sign डायरेक्टर के soleil moon frye पद पर शानदार काम करते रहे।

आर्मस्ट्रांग, एल्ड्रिन और कोलिन्स chand sign का नाम आज soleil moon frye भी जन-जन की जुबान पर है, soleil moon frye क्योंकि दुनिया जानती है soleil moon frye कि उन्होंने अपनी जान chand sign की बाजी लगाकर चंद्रान्वेषण जैसी अनोखी कल्पना को साकार कर दिखाया। soleil moon frye

 

 

 

 

 

 

स चंद्रान्वेषण को ‘Moonshot’ chand पुस्तक के लेखकों, chand एलन शेपर्ड, डेके स्लेटन तथा जे बारब्री ने इन शब्दों में chand बयान किया chand है – chand “उनका हर कदम एक chand नया प्रयोग था; उनकी हर हलचल अपने आप में एक chand अन्वेषण थी; उनका मुड़ना-चलना-फिरना, कम गुरूत्व में उछलना-कूदना chand हर काम अपूर्व एडवेंचर से सराबोर था!”

Space Mein Jane Wala Pehla Vyakti Kaun Hai?

अंतरिक्ष में जाने वाला पहला व्यक्ति कौन था? जानेमनुष्य के लिए अंतरिक्ष हमेशा से ही जिज्ञासा का विषय रहा है। उसकी इच्छा धरती की सीमा से बाहर जाकर चांद, तारों और ग्रहों का अध्ययन करने की रही हैं। मनुष्य की उस शताब्दियों पुरानी इच्छा first man in space को आज से 60 वर्ष पूर्व एक व्यक्ति ने अंतरिक्ष में जाकर पूरा किया। लेकिन क्या आपको मालूम है antriksh mein jane wala pehla vyakti कौन था? तो बता दे, वो व्यक्ति था रूस का वायु सेना का पायलट यूरी गगारिन (Yuri Gagarin)। गगारिन ने ही 12 अप्रैल, 1961 को अंतरिक्ष में जाकर मनुष्य के वर्षों पुराने अंतरिक्ष-यात्रा के सपने को पूरा किया था।

 

यूरी गगारिन का जन्म वर्ष 1934 में हुआ था और जब उन्हें 1960 में अंतरिक्ष में जाने के लिए चुना गया तब वे मात्र 27 साल के थे।

 

अंतरिक्ष में जाने वाला प्रथम व्यक्ति

 

 

 

 

 

उन्होंने वोस्तोक-1 अंतरिक्षयान द्वारा सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर रूस के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से अपनी यात्रा शुरू कि तथा अंतरिक्ष में 1 घंटे 48 मिनट बिताने के बाद 8 बजकर 5 मिनट पर धरती पर वापस आ गए। इस दौरान उन्होंने 327 किलोमीटर ऊपर से धरती की एक पूरी परिक्रमा भी की। 

Q2. यूरी गगारिन अंतरिक्ष में जाने वाले पहले इंसान थे; लेकिन अंतरिक्ष में जाने वाला पहला जानवर कौन-सा था?

उत्तरः गगारिन से भी पहले रूस के अंतरिक्ष विज्ञानीयों ने एक कुत्ते ‘लाइका’ (Laika) को अंतरिक्ष में भेजा था। यह अंतरिक्ष में जाने वाला पहला जानवर था। उसे 3 नवंबर, 1957 को अंतरिक्षयान स्पुतनिक-2 द्वारा जीवों पर माइक्रोग्रैविटी के कारण पड़ने वाले प्रभावों को जानने के लिए भेजा गया था। हालांकि, अंतरिक्षयान के लाॅन्च होने के कुछ घंटों बाद ही पृथ्वी की कक्षा में लाइका की मृत्यु हो गई थी।

 

 

 

 

 

Q3. पहली महिला अंतरिक्ष-यात्री कौन थी?

उत्तरः प्रथम महिला अंतरिक्ष-यात्री रूस की वैलेंटीना तेरेश्कोवा (Valentina Tereshkova) थी। ये प्रथम महिला अंतरिक्ष-यात्री के साथ-साथ सबसे कम उम्र की महिला अंतरिक्ष-यात्री भी थी। ये वोस्तोक-6 अंतरिक्षयान द्वारा 16 जून, 1963 को अंतरिक्ष में गयी थी। ये अंतरिक्ष में लगभग तीन दिनों तक रही और इस दरम्यान उन्होंने धरती की 48 बार परिक्रमा की।

 

 

 

 

Q4. प्रथम भारतीय अंतरिक्ष-यात्री कौन थे?

उत्तरः प्रथम भारतीय अंतरिक्ष-यात्री विंग कमांडर राकेश शर्मा थे। राकेश शर्मा भारतीय वायु सेना के पायलट थे। वे 2 अप्रैल, 1984 को रूस के दो अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ सोयूज टी-11 स्पेसक्राफ्ट द्वारा अंतरिक्ष में गए थे। वे अंतरिक्ष में लगभग 7 दिन रहे तथा विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजमा दिया।

 

 

 

 

 

 

 

 

Q5. अंतरिक्ष में जाने वाले सबसे बुजुर्ग व्यक्ति का क्या नाम है?

उत्तरः अमेरिका के जॉन ग्लेन अंतरिक्ष में जाने वाले सबसे अधिक उम्र के व्यक्ति थे। वे 1998 में 77 वर्ष की उम्र में अंतरिक्ष में गये थे। अंतरिक्ष में जाने वाली सबसे वयोवृद्ध महिला अंतरिक्ष-यात्री अमेरिका की पैगी व्हिट्सन है, जो वर्ष 2016 में 57 वर्ष की उम्र में अंतरिक्ष में गई थी।

Q6. प्रथम भारतीय महिला अंतरिक्ष-यात्री कौन थी? और वह पहली बार अंतरिक्ष में कब गई थी?

उत्तरः अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला कल्पना चावला (Kalpana Chawla) थी और वे पहली बार अंतरिक्ष में नासा के एसटीएस-87 स्पेस शटल मिशन द्वारा पांच अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ 19 नवंबर, 1997 को अंतरिक्ष में गई थी। इस मिशन के दौरान वे अंतरिक्ष में लगभग 15 दिनों तक रही और 252 बार पृथ्वी की परिक्रमा की।

 

 

 

 

 

 

 

कल्पना चावला और एसटीएस-107 मिशन के अन्य 6 अंतरिक्ष-यात्री

कल्पना चावला दूसरी बार अंतरिक्ष में नासा के एसटीएस-107 स्पेस शटल मिशन द्वारा 6 अन्य अमेरिकी अंतरिक्षयात्रियों के साथ गई थी लेकिन सफलतापूर्वक मिशन समाप्त कर धरती पर वापसी के वक्त स्पेस शटल में आग लग जाने के कारण 1 फरवरी, 2003 को सातों अंतरिक्षयात्रियों की मृत्यु हो गई।

Q7. अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने वाले अंतरिक्ष-यात्री कौन है?

उत्तरः रूस के वायु सेना अधिकारी गेनाडी पडल्का (Gennady Padalka) अंतरिक्ष में सबसे अधिक दिनों रहने वाले अंतरिक्ष-यात्री है। ये पांच से अधिक अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान 879 दिनों तक अंतरिक्ष में रह चुके हैं।

रूसी अंतरिक्ष-यात्री वलेरी पाॅलाकोव (Valeri Polyakov) अंतरिक्ष में लगातार सबसे अधिक दिनों तक रहने वाले व्यक्ति है। ये जनवरी 1994 से मार्च 1995 तक लगातार 14 महीने तक अंतरिक्ष में रहे थे।

 

 

 

 

Q8. किस महिला अंतरिक्ष-यात्री के पास लगातार सबसे first man in space अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहने का विश्व रिकॉर्ड है?

उत्तरः अमेरिकी महिला अंतरिक्ष-यात्री first man in space क्रिस्टीना first man in outer space कोच (Christina Koch) के पास। first man in outer space क्रिस्टीना 14 मार्च, 2019 से लेकर 6 फरवरी, 2020 के बीच 328 दिनों तक first man in outer space अंतरिक्ष में रही। यह अभी तक किसी भी महिला first man in space अंतरिक्ष-यात्री द्वारा अंतरिक्ष में बिताया गया सबसे लंगा समय है।

Q9. अमेरिका के प्रथम अंतरिक्ष-यात्री कौन थे?

उत्तरः प्रथम अमेरिकी अंतरिक्ष-यात्री एलन शेपर्ड थे। first american man in space वे मरकरी अंतरिक्षयान द्वारा 5 मई, 1961 को first american man in space अंतरिक्ष गये थे तथा मात्र 15 मिनट अंतरिक्ष में first american man in space बिताकर पृथ्वी पर वापस आ गए थे। शेपर्ड वर्ष 1971 में first american man in space अपोलो-14 मिशन के दौरान दो अन्य अंतरिक्षयात्रियों के साथ चंद्रमा पर भी गये थे।

अमेरिका की पहली महिला अंतरिक्ष-यात्री सैली राइड (Sally Ride) थी, जो 18 जून, 1983 को स्पेस शटल द्वारा अंतरिक्ष में गई थी।

 

 

 

 

Q10. भारतीय मूल की दूसरी महिला अंतरिक्ष-यात्री कौन है?

उत्तरः सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की दूसरी महिला अंतरिक्ष-यात्री है। उनकी अंतरिक्ष यात्रा 9 दिसंबर, 2006 को शुरू हुई तथा 194 दिनों बाद, 22 जून, 2007 को वे धरती पर वापस आ गई।

Sabse Bada Janwar Kaunsa Hain

दुनिया का सबसे बड़ा जानवर कौन-सा है? जानेधरती ऐसे लाखों तरह के जीवों का घर हैं, जो आकार, रहने के स्थान, रंग-रूप एवं स्वभाव में अलग-अलग है। biggest bird लेकिन क्या आपको पता है, दुनिया का sabse bada janwar kaun sa hai? तो बता दे, दुनिया का सबसे विशाल जानवर ‘नीली व्हेल‘ (Blue Whale) को माना जाता है। विश्व में सबसे लंबा और वजनदार प्राणी नीली व्हेल ही है। इसकी लंबाई लगभग 32 मीटर और वजन 200 टन तक होता है।मार्कशीट लोन क्या है और कैसे मिलेगा Marksheet Loan in Hindi(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

 

सबसे अधिक लंबाई वाली नीली व्हेल जिसके बारे में आजतक पता चला है, वह 110 फुट से भी अधिक लंबी थी। वह सन् 1909 में दक्षिण अटलांटिक महासागर के दक्षिण जॉर्जिया के समुद्र तट पर पाई गई थी। एक अन्य मादा नीली व्हले, जिसे रूसी व्हले अभियान दल ने 20 मार्च 1947 को दक्षिणी समुद्र से पकड़ा था, वह 90 फुट से अधिक लंबी तथा 190 टन भारी थी।Ban Tiktok App kaise Download kare Android & Iphone प्रतिबंध Tiktok App डाउनलोड कैसे(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

 

धरती का सबसे विशाल जानवर

 

 

 

 

 

 

 

ज्यादातर लोग नीली व्हेल को मछली की एक प्रजाति समझते है, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि समुद्र में रहने वाला यह जीव मछली नहीं बल्कि एक स्तनधारी जीव यानी mammal है; जिसकी मादा अंडे न देकर सीधा बच्चे पैदा करती है तथा उन्हें अपना दूध भी पिलाती है।

नीली व्हेल को मछली इसलिए भी नहीं माना जाता है क्योंकि इसमें मछलियों की भांति गिल्स नहीं होते। यह हमारी ही तरह फेफड़ों से सांस लेती है। इसके सिर के आगे के हिस्से में नथुने होते हैं। जब ये पानी के अंदर होती है तो नथुने बंद रहते हैं। इसे सांस लेने के लिए हर 5-10 मिनट में पानी के ऊपर आना पड़ता है। The Wright Brothers Kaun hai? First Airplane Kisne Banaya?(Opens in a new browser tab)

 

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नीली व्हेल से जुड़े 10 आश्चर्यजनक एवं महत्वपूर्ण तथ्य

  1. नीली व्हेल की तुलना अगर विशाल अफ्रीकी हाथी से कि जाए तो यह 5 अफ्रीकी हाथियों जितना लंबा और 40 अफ्रीकी हाथियों जितना भारी होगा।
  2. दुनिया के सभी महासागरों में पाए जाने वाले ब्लू व्हेल विश्व के सबसे बड़े प्रवासी जानवर भी हैं। ये हर वर्ष सर्दीयों में हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्थित महासागरों में प्रजनन करने के लिए चले जाते हैं तथा गर्मियों में पुनः अत्यंत ठंडे धुव्रीय महासागरों में लौट जाते हैं।
  3. अपने विशाल आकार के बावजूद नीली व्हेल महासागरों में पाये जाने वाले केकड़े जैसे छोटे जीव ‘क्रिल’ को खाती हैं। वर्ष के कुछ निश्चित दिनों में एक व्यस्क ब्लू व्हेल लगभग 4 टन क्रिल प्रतिदिन खा लेती हैं।
  4. इस विशाल जानवर का जीभ पृथ्वी पर मौजूद किसी भी जानवर की जीभ की तुलना में भारी होता है। इसके जीभ का वजन लगभग 4 टन यानी 3,600 किलोग्राम तक होता है।
  5. बड़े शरीर के कारण ब्लू व्हेल को ज्यादा ऑक्सीजन की भी जरूरत होती है। इसलिए इसके फेफड़ें भी बहुत बड़े होते हैं, जिनकी क्षमता लगभग 5000 लीटर होती है।
  6. ब्लू व्हेल का दिल सभी जानवरों में सबसे बड़ा होता है। इसका दिल एक कार जितना बड़ा होता है तथा वजन लगभग 680 किलोग्राम। हालांकि ये किसी भी स्तनपायी जानवर की दिल की तुलना में बहुत धीरे धड़कता है, एक मिनट में केवल 4 से 8 बार!
  7. ब्लू व्हेल पानी के अंदर बिना सांस लिए लगभग 1 घंटे तक रह सकती है।
  8. इसका दिमाग शरीर के अनुपात में बहुत छोटा होता है। जिसका वजन केवल 6 किलोग्राम होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मनुष्य के दिमाग का वजन 1.4 किलोग्राम होता है।
  9. नीली व्हेल दुनिया के सबसे तेज आवाज निकालने वाले जानवरों में से एक हैं। ये एक विशेष प्रकार की आवाज निकलती है, जिसे लगभग 1600 किलोमीटर दूर स्थित अन्य व्हेलें भी सुन लेती हैं।
  10. जन्म के समय नीली व्हेल की बच्चे की लंबाई 8 मीटर तथा वजन लगभग 4000 किलोग्राम होता है। यह पहले साल सिर्फ अपनी माँ का वासायुक्त दुध (fatty milk) पीता है, जिससे प्रतिदिन बच्चे का वजन लगभग 90 किलोग्राम बढ़ता जाता है!

 

 

 

 

 

 

Q2. ब्लू व्हेल का वैज्ञानिक नाम क्या है?

उत्तरः बालनोप्टेरा मस्कुलस (Balaenoptera musculus)

Q3. ब्लू व्हेल औसतन कितने वर्ष जीवित रहती है?

उत्तरः नीली व्हेल की औसत आयु 80 से 90 वर्ष है, लेकिन कई ब्लू व्हेल 110 वर्ष की आयु तक भी जीवित रहती है।

Q4. पानी में ब्लू व्हेल की तैरने sabse bada janwar की रफ्तार कितनी sabse bada janwar होती है?

उत्तरः नीली व्हेल पानी में सामान्य sabse bada janwar रूप से 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तैरती है, लेकिन किसी प्रकार का खतरा महसूस होने पर या उत्तेजित होने पर ये लगभग 32 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी तैर सकती है।

Q5. ब्लू व्हेल का संबंध व्हेल की biggest bird of prey किस प्रजाति से है?

उत्तरः बैलीन व्हेल (Baleen whale) से, biggest bird of prey यह व्हेल की ऐसी biggest bird प्रजाति है जिसके मुंह में the biggest bird in the world दांत नहीं होते। biggest bird of prey दांत के स्थान पर इनके मुंह में biggest bird नाखूनों जैसा एक the biggest bird in the world जालीदार प्लेट the biggest bird in the world होता है। biggest bird of prey जिसकी मदद से ये भोजन को निगलने समय पानी से अलग the biggest bird in the world कर देती है।

 

 

 

 

 

Q6. ब्लू व्हेल को और biggest bird किस biggest bird नाम से जाना जाता है?

उत्तरः सल्फर-बाटम biggest bird व्हेल (sulfur-bottom whale)

Sabse bada Pakshi Kaunsa Hai

दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी कौन-सा है? जानेपक्षी रीढ़ की हड्डी वाले ऐसे जीव है जिनके पंख होते है। ये पंखों को फड़फड़ाने के लिए अपनी मजबूत मांसपेशियों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि पक्षियों की कुछ ऐसी प्रजातियां हैं जिनका आकार बहुत बड़ा होता है largest bird in the world लेकिन उनके पंख इतने शक्तिशाली नहीं होते की वे उड़ पाये। क्या आपको मालूम है, Duniya ka sabse bada pakshi kaun sa hai? तो बता दे, दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी शुतुरमुर्ग (Ostrich) है। यह 2 से 3 मीटर लंबा तथा 100 से 150 किलोग्राम तक वजनी होता है।Duniya Me Sabse Jahrila Saap Kaunsa Hai?(Opens in a new browser tab)

 

 

 

 

वैसे तो अब शुतुरमुर्ग पूरी दुनिया में देखे जा सकते हैं लेकिन यह मुख्यतः अफ्रीका में ही पाया जाता है। इसे रैटाइट (ratite) भी कहा जाता है। विशाल आकार का यह पक्षी उड़ तो नहीं सकता लेकिन यह बहुत तेज दौड़ लगा सकता है।Kaise Chune Best Facial Apni Skin ke liye MAN & WOMAN(Opens in a new browser tab)

 

विश्व की सबसे बड़ी चिड़िया

 

 

 

 

 

 

वास्तव में शुतुर तथा मुर्ग अरबी भाषा के शब्द हैं। शुतुर का अर्थ है ऊँट तथा मुर्ग का अर्थ है पक्षी, अर्थात ऊँट के जैसा पक्षी। संसार का यह सबसे बड़ा पक्षी आदमी से से लगभग दुगुना भारी होता है।Plastic Bucket Manufacturing Business in Hindi प्लास्टिक की बाल्टी विनिर्माण व्यवसाय(Opens in a new browser tab)

नर शुतुरमुर्ग अपेक्षाकृत बड़ा होता है तथा उसका रंग काला होता है जिस पर सफेद रंग के पंख व पूँछ होती है। मादा आकार में छोटी होती है तथा उसका रंग भूरा होता है। एक नर शुतुरमुर्ग के साथ दो मादा शुतुरमुर्गों का जोड़ा बन सकता है।

 

 

 

दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी हाथी और जुराफ से भी बड़ा पक्षी.. - Internet tips

 

यह विशालकाय पक्षी शाकाहारी होता है जो लगभग 80 किमी. प्रति घंटा की गति से भाग सकता है। शुतुरमुर्ग के संबंध में प्रचलित यह कहानी बिल्कुल गलत है कि भयभीत होकर यह अपना सिर रेत में छिपा लेता है। वास्तव में यह बहुत बहादुर पक्षी है तथा खतरे का डट कर मुकाबला करता है और दुश्मन पर आक्रमण करके उसे भगा देता है।

शुतुरमुर्ग कठोर परिस्थितियों को सहन कर सकता है तथा 2 से 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में रह सकता है। यह लगभग 30-40 वर्ष तक जीवित रहता है तथा लगभग 30 वर्षों तक प्रजनन कर सकता है।

 

 

 

 

 

शुतुरमुर्ग का अंडा हल्का पीला रंग लिये सफेद होता है, जिसका भार लगभग 1.5 किलोग्राम (लगभग 24 मुर्गी के अंडों के बराबर) होता है। इसके अंडे को दुनिया की सबसे बड़ी कोशिका माना जाता है। मादा शुतुरमुर्ग एक वर्ष में लगभग 50 अंडे देती है। वैसे सभी अण्डों से बच्चे नहीं निकलते हैं।

जंगलों में बहुत सी मादायें एक साथ एक ही घोंसले में अपने अंडे देती हैं जिन्हें दिन के समय मादा तथा रात के समय नर सेता है। शुतुरमुर्ग के अंडों को उबालने में 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता है। इसके एक आमलेट से 8-10 लोगों का नाश्ता हो जाता है।

 

 

Q2. शुतुरमुर्ग के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी कौन-सा है?

उत्तरः शुतुरमुर्ग के बाद एमू (Emu) दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी है। यह भी शुतुरमुर्ग की तरह रैटाइट प्रजाति का ही पक्षी है और मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह 1.50-1.88 मीटर तक लंबा तथा 30-45 किलोग्राम तक वजनी होता है।

 

Emu – दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी

ऐमू के बच्चे के शरीर पर सफेद भूरी धारियां होती हैं। लेकिन ऐमू जब युवा होता है तो उसकी धारियां समाप्त हो जाती हैं और पंखों का रंग भूरा हो जाता है। इसकी गर्दन नीली-सफेद तथा बगैर बालों की होती है।

नर तथा मादा ऐमू देखने में एक जैसे लगते हैं तथा उनमें भेद कर पाना अत्यंत कठिन होता है। मादा ऐमू एक वर्ष में लगभग 25 अंडे देती है, जिसका भार 500 ग्राम से लेकर 800 ग्राम तक होता है। अंडों का रंग चमकदार गहरा हरा होता है। इनका अंडा देखने में अति सुंदर होता है जिसके छिलके पर कलात्मक व सजावटी चित्रकारी भी की जाती है। आकार तथा भार में ऐमू का एक अंडा मुर्गी के लगभग 14 अंडों के बराबर होता है।

 

 

 

 

 

Q3. दुनिया का सबसे छोटा पक्षी कौन-सा है?

उत्तरः विश्व का सबसे छोटा पक्षी बी हमिंगबर्ड (Bee hummingbird) है। इसकी लंबाई मात्र 57 मिलीमीटर होती है तथा वजन मात्र 1.6 ग्राम। यह सिर्फ कैरिबियाई सागर में स्थित देश क्यूबा में ही पाया जाता है। इसे जुनजुनसिटो और हेलेना हमिंगबर्ड भी कहा जाता है।

Q4. विश्व का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी कौन-सा है?

उत्तरः पेरेग्रीन फाल्कन दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी है। यह हवा में 385 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। यह सिर्फ अंटार्कटिका को छोड़ सभी महाद्वीपों में पाया जाता है। भारत में इसे घुमन्तु बाज तथा बिहिरी भी कहा जाता है।

 

 

 

 

 

Q5. दुनिया के सबसे largest bird of prey बड़े तैरने वाले largest bird of prey पक्षी का क्या नाम है?

उत्तरः सबसे बड़ा तैरने वाला पक्षी एम्परर largest bird of prey पेंगुइन (Emperor penguin) है। ये सिर्फ दक्षिणी ध्रुव के अंटार्कटिका महाद्वीप में पाया जाता है। एम्परर पेंगुइन सभी पेंगुइनों में सबसे बड़ा होता है, largest bird of prey जिसकी लंबाई 1.5 मीटर तक होती है। ये समुद्र में 500 मीटर तक गोता लगा सकता है तथा पानी में बिना सांसl argest bird of prey लिए 22 मिनट तक रह सकता है।

Q6. भारत का सबसे बड़ा पक्षी कौन-सा है?

उत्तरः द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian bustard) भारत का सबसे बड़ा पक्षी है। यह 1 मीटर तक लंबा तथा 15 किलोग्राम तक वजनी होता है। यह दुनिया के उड़ने वाले सबसे भारी पक्षियों में से एक है। यह भारत के राजस्थान राज्य का राज्य पक्षी भी है। इसे भारत में सोहन चिड़िया, गोडावण, तूंगदार, गगन भेड़, गुरहना, गुराइन आदि नामों से जाना जाता है।

 

 

 

 

 

Q7. सबसे अधिक ऊंचाई पर उड़ने वाला पक्षी का नाम क्या है?

उत्तरः रूपेल का ग्रिफ़ाॅन गिद्ध largest bird sanctuary in india (Rüppell’s Griffon Vulture) सबसे अधिक largest bird sanctuary in india ऊंचाई पर largest bird sanctuary in india उड़ने वाला पक्षी है। largest bird sanctuary in india मध्य अफ्रीका में पाया जाना वाला यह गिद्ध 36,000-38,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है।

Q8. भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर (Indian peafowl) का वैज्ञानिक नाम क्या है और इसका संबंध पक्षियों के किस परिवार से है?

उत्तरः मोर का वैज्ञानिक largest flying bird नाम पावो क्रिस्टेटस (Pavo cristatus) है तथा इसका संबंध पक्षियों के फासिंडी (Phasianidae) परिवार largest flying bird से है।

 

 

 

 

Q9. किस पक्षी की आंखें largest flying bird सभी स्थलीय जीवों largest bird in the world में सबसे बड़ी होती है?

उत्तरः शुतुरमुर्ग की, largest flying bird जी हाँ! largest bird in the world शुतुरमुर्ग की largest bird in the world आंखें जमीन पर रहने वाले सभी largest flying bird जीवों में सबसे बड़ी होती हैं। largest bird in the world इनके आंखों का आकार छोटे बिलियर्ड गेंद जितना होता हैं।

Q10. दुनियाभर में पक्षियों की कितनी प्रजातियां पाई जाती हैं?

उत्तरः लगभग 10,000

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